Health & Wellness
सभी तरह की बीमारियों का आयुर्वेद और नेचुरोपैथी के माध्यम से इलाज किया जाता है ! निशुल्क परामर्श के लिए संपर्क करें (फ्री होम डिलीवरी सुविधा उपलब्ध है)
➡️कपूर और नींबु कितने उपयोगी है🙏
➡️दिन में सिर्फ़ एक बार यह साधारण सा उपाय करके देखिए, सिर से पैर की उंगली तक साडीडीरी नसें मुक्त होने का आपको स्पष्ट अनुभव होगा कि सिर से पैर तक एक तरह से करंट का अनुभव होगा, आपके शरीर की नसें मुक्त होने का स्पष्ट अनुभव होगा। हाथ–पैर में होने वाली झंझनाहट (खाली चढ़ना) तुरंत बंद हो जाती हैं।
➡️पुराना घुटनों का दर्द और कमर, गर्दन या रीड की हड्डी (मणके) में कोई नस दबी या अकड़ गई है तो वह पूरी तरह से ठीक हो जाएगी, पुराना एड़ी का दर्द भी ठीक हो जाएगा।
➡️इस उपाये से बहुत से लोगों के लाखों रुपए बच सकते हैं। पैर में फटी एड़ियां और डैड स्किन रिमूव हो जाती है और पैर कोमल हो जाते हैं और इसके पीछे जो विज्ञान और आयुर्वेद है.
➡️यह उपाय करने के लिए हमें घर में ही उपलब्ध कपूर और नींबू, ये दो चीजें चाहियें। इस उपाय को करने के लिए डेढ़ से दो लीटर गुनगुना पानी लें, जिसका तापमान पैर को सहन होने जितना गरम हो, उसमे आधे नींबू का रस निचोड़े और फिर नींबू को भी उस पानी में डाल दें
➡️फिर दूसरी चीज कपूर है–कोई भी कपूर हो। कपूर की तीन गोलिय् बारीक पीस कर उसका पाउडर बना लें, यह भी उस पानी में मिला लें, फिर पांच से दस मिनट तक पैरों को इस पानी में डाल कर रखें।
➡️जैसे ही आप पैरों को पानी में डालेंगे, तो आपको इससे सिर से पैर तक एक तरह से करंट का अनुभव होगा। आपके सिर के बालों से पैर तक की सारी नसें मुक्त होने का स्पष्ट रूप से अनुभव होगा। इसका कारण यह है कि हमारे पैरों में 172 प्रकार के प्रेशर पॉइंट होते हैं, जो हमारे शरीर की सभी नसों के साथ जुडे होते हैं।
➡️यह नींबू और कपूर वाला गुनगुना पानी इन 172 प्रकार के प्रेशर पॉइंट्स को मुक्त कर देता है और इससे शरीर की सारी नसें एकदम से रीएक्टिवेट हो जाती हैं और पूरी तरह से मुक्त हो जाती हैं, ऐसा अनुभव होता है।
➡️इस उपाय में सिर्फ पांच से दस मिनट तक इस पानी में पैर डाल कर रखने है और यह दिन में कभी भी सुबह या शाम को कर सकते हैं।
➡️इससे हाथ, पैर में होने वाली झनझनाहट (खाली चढ़ना) बंद हो जाती हैं और कोई नस दबी या अकड़ गई हो, तो वह खुल जाएगी और सिरदर्द भी इस उपाय से बंद हो जाता है।
➡️जिन लोगों को माइग्रेन की तकलीफ हो वह भी, पानी में पैर रखने के साथ ही बन्द हो जायेगी। अगर स्नायु अकड़ गये हों या शरीर दर्द कर रहा हो तो यह उपाय करके देखिए।
➡️इसका कोई साइड इफैक्ट नहीं है और यह उपाय सरल रूप से किया जा सकता है।
➡️यह उपाय पांच दिन करना है। यह उपाय दिखने में तो सरल लगता है मगर इस का रिज़ल्ट बहुत ही अच्छा और असरदार होता है आपको इससे नुकसान कुछ नहीं होगा फायदा ही होगा
➡️नोट 👉 आयुर्वेदिक औषधि का उपयोग करने से पहले किसी अपने आसपास के आयुर्वेदिक डॉक्टर या वैध के मार्गदर्शन में ले
➡️जानकारी अच्छी लगे तो शेयर जरूर करें जिससे जरूरतमंद तक जानकारी पहुंच सके 🙏
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03/05/2026
सावधान पेरासिटामोल सिरप जांच में फेल ।
नशा मुक्ति देसी दवा
#नशामुक्तभारत
20/04/2026
क्या आपका शरीर आपको कोई सिग्नल दे रहा है? 🤔 हमारी बॉडी बहुत स्मार्ट है! ये हमें अंदर की दिक्कतों का सिग्नल बाहर से ही दे देती है। आपके पेशाब (Urine) का रंग भी आपकी सेहत का एक बहुत बड़ा इंडिकेटर है।
आइए आसान भाषा में समझते हैं कि कौन सा रंग क्या कहता है:
🟡 हल्का पीला: आप एकदम सही मात्रा में पानी पी रहे हैं। आपकी सेहत बिल्कुल फिट है!
💧 बिल्कुल साफ़ (पानी जैसा): आप ज़रूरत से बहुत ज़्यादा पानी पी रहे हैं। आप इसे थोड़ा कम कर सकते हैं।
🔴 लाल या गुलाबी: यह पेशाब में खून होने का संकेत हो सकता है। इसे इग्नोर न करें और तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।
🟠 चमकदार पीला या नारंगी: यह अक्सर मल्टी-विटामिन या कुछ दवाइयों का असर होता है।
🔵/🟢 नीला या हरा: दवाइयों, खाने वाले रंग या शतावरी (Asparagus) जैसी सब्जियों की वजह से ऐसा हो सकता है।
🟤 गहरा भूरा: आपके शरीर में पानी की बहुत ज़्यादा कमी (Dehydration) हो गई है। तुरंत पानी पीना शुरू करें!
🍺 झागदार: आपके खाने में प्रोटीन की मात्रा बहुत ज़्यादा है।
🌫️ धुंधला: यह यूरिन इन्फेक्शन (UTI) या बैक्टीरिया का संकेत हो सकता है।
🌱 यूरिन ट्रैक को साफ और स्वस्थ रखने के आसान घरेलू उपाय (Home Remedies):
पर्याप्त पानी पिएं: दिन भर में कम से कम 8-10 गिलास पानी पिएं।
नींबू पानी: सुबह खाली पेट हल्के गुनगुने पानी में नींबू निचोड़कर पीने से किडनी और यूरिनरी ट्रैक एकदम साफ़ रहता है।
नारियल पानी और छाछ: शरीर में पानी की कमी दूर करने और यूरिन की जलन को शांत करने के लिए नारियल पानी या ताजी छाछ बहुत फायदेमंद है।
धनिया का पानी: अगर यूरिन में जलन या हल्का पीलापन है, तो रात को 1 चम्मच सूखा धनिया एक गिलास पानी में भिगो दें। सुबह इसे छानकर पी लें। यह शरीर की गर्मी कम करता है।
⚠️ ध्यान दें: यह जानकारी आम जागरूकता के लिए है। अगर पेशाब का रंग लाल, गहरा भूरा या लगातार धुंधला आ रहा है, तो घरेलू नुस्खों के बजाय तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।
20/04/2026
यह जानकारी सभी को होनी चाहिए!
20/04/2026
दूधी घास (दूधी खास) के फायदे –
1. दूधी घास शरीर को ठंडक देने में सहायक मानी जाती है, गर्मी और जलन कम करने में मदद मिलती है।
2. यह पाचन तंत्र को सपोर्ट करती है, गैस और अपच में राहत देने में सहायक हो सकती है।
3. दूधी घास खून को साफ करने में मदद करती है (पारंपरिक मान्यता), जिससे त्वचा साफ रहती है।
4. त्वचा रोग जैसे दाद, खुजली में इसका लेप उपयोगी माना जाता है।
5. यह सूजन कम करने में सहायक हो सकती है।
6. पेशाब से जुड़ी हल्की समस्याओं में राहत देने में मदद कर सकती है।
7. शरीर की कमजोरी और थकान कम करने में सहायक मानी जाती है।
8. इम्यूनिटी को सपोर्ट करने में इसकी भूमिका बताई जाती है।
9. घाव और कट पर लगाने से त्वचा को शांत करने में मदद मिल सकती है।
10. यह शरीर को डिटॉक्स करने में सहायक मानी जाती है।
⚠️ महत्वपूर्ण सावधानी (Facebook Guideline अनुसार):
यह जानकारी सामान्य जागरूकता के लिए है, इसे इलाज का विकल्प न समझें।
उपयोग से पहले विशेषज्ञ/डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर है।
हर व्यक्ति पर असर अलग हो सकता है।
20/04/2026
लोनिया साग ( कुलफा , खट्टा साग / लुनिया भाजी) के फायदे – 🌿🥬
1. लोनिया साग पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है और गैस, अपच में राहत देता है।
2. यह विटामिन C से भरपूर होता है, जिससे इम्यूनिटी बढ़ती है।
3. शरीर की गर्मी को कम करके ठंडक देने में मदद करता है।
4. खून साफ करने में सहायक होता है, जिससे त्वचा साफ और चमकदार बनती है।
5. यह भूख बढ़ाने में मदद करता है और कमजोरी दूर करता है।
6. लोनिया साग आयरन से भरपूर होता है, जो खून की कमी (एनीमिया) में सहायक हो सकता है।
7. कब्ज की समस्या में राहत देता है और पेट साफ रखता है।
8. यह शरीर से विषैले तत्व (डिटॉक्स) बाहर निकालने में मदद करता है।
9. दिल की सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है।
10. यह शरीर को ऊर्जा देता है और थकान कम करता है।
⚠️ ध्यान दें:
ज्यादा मात्रा में सेवन न करें, खट्टा होने से पेट में जलन हो सकती है।
किडनी स्टोन वाले लोग सीमित मात्रा में खाएं।
20/04/2026
फैटी लीवर का असर सिर्फ पेट पर ही नहीं दिल पर भी।
20/04/2026
अनियमित दिनचर्या और खानपान शरीर के ‘पावर हाउस’ को कर रहे कमजोर
शहर क्षेत्र में 80 तो गांवों में 60 फीसदी लोग फैटी लिवर से ग्रसित
लिवर शरीर का एक अहम अंग है जो भोजन पचाने, विषैले तत्वों को बाहर निकालने और ऊर्जा को संचित रखने के साथ शरीर के अलग-अलग हिस्सों में वितरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसे शरीर का पावर हाउस भी कहते हैं।
लेकिन, बदलती जीवनशैली और खानपान की खराब आदतों ने लिवर से जुड़ी बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ा दिया है। फैटी लिवर अब महामारी का रूप ले चुका है। शहरी क्षेत्र में 80 प्रतिशत और ग्रामीण क्षेत्र में लगभग 60 प्रतिशत लोग फैटी लिवर संबंधित बीमारियों से ग्रसित हैं।
इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (आईजीआईएमएस), पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (पीएमसीएच), ऑल इंडिया मेडिकल साइंसेज (एम्स) जैसे अस्पतालों से मिली जानकारी के अनुसार पेट से संबंधित बीमारियों से भर्ती होने वाले कुल मरीजों में से लगभग 60 से 65 प्रतिशत लिवर की गंभीर बीमारियों से ग्रसित होते हैं।
प्रमुख तथ्य
अस्पतालों में पेट संबंधी बीमारियों से भर्ती होने वालों में 50 प्रतिशत लिवर रोग से ग्रसित
सही देखभाल नहीं करने पर लिवर सिरोसिस, हेपेटाइटिस की भी बढ़ सकती है समस्या
बिहार में लगातार बढ़ रहा है लोगों में लिवर से संबंधित बीमारियों का खतरा
बीमारी बढ़ने के मुख्य कारण
अत्यधिक तेल-मसाले और जंक फूड का सेवन
कोल्ड ड्रिंक्स, पैकेज्ड शीतल पेय, कैफीनयुक्त पेय
रोक के बावजूद शराब और नशीले पदार्थों का सेवन
मोटापा, कोलेस्ट्रॉल और डायबिटीज पीड़ितों की बढ़ती संख्या
शारीरिक गतिविधियों में कमी, अनियमित दिनचर्या और तनाव
दूषित पानी व अस्वच्छ भोजन से हेपेटाइटिस का खतरा
गांवों में जागरूकता की कमी और शहरों में गलत खानपान—दोनों ही स्थितियां लिवर के लिए खतरा बन रही हैं
संतुलित-पौष्टिक आहार और नियमित व्यायाम जरूरी
डॉ. संजीव, डॉ. साकेत और डॉ. दिनेश्वर ने बताया कि लिवर को स्वस्थ रखने के लिए कुछ आसान और अच्छी आदतों को अपनाना जरूरी है। संतुलित और पौष्टिक आहार, नियमित व्यायाम करें, शराब और धूम्रपान से दूरी रखें, साफ पानी और स्वच्छ भोजन का सेवन करें और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराते रहें।
फास्ट फूड से बचना चाहिए। डायबिटीज और मोटापा को नियंत्रित रखने से भी इस बीमारी के खतरे को कम किया जा सकता है। इसके अलावा समय पर हेपेटाइटिस के टीकाकरण से भी बीमारी से बचाव हो सकता है।
डॉ. दिनेश्वर प्रसाद ने बताया कि बिहार सरकार की ओर से समय-समय पर हेपेटाइटिस-बी टीकाकरण, जांच शिविर और जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं। फिर भी ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी और लोगों में जानकारी का अभाव बड़ी चुनौती है। कई मरीज तब अस्पताल पहुंचते हैं जब बीमारी गंभीर अवस्था में पहुंच चुकी होती है।
अतिरिक्त जानकारी
विभाग के हेड डॉ. संजीव कुमार झा, गैस्ट्रो सर्जरी के सह प्राध्यापक डॉ. साकेत कुमार और डॉ. दिनेश्वर प्रसाद के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में बिहार में फैटी लिवर, हेपेटाइटिस और लिवर सिरोसिस के मरीजों की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है।
पटना, मुजफ्फरपुर, भागलपुर, गया, पूर्णिया, कटिहार जैसे शहरों में प्रतिदिन बड़ी संख्या में लिवर से जुड़ी शिकायतों के मरीज इलाज कराने पहुंच रहे हैं।
अनियमित खानपान, व्यायाम में कमी, टीवी-मोबाइल पर ज्यादा समय देना, बाहरी खेलकूद व शारीरिक गतिविधियों में कमी के कारण अब यह बीमारी केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रही, बल्कि युवा और बच्चे भी इसकी चपेट में आ रहे हैं।
लिवर संबंधी प्रमुख बीमारियां
लिवर में सूजन
फैटी लिवर
पीलिया
हेपेटाइटिस
लिवर सिरोसिस
लिवर कैंसर
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