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पापा का अमीर होना नहीं, बल्कि पापा का इस दुनिया में होना जरूरी है~
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25/03/2026

"चंड अशोक से धर्म अशोक, एक महान सम्राट के हृदय परिवर्तन और अखंड भारत की गाथा"👇

भारत के गौरवशाली इतिहास में यदि किसी एक राजा का नाम सबसे अधिक सम्मान से लिया जाता है, तो वह हैं देवानांप्रिय सम्राट अशोक महान जी का जीवन केवल युद्धों की कहानी नहीं है, बल्कि एक व्यक्ति के भीतर होने वाले सबसे बड़े आत्मिक परिवर्तन की मिसाल है।।

सम्राट अशोक जी का जन्म लगभग 304 ईसा पूर्व में मौर्य साम्राज्य की राजधानी पाटलिपुत्र (वर्तमान पटना) में हुआ था। उनके पिता सम्राट बिंदुसार मौर्य जी तथा उनकी माता धर्मा जिन्हें (सुभद्रांगी) भी कहा जाता था धर्मा एक ब्राह्मण कन्या थीं, जो अपनी बुद्धिमत्ता के लिए जानी जाती थीं

बचपन से ही सम्राट अशोक महान जी अत्यंत तेजस्वी और साहसी स्वभाव के थे। वे कठोर अनुशासनप्रिय थे और छोटी उम्र में ही युद्धकला, राजनीति और प्रशासन की शिक्षा प्राप्त करने लगे। उनकी बुद्धिमत्ता और साहस के कारण दरबार में उनकी विशेष पहचान बनी।

युवावस्था में उन्हें तक्षशिला और उज्जैन जैसे महत्वपूर्ण प्रांतों का शासन सौंपा गया। यह जिम्मेदारी उनके बचपन के प्रशिक्षण और गुणों का ही परिणाम था सम्राट अशोक जी ने बचपन से ही जनता के प्रति न्याय और अनुशासन का भाव रखा, जिसने आगे चलकर उन्हें महान सम्राट बनने की नींव दी। उज्जैन में उन्होंने न केवल प्रशासनिक कार्यों को संभाला बल्कि सांस्कृतिक और शैक्षिक केंद्र के रूप में शहर को और विकसित किया।

सम्राट अशोक महान जी की पत्नी करुवाकी जो अशोक की प्रिय पत्नी मानी जाती है और देवी जो विदिशा की राजकुमारी थी असंधिमित्रा कुछ ग्रंथों में उनका उल्लेख है अशोक के शिलालेखों में करुवाकी का नाम विशेष रूप से मिलता है। इनके पुत्र महेंद्र, पुत्री संघमित्रा थी अपने भाई महेंद्र के साथ श्रीलंका जाकर बौद्ध धर्म का प्रचार किया।

273 ईसा पूर्व में पिता बिंदुसार मौर्य जी की मृत्यु के पश्चात उत्तराधिकार का संघर्ष शुरू हुआ उनके कठोरता और निर्दयता के कारण "चंड अशोक" कहा गया। पिता की मृत्यु के बाद अशोक ने मौर्य साम्राज्य की बागडोर संभाली और अपने प्रशासनिक अनुभव का उपयोग कर साम्राज्य को संगठित किया।

सम्राट अशोक महान जी ने अपने जीवन में कई युद्ध किए, लेकिन सबसे प्रसिद्ध और निर्णायक युद्ध कलिंग युद्ध था (261 ईसा पूर्व)। इस युद्ध में लाखों लोग मारे गए और अशोक ने विजय तो प्राप्त की, परंतु इसके बाद उनका जीवन पूरी तरह बदल गया। इस युद्ध में सम्राट अशोक ने विजय प्राप्त की, लेकिन लगभग 1 लाख लोग मारे गए और 1.5 लाख लोग बंदी बनाए

सम्राट अशोक महान जी का साम्राज्य इतना विशाल था कि इसमें आज

Photos from ANUJ 's post 05/03/2026

मायावती पार्क नोएडा

Photos from ANUJ 's post 23/01/2026

जन्मदिन मुबारक हो शिवांश मौर्या आप हमेशा स्वस्थ एवं खुशहाल रहें यही तथागत बुद्ध जी से प्रार्थना करता हूँ 🙏💐

19/01/2026
19/01/2026
08/01/2026

पंचशील बौद्ध _धम्म_ध्वज__दिवस_की_हार्दिक_धम्म मंगलकामनाएं ।
8 जनवरी,1880 बौद्ध जगत में विशेष महत्व का दिन है क्योंकि इसी दिन ” धम्म ध्वज ” की स्थापना हुई थी। यह धम्म ध्वज सम्पूर्ण विश्व को शांति, प्रगति मानवतावाद और समाज कल्याण की सदैव प्रेरणा देता है। इस धम्म ध्वज में पांच रंग होते है जिनका अपना अर्थ और भाव है। चूँकि इस धम्म ध्वज में 5 रंग हैं इसलिए इसको पंचशील का झंडा भी कहा जाता है। धम्म ध्वज हमारी आन, बान और शान है।

आओ धम्म ध्वज के पांच रंगों के भावार्थ को हम

बाएं से दाएं क्रमवार इस प्रकार समझें…………

(1) नीला (blue) रंग :- इस रंग का भावार्थ

है समानता और व्यापकता- अर्थात इस नीले आसमान के नीचे सभी व्यक्ति सामान है । सार्वभौमिक करुणा।

सभी प्राणी मात्र के प्रति कल्याण करने की भावना रखना।

(2) पीला( yellow) रंग :- इस रंग का भावार्थ

है ‘ मध्यम मार्ग ‘ The middle path. जैसा कि विदित है कि बुद्ध ने मध्यम मार्ग हेतु अष्टांगिक मार्ग पर चलने का रास्ता बताया है जो ‘निर्वाण’ प्राप्ति यानि चरित्र सम्पन्न, उत्कृष्ट जीवन जीने का, प्रगति का सरल और सुस्पष्ट मार्ग है।

(3) लाल (Red) रंग :- इस रंग का भावार्थ है-

गतिशीलता और दृढ़ निश्चय। उर्जावान और परिश्रमी बनना। प्रत्येक व्यक्ति को धर्मानुसार आचरण करना चाहिए। अपने वांक्षित उद्देश्य की पूर्ति तथा जनकल्याण के लिए कठिन परिश्रम करना चाहिए। धम्म की रक्षा हेतु बलिदान तक करने के लिए सदैव तैयार रहना चाहिए।

(4) सफेद (White) रंग :- इस रंग का भावार्थ

है- शांति और शुद्धता। मन , वचन और कर्म से व्यक्ति शुद्ध और पवित्र होना चाहिए। शीलवान और चरित्र संपन्न व्यक्ति बनने का हर संभव प्रयास करना चाहिए। सफ़ेद रंग भगवान बुद्ध के विचारों की पवित्रता और शुद्धता का घोतक है।

(5) केसरिया ( Orange) रंग :- इस रंग का

भावार्थ है त्याग और सेवा – प्रज्ञा (wisdom), बुद्धिवाद, उच्चतम शिक्षा की प्राप्ति। प्रत्येक व्यक्ति को सुशिक्षित होने के लिए अच्छी से अच्छी शिक्षा लेनी चाहिए।शिक्षा प्राप्त करना, ज्ञान प्राप्त करना बुद्ध धम्म का प्रथम सन्देश है।मन को सुसंस्कृत और नियंत्रित करने के लिए शिक्षा नितांत आवश्यक है। अतः प्रत्येक व्यक्त्ति को अच्छी से अच्छी शिक्षा मिलनी ही चाहिए। उचित शिक्षा के द्वारा ही व्यक्त्ति प्रज्ञावान बनता है और सेवा और त्याग के लिए तत्पर रहता है।केसरिया भगवान बुद्ध के चीवर का रंग है जो शक्त्ति और साहस को दर्शाता है।

इस प्रकार * धम्म ध्वज * से संपूर्ण बौद्ध धम्म का भाव और सार प्रकट होता है इसलिए धम्म ध्वज को पूरा आदर और सम्मान देना चाहि

24/12/2025

"शेर सी दहाड़ थी मौर्य साम्राज्य की पहचान,
भारत भूमि पर था चंद्रगुप्त का सम्मान।
अशोक ने दिखाया धम्म और शांति का मार्ग,
मौर्यवंश रहा सदा भारत का अभिमान।"
# samrat anuj maurya
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16/11/2025
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