Ramjilal panwar saman

Ramjilal panwar saman

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We The People

04/04/2026

4 April 1946


1946 में, नई दिल्ली में अखिल भारतीय दलित फेडरेशन की एक बैठक में, डॉ बाबासाहेबअम्बेडकर ने एआईडीएफ सदस्यों को जाति की तार काटने, एकजुट रहने, और गहरे स्तर पर आयोजित करने की सलाह दी, विशेष रूप से गांवों के माध्यम से ... ”. डॉ. बाबासाहेबअम्बेडकर ने तर्क दिया, "इस उभरती स्थिति में, अछूतों को अपने भविष्य के बारे में सतर्क रहना चाहिए और एआईडीएफ की सफलता पर काम करना चाहिए। प्रांतीय और जिला स्तर पर AIDF को संदेश फैलाकर अनुशासित तरीके से कार्य करना चाहिए.. ". अखिल भारतीय दलित फेडरेशन के सदस्यों ने डॉ बाबासाहेबअंबेडकर को अंग्रेजों के साथ-साथ स्वतंत्र भारत में दलितों के लिए भविष्य की राजनीति करने का पूर्ण अधिकार सौंपा।

02/04/2026

लोकतांत्रिक देश में प्रजा ही शासक चुनती है और प्रजा ही शासक होती है किंतु शिक्षा का अभाव, आर्थिक परिस्थितियां, बढ़ती बेरोजगारी में प्रजा अपने मत की कीमत नहीं समझती है..... हमें अपने मत का मूल्य समझना होगा तभी लोकतंत्र मजबूत बनेगा। एक बकरे की कीमत 10000, कुत्ते की कीमत 15000, गधे की कीमत 30000 एवं भैंस की कीमत 80000 और घोड़े की कीमत 100000 है और चुनाव के समय लोग 500- 1000 में, शराब, कबाब में बिक जाते हैं...क्या आपकी कीमत जानवरों से भी गई गुजरी है। मंथन कीजिए। याद रखे देश, समाज और राज्य तथा पंचायत क्षेत्र का भविष्य योग्य, अनुभवी तथा समझदार, जागृत और शिक्षित व्यक्तियों के चयन पर निर्भर करता है।आपका एक गलत मतदान/निर्णय आपको कई साल पीछे ले जा सकता है। कृपया भाई-भतीजावाद ,जाति धर्म से उपर उठकर सही, योग्य उम्मीदवार का चयन करें। मतदान अवश्य करे।
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04/12/2025

बाप भले ही राजा न हो लेकिन बाप के राज में बेटा राजा होता है। और यह बात बेटे को तब समझ आती है जब बाप का राज उजड़ जाता है।

11/06/2025

बिल्कुल सही बात है इंसान अपने कर्मों को भूल जाता है जब दुनिया के चक्कर में पड़ता है तो यह नहीं सोचता है कि मुझे फिर यहां से वहां जाना है

04/05/2025
01/05/2025

*बाबा साहेब अम्बेडकर के श्रमिक वर्ग के उत्थान से जुड़े अनेक पहलूओं को भारतीय इतिहासकारों और मजदूर वर्ग के समर्थकों ने नज़रंदाज़ किया है।जबकि अम्बेडकर के कई प्रयास मजदूर आंदोलन और श्रमिक वर्ग के उत्थान हेतू प्रेरणा एवं मिसाल हैं।आईये आज मज़दूर दिवस के अवसर पर बाबा साहेब के ऐसे ही कुछ प्रयासों पर नज़र डालते हैं :-*

1.बाबा साहेब वाइसरॉय के कार्यकारी परिषद के श्रम सदस्य थे।उन्‍हीं की वजह से फैक्ट्रियों में मजदूरों के 12 से 14 घंटे काम करने के नियम को बदल कर 8 घंटे किया गया था।

2.बाबा साहेब ने ही महिला श्रमिकों के लिए मातृत्व लाभ जैसे कानून बनाने की पहल की थी।

3.बाबा साहेब ने 1936 में श्रमिक वर्ग के अधिकार और उत्थान हेतु ‘इंडिपेन्डेंट लेबर पार्टी’ की स्थापना की।इस पार्टी का घोषणा पत्र मजदूरों,किसानों,अनुसूचित जातियों और निम्न मध्य वर्ग के अधिकारों की हिमायत करने वाला घोषणा पत्र था।

4.बाबा साहेब ने 1946 में श्रम सदस्य की हैसियत से केंन्द्रीय असेम्बली में न्यूनतम मजदूरी निर्धारण सम्बन्धी एक बिल पेश किया जो 1948 में जाकर ‘न्यूनतम मजदूरी कानून’ बना।

5.बाबा साहेब ने ट्रेड डिस्प्यूट एक्ट में सशोधन करके सभी यूनियनों को मान्यता देने की आवश्यकता पर जोर दिया।1946 में उन्होंने लेबर ब्यूरो की स्थापना भी की।

6.बाबा साहेब पहले व्यक्ति थे जिन्होंने मजदूरों के हड़ताल करने के अधिकार को स्वतंत्रता का अधिकार माना और कहा कि मजदूरों को हड़ताल का अधिकार न देने का अर्थ है मजदूरों से उनकी इच्छा के विरुद्ध काम लेना और उन्हें गुलाम बना देना।1938 में जब बम्बई प्रांत की सरकार मजदूरों के हड़ताल के अधिकार के विरूद्ध ट्रेड डिस्प्यूट बिल पास करना चाह रही थी तब बाबा साहेब ने खुलकर इसका विरोध किया।

7.बाबा साहब ट्रेड यूनियन के प्रबल समर्थक थे।वह भारत में ट्रेड यूनियन को बेहद जरूरी मानते थे।वह यह भी मानते थे कि भारत में ट्रेड यूनियन अपना मुख्य उद्देश्य खो चुका है।उनके अनुसार जब तक ट्रेड यूनियन सरकार पर कब्जा करने को अपना लक्ष्य नहीं बनाती तब तक वह मज़दूरों का भला कर पाने में अक्षम रहेंगी और नेताओं की झगड़ेबाजी का अड्डा बनी रहेंगी।

8.बाबा साहेब का मानना था कि भारत में मजदूरों के दो बड़े दुश्मन हैं- पहला मनुवाद और दूसरा पूंजीवाद।देश के श्रमिक वर्ग के उत्थान के लिए दोनों का खात्मा जरूरी है।

9.बाबा साहेब का मानना था कि वर्णव्यवस्था न सिर्फ श्रम का विभाजन करती है बल्कि श्रमिकों का भी विभाजन करती है।वह श्रमिकों की एकजुटता और उनके उत्थान के लिए इस व्यवस्था का खात्मा जरूरी मानते थे।उनके इस नज़रिये को आज भी भारतीय वामपंथी जानबूझकर या अनजाने में समझने में अक्षम रहे हैं।

10.बहुत ही कम लोग इस बात को जानते हैं कि बाबा साहेब भारत में सफाई कामगारों के संगठित आंदोलन के जनक भी थे।उन्होंने बम्बई और दिल्ली में सफाई कर्मचारियों के कई संगठन स्थापित किए।बम्बई म्युनिसिपल कामगार यूनियन की स्थापना बाबा साहब ने ही की थी।

इन तमाम कामों और प्रयासों के बावजूद भी विडंबना ये है कि अम्बेडकर को आज के दिन याद नहीं किया जाता।मज़दूर दिवस को आज भी एक खास विचारधारा से ही जोड़कर देखा जाता है।यही वजह है कि भारत में मज़दूर दिवस के मायने समय के साथ सीमित हो चुके हैं।आज जरूरी है कि किसी खास विचारधारा से प्रेरित होकर मज़दूर दिवस को देखने की बजाय यह देखा जाय कि भारत में मज़दूरों का वास्तविक हितैषी कौन था।वह कौन था जिसने न सिर्फ उनके हक की बात की बल्कि उसके लिए ठोस काम भी किया।इस मायने में भारत में अम्बेडकर के आगे कोई भी नहीं ठहरता।आज कोई चाह कर भी उन्हें नज़रंदाज़ नहीं कर सकता है।इसीलिए भारत में मज़दूर दिवस बगैर बाबा साहेब को याद किये और बिना उन्हें धन्यवाद दिए अधूरा है।

28/04/2025

पेड़ एक शाखें अनेक,
प्रत्येक शाखा फल नहीं दे सकता , इसका मतलब ये नहीं कि हम जडों में पानी देना हीं छोड़ देंl

23/04/2025

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आज 23 अप्रेल #विश्व_पुस्तक_दिवस है।

दुनिया सबसे बड़े पुस्तक प्रेमी #बाबासाहब_डॉ_भीमराव_आम्बेडकर ने दुनियाभर की अलग अलग विषयों की तकरीबन 40000 से ज्यादा किताबों का संग्रह करके अपने घर #राजगृह को दुनिया का सबसे बड़ा व्यक्तिगत #पुस्तकालय बना था और यही किताबो का बड़ी गहराई से अध्ययन करके इतने बड़े #ज्ञान_का_प्रतिक बने कि इस देश का #संविधान ही लिख डाला और सदियों से #वंचित, #पीड़ित, #शोषित, #मजलूमों को मानवीय अधिकार दिलाकर उनके जीवन मे उजाला ही उजाला कर दिया।

जय भीम
जय भारत
जय संविधान

22/04/2025

लोग कहते हैं कि पानी बैठकर और दूध खड़े होकर पीना चाहिए

तो फिर ये भी तो बताओ चाय कैसे पीनी है...?

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