DrN.P.Dubey
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Ass.Professor at N.A.Medical college
Ayurved Panch karma Specialist
AgraUP
(नई एवं पुरानी बीमारियों के आयुर्वेद परामर्श )
Online consultation available~
( Treatment plan, incorporating herbal formulations, lifestyle changes with special yoga if needed )
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#लकवा ( लकवे में मिला अदभुत आराम)
#कमरदर्द
कचनार -का एक और लाभ यह है कि इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और सूजनरोधी गुणों के कारण यह रोग प्रतिरोधक क्षमता को बेहतर बनाता है। यह जड़ी बूटी सूजन एवं गाँठ के उपचार में प्रयोग करते हैं।
पारीजात (Parijat)/ हरसिंगार, जिसे वैज्ञानिक रूप से
न्यक्टैंथिस आर्बोर्ट्रिस्टिस (Nyctanthes arbor-tristis) कहा जाता है, भारत का एक अत्यंत पवित्र और औषधीय वृक्ष है।
1. धार्मिक महत्व:
देववृक्ष: पौराणिक कथाओं के अनुसार, यह वृक्ष समुद्र मंथन के दौरान निकले 14 रत्नों में से एक है, जिसे इंद्र द्वारा स्वर्ग में स्थापित किया गया था।
बाराबंकी का परिजात: उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के किंतूर गाँव में एक प्राचीन पारिजात वृक्ष स्थित है, जिसे महाभारत काल का माना जाता है। मान्यता है कि अर्जुन इसे स्वर्ग से कुंती के लिए लाए थे।
2. मुख्य विशेषताएँ:
रात में खिलना: इसके फूल रात में खिलते हैं और सूर्योदय से पहले खुद ही झड़ जाते हैं। इसीलिए इसे 'नाइट जैस्मीन' (Night Jasmine) या 'हरसिंगार' भी कहा जाता है।
फूलों की बनावट: इसके फूल सफेद रंग के होते हैं जिनकी डंडी (नली) नारंगी होती है। ये फूल अत्यंत सुगंधित होते हैं।
अनोखी परंपरा: हिंदू धर्म में यह एकमात्र ऐसा फूल है जिसे जमीन से उठाकर भगवान पर चढ़ाना शुभ माना जाता है।
3. औषधीय लाभ:
गठिया (Arthritis): इसके पत्तों का काढ़ा जोड़ों के दर्द और सायटिका (Sciatica) के इलाज में रामबाण माना जाता है।
बुखार: लंबे समय से चले आ रहे बुखार (जैसे मलेरिया या डेंगू) को ठीक करने के लिए इसके पत्तों का उपयोग किया जाता है।
त्वचा रोग: इसके बीजों और पत्तों का लेप त्वचा संबंधी समस्याओं में लाभकारी होता है।
सीताफल एक पौष्टिक फल है जो पूरे शरीर के स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है, खासकर हृदय, पाचन और प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए।
मेक्सिकन पुदीना एक जड़ी बूटी है जिसके कई महत्वपूर्ण संभावित स्वास्थ्य लाभ हैं, जिनमें पाचन में सहायता और प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करना शामिल है। यह एक स्वस्थ जीवनशैली पर संभावित रूप से सभी सकारात्मक प्रभाव डालती है, विशेष रूप से इसमें सूजन-रोधी, जीवाणुरोधी और एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं।
चांगेरी एक बहुत ही फायदेमंद औषधीय पौधा है, जिसे पाचन, लिवर, त्वचा और इम्यूनिटी के लिए बेहद उपयोगी माना जाता है। इसके अलावा यह भूख बढ़ाने में मदद करता है और विटामिन सी व एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होने के कारण शरीर को डिटॉक्स करने में भी सहायक होता है। चांगेरी का सेवन पेट की आग को मजबूत करता है और भूख बढ़ाता है।
(छुई-मुई /लाजवंती) का पौधा अपनी स्पर्श-संवेदनशील पत्तियों के लिए जाना जाता है और इसका उपयोग आयुर्वेद में कई औषधीय कामों के लिए होता है, जैसे त्वचा रोगों (मुंहासे, सोरायसिस, सूजन), सांप-बिच्छू के विष के असर को कम करने, डायबिटीज, बवासीर, पेशाब संबंधी समस्याओं (यूरिन इन्फेक्शन), खांसी, और मानसिक तनाव (माइग्रेन, अवसाद) के इलाज में, साथ ही इसे वास्तु में भी शुभ माना जाता है।
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