Patanjali chikitsalaya Navi Peth Ahmednagar
We are providing free medical checkup and selling the best Patanjali medicines available in Ahmednagar district.
*एकदा ही माहिती वाचाच, माझा विश्वास आहे तुम्ही शेअर करणारच…* 🙂
☑️महागडे व्हि 'टॅमिन, कॅल्शियम आणि हाडांची झिज करणाऱ्या गोळ्या खाऊन हाड ठिसूळ करण्यापेक्षा पूर्वजांनी सांगितलेल्या गोष्टी खाल्ल्या तर किती फायदा होईल याचा विचार जरूर करा आणि आजपासून पौष्टिक खाद्य सुरू करा.
☑️ *गूळ + खोबरे = बुद्धीवर्धक*
(म्हणून बाप्पाचा नैवेद्य)
☑️ *गूळ + शेंगदाणे = शक्तिवर्धक*
(म्हणूनच श्री हनुमानाचा नैवेद्य)
☑️ *गूळ + फुटाणे = हिमोग्लोबींन वर्धक व रक्तशुद्धकारक*
(म्हणून श्री बालाजीचा प्रसाद)
☑️ *तीळ + गूळ = कॅल्शियम, मॅग्नेशियम,आयर्न + झिंक + सेलेनियम*
(हृदयासाठी फायदेशीर आणि थंडीमध्ये शरीर गरम ठेवायला उपयोगी,)
(यातले सेलेनियम - कॅन्सर पेशींची वाढ रोखण्यास मदत करते)
म्हणून संक्रांतीला गूळ पोळी
थंडीत बाजरीची तीळ लावलेली भाकरी - शरीरात ऊर्जा (उष्णता) निर्माण करण्यासाठी
डिंकाचे लाडु किंवा राजगिरा लाडू
गुळतूप पोळी, शेगदाणा चिक्की किंवा भिजवलेले हरबरे - ताकत मिळण्यासाठी
उन्हाळ्यात नाचणीची अंबिल,ताक,मठ्ठा, लिंबु सरबत, आंबाडीचे व कोकम सरबत,सोलकडी इतर सरबते- शरीरात थंडावा निर्माण करुन दाह कमी करण्यासाठी असे अनेक पदार्थ मिश्रणाचे केमिकल कंपोजिशन पाहिल्यास त्या शरीरासाठी फायदेशीर दिसतील...
आपल्याला फक्त सण साजरे करायला शिकवले जाते त्यामागचे सायन्स,त्याच वातावरणात तेच पदार्थ का खावेत? हे नाही शिकवले जात,
कारण पूर्वीची मुले आई वडिलांनी सांगितले म्हणून ऐकत. फार चिकित्सा करण्याच्या भानगडीत पडत नसत. आज तसे नाही. असंख्य प्रश्न विचारून भंडावून सोडतात.
*आणखी एक कारण म्हणजे हे जर शिकवले तर bornvita कोण पिणार?*
आपले पूर्वज, लढाऊ योद्धे तर bornvita, कॉम्प्लान पीत नव्हते ना? मग त्यांच्यात कमजोरी, ताकद कमी होती का?
*अहो एक आपला मावळा ५० शत्रूंशी एकटा लढायचा...*
कुठले व्हे - प्रोटीन, क्रिएटिन होते का तेव्हा?
शिवाय आपले पूर्वज एवढे हुशार होते, ज्यांनी अफाट शोध लावले, ते कुठले व्हिटॅमिन टॉनिक पीत होते?
आपले पूर्वज हे सर्व देशी पदार्थ, नियमित नक्कीच खात असतील, म्हणूनच आताच्या आपल्या पिढी पेक्षा त्यांच्यात ताकद जास्त होती... जास्त निरोगी होते आणि जास्त बुद्धिमान पण होते,
*अहो वयाच्या १८-१९ वर्षी वागभट्टांचे संपूर्ण आयुर्वेद,आर्यभट्ट यांचे संपूर्ण भूमिती बीजगणित ज्ञान, ज्ञानेश्वरी तेव्हाच्या लोकांनी...*
कुठले टॉनिक पीत होते ते? स्वतःला प्रश्न विचारा, आणि शिवाय तेव्हा कुठलेही हानिकारक केमिकल मारलेले पण अन्न नसायचे, गाईचे दूध पण शुद्ध...
*आपली संस्कृती हजारो वर्षांपासूनचं सायन्स मध्ये ऍडव्हान्स आहे* .
*आपल्याला या सर्वांची गरज नाही...*
*स्वदेशी खा, ताकद वाढवा, आपल्या संस्कृतीवर विश्वास ठेवा!!*
🙏🏽🙏🏽🙏🏽
जानिए इन 9 औषधियों को जिन्हें नवदुर्गा कहा गया है -
(1) प्रथम शैलपुत्री (हरड़) : कई प्रकार के रोगों में काम आने वाली औषधि हरड़ हिमावती है जो देवी शैलपुत्री का ही एक रूप है.यह आयुर्वेद की प्रधान औषधि है यह पथया, हरीतिका, अमृता, हेमवती, कायस्थ, चेतकी और श्रेयसी सात प्रकार की होती है.
(2) ब्रह्मचारिणी (ब्राह्मी) : ब्राह्मी आयु व याददाश्त बढ़ाकर, रक्तविकारों को दूर कर स्वर को मधुर बनाती है.इसलिए इसे सरस्वती भी कहा जाता है.
(3) चंद्रघंटा (चंदुसूर) : यह एक ऎसा पौधा है जो धनिए के समान है. यह औषधि मोटापा दूर करने में लाभप्रद है इसलिए इसे चर्महंती भी कहते हैं.
(4) कूष्मांडा (पेठा) : इस औषधि से पेठा मिठाई बनती है.इसलिए इस रूप को पेठा कहते हैं. इसे कुम्हड़ा भी कहते हैं जो रक्त विकार दूर कर पेट को साफ करने में सहायक है. मानसिक
रोगों में यह अमृत समान है.
(5) स्कंदमाता (अलसी) : देवी स्कंदमाता औषधि के रूप में अलसी में विद्यमान हैं. यह वात, पित्त व कफ रोगों की नाशक औषधि है.
(6) कात्यायनी (मोइया) : देवी कात्यायनी को आयुर्वेद में कई नामों से जाना जाता है जैसे अम्बा, अम्बालिका व अम्बिका.इसके अलावा इन्हें मोइया भी कहते हैं.यह औषधि कफ, पित्त व गले के रोगों का नाश करती है.
(7) कालरात्रि (नागदौन) : यह देवी नागदौन औषधि के रूप में जानी जाती हैं.यह सभी प्रकार के रोगों में लाभकारी और मन एवं मस्तिष्क के विकारों को दूर करने वाली औषधि है.
(8) महागौरी (तुलसी) : तुलसी सात प्रकार की होती है सफेद तुलसी, काली तुलसी, मरूता, दवना, कुढेरक, अर्जक और षटपत्र. ये रक्त को साफ कर ह्वदय रोगों का नाश करती है.
(9) सिद्धिदात्री (शतावरी) : दुर्गा का नौवां रूप सिद्धिदात्री है जिसे नारायणी शतावरी कहते हैं. यह बल, बुद्धि एवं विवेक के लिए उपयोगी है.
22/09/2020
सभी देश वासियों को
ॐ प्रणाम आज आप सभी के सेवा में परम पूज्य स्वामी रामदेव जी महाराज श्री और आयुर्वेद शिरोमणि परम पूज्य आचर्य बालकृष्ण जी के और से आप लोगो के लिए ये परी पत्रक जारी किए है जिसमे आपको अगर लक्षण हैं तो क्या खाना हैं और किन चीजो का पथ्य पालन करना है अगर लक्षण नहीं हैं और covid रिपोर्ट पॉजेटिव आई हैं तो क्या खाना हैं और किन चीजो का पथ्य पालन करना हैं
अगर आपको लक्षण है या नही उसके बारे में आपको ग्यात कराने हेतु ये चार्ट उपलब्ध कराए गए हैं चार्ट उपलब्ध कराने की केवल और केवल एक ही मनशा हैं कि आप जल्दी से स्वाथ हो
#पतंजलि निःस्वार्थ सेवा
#पतंजलि 💯 % देश सेवा
#पतंजलि चिकित्सालय
नवी पेठ
अहमदनगर
9420344777
20/07/2020
मित्रो सभी को सादर ॐ प्रणाम🙏
लगभग दो से तीन दिन में आपको कोरोनिल इम्युनिटी बूस्टर उपलब्ध कराने का प्रयास कर रहा हु तो कृपया जो भी मेरे
फेस बुक मित्र और नजदीकी मित्र मुझे मेरे मोबाईल पर s m s या फ़ोन करके अपनी अपनी किट सुरक्षित करे और जो भी मित्र या मेरे परिचित नहीं हैं और वो करोंना से ग्रसित (पोजेटिव) हैं वो भी अपनी किट मुझे फ़ोन या s m s करके सुरक्षित कर सकते है
पवन पारीक
C/O
पतंजलि चिकित्सालय
मुणोत चेम्बर्स
नवी पेठ
अहमदनगर
फोन :- 9420344777
🙏 *गिलोय एक ही ऐसी बेल है, जिसे आप सौ मर्ज की एक दवा कह सकते हैं। इसलिए इसे संस्कृत में अमृता नाम दिया गया है। कहते हैं कि देवताओं और दानवों के बीच समुद्र मंथन के दौरान जब अमृत निकला और इस अमृत की बूंदें जहां-जहां छलकीं, वहां-वहां गिलोय की उत्पत्ति हुई।*
*इसका वानस्पिक नाम( Botanical name) टीनोस्पोरा कॉर्डीफोलिया (tinospora cordifolia है।* इसके पत्ते पान के पत्ते जैसे दिखाई देते हैं और जिस पौधे पर यह चढ़ जाती है, उसे मरने नहीं देती। इसके बहुत सारे लाभ आयुर्वेद में बताए गए हैं, जो न केवल आपको सेहतमंद रखते हैं, बल्कि आपकी सुंदरता को भी निखारते हैं। आइए जानते हैं गिलोय के फायदे…
*गिलोय बढ़ाती है रोग प्रतिरोधक क्षमता*
गिलोय एक ऐसी बेल है, जो व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ा कर उसे बीमारियों से दूर रखती है। इसमें भरपूर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो शरीर में से विषैले पदार्थों को बाहर निकालने का काम करते हैं। यह खून को साफ करती है, बैक्टीरिया से लड़ती है। लिवर और किडनी की अच्छी देखभाल भी गिलोय के बहुत सारे कामों में से एक है। ये दोनों ही अंग खून को साफ करने का काम करते हैं।
*ठीक करती है बुखार*
अगर किसी को बार-बार बुखार आता है तो उसे गिलोय का सेवन करना चाहिए। गिलोय हर तरह के बुखार से लडऩे में मदद करती है। इसलिए डेंगू के मरीजों को भी गिलोय के सेवन की सलाह दी जाती है। डेंगू के अलावा मलेरिया, स्वाइन फ्लू में आने वाले बुखार से भी गिलोय छुटकारा दिलाती है।
*गिलोय के फायदे – डायबिटीज के रोगियों के लिए*
गिलोय एक हाइपोग्लाइसेमिक एजेंट है यानी यह खून में शर्करा की मात्रा को कम करती है। इसलिए इसके सेवन से खून में शर्करा की मात्रा कम हो जाती है, जिसका फायदा टाइप टू डायबिटीज के मरीजों को होता है।
*पाचन शक्ति बढ़ाती है*
यह बेल पाचन तंत्र के सारे कामों को भली-भांति संचालित करती है और भोजन के पचने की प्रक्रिया में मदद करती है। इससे व्यक्ति कब्ज और पेट की दूसरी गड़बडिय़ों से बचा रहता है।
*कम करती है स्ट्रेस*
गिलोय एडप्टोजन की तरह काम करती है और मानसिक तनाव और चिंता (एंजायटी) के स्तर को कम करती है। इसकी मदद से न केवल याददाश्त बेहतर होती है बल्कि मस्तिष्क की कार्यप्रणाली भी दुरूस्त रहती है और एकाग्रता बढ़ती है।
*बढ़ाती है आंखों की रोशनी*
गिलोय को पलकों के ऊपर लगाने पर आंखों की रोशनी बढ़ती है। इसके लिए आपको गिलोय पाउडर को पानी में गर्म करना होगा। जब पानी अच्छी तरह से ठंडा हो जाए तो इसे पलकों के ऊपर लगाएं।
*अस्थमा में भी फायदेमंद*
मौसम के परिवर्तन पर खासकर सर्दियों में अस्थमा को मरीजों को काफी परेशानी होती है। ऐसे में अस्थमा के मरीजों को नियमित रूप से गिलोय की मोटी डंडी चबानी चाहिए या उसका जूस पीना चाहिए। इससे उन्हें काफी आराम मिलेगा।
*गठिया में मिलेगा आराम*
गठिया यानी आर्थराइटिस में न केवल जोड़ों में दर्द होता है, बल्कि चलने-फिरने में भी परेशानी होती है। गिलोय में एंटी आर्थराइटिक गुण होते हैं, जिसकी वजह से यह जोड़ों के दर्द सहित इसके कई लक्षणों में फायदा पहुंचाती है।
*अगर हो गया हो एनीमिया, तो करिए गिलोय का सेवन*
भारतीय महिलाएं अक्सर एनीमिया यानी खून की कमी से पीडि़त रहती हैं। इससे उन्हें हर वक्त थकान और कमजोरी महसूस होती है। गिलोय के सेवन से शरीर में लाल रक्त कणिकाओं की संख्या बढ़ जाती है और एनीमिया से छुटकारा मिलता है।
*बाहर निकलेगा कान का मैल*
कान का जिद्दी मैल बाहर नहीं आ रहा है तो थोड़ी सी गिलोय को पानी में पीस कर उबाल लें। ठंडा करके छान के कुछ बूंदें कान में डालें। एक-दो दिन में सारा मैल अपने आप बाहर जाएगा।
*कम होगी पेट की चर्बी*
गिलोय शरीर के उपापचय (मेटाबॉलिजम) को ठीक करती है, सूजन कम करती है और पाचन शक्ति बढ़ाती है। ऐसा होने से पेट के आस-पास चर्बी जमा नहीं हो पाती और आपका वजन कम होता है।
*जवां रखती है गिलोय*
गिलोय में एंटी एजिंग गुण होते हैं, जिसकी मदद से चेहरे से काले धब्बे, मुंहासे, बारीक लकीरें और झुर्रियां दूर की जा सकती हैं। इसके सेवन से आप ऐसी निखरी और दमकती त्वचा पा सकते हैं, जिसकी कामना हर किसी को होती है। अगर आप इसे त्वचा पर लगाते हैं तो घाव बहुत जल्दी भरते हैं। त्वचा पर लगाने के लिए गिलोय की पत्तियों को पीस कर पेस्ट बनाएं। अब एक बरतन में थोड़ा सा नीम या अरंडी का तेल उबालें। गर्म तेल में पत्तियों का पेस्ट मिलाएं। ठंडा करके घाव पर लगाएं। इस पेस्ट को लगाने से त्वचा में कसावट भी आती है।
*बालों की समस्या भी होगी दूर*
अगर आप बालों में ड्रेंडफ, बाल झडऩे या सिर की त्वचा की अन्य समस्याओं से जूझ रहे हैं तो गिलोय के सेवन से आपकी ये समस्याएं भी दूर हो जाएंगी।
*गिलोय का प्रयोग ऐसे करें:*
अब आपने गिलोय के फायदे जान लिए हैं, तो यह भी जानिए कि गिलोय को इस्तेमाल कैसे करना है…
गिलोय जूस
गिलोय की डंडियों को छील लें और इसमें पानी मिलाकर मिक्सी में अच्छी तरह पीस लें। छान कर सुबह-सुबह खाली पेट पियें।
*काढ़ा*
चार इंच लंबी गिलोय की डंडी को छोटा-छोटा काट लें। इन्हें कूट कर एक कप पानी में उबाल लें। पानी आधा होने पर इसे छान कर पीएं। अधिक फायदे के लिए आप इसमें लौंग, अदरक, तुलसी भी डाल सकते हैं।
*पावडर*
यूं तो गिलोय पावडर बाजार में उपलब्ध है। आप इसे घर पर भी बना सकते हैं। इसके लिए गिलोय की डंडियों को धूप में अच्छी तरह से सुखा लें। सूख जाने पर मिक्सी में पीस कर पाउडर बनाकर रख लें।
*गिलोय वटी*
बाजार में गिलोय की गोलियां भी आती हैं। अगर आपके घर पर या आस-पास ताजा गिलोय उपलब्ध नहीं है तो आप इनका सेवन करें।
साथ में अलग-अलग बीमारियों में आएगी काम
अरंडी यानी कैस्टर के तेल के साथ गिलोय मिलाकर लगाने से गाउट(जोड़ों का गठिया) की समस्या में आराम मिलता है।इसे अदरक के साथ मिला कर लेने से रूमेटाइड आर्थराइटिस की समस्या से लड़ा जा सकता है।चीनी के साथ इसे लेने से त्वचा और लिवर संबंधी बीमारियां दूर होती हैं।आर्थराइटिस से आराम के लिए इसे घी के साथ इस्तेमाल करें।कब्ज होने पर गिलोय में गुड़ मिलाकर खाएं।
*साइड इफेक्ट्स का रखें ध्यान*
वैसे तो गिलोय को नियमित रूप से इस्तेमाल करने के कोई गंभीर दुष्परिणाम अभी तक सामने नहीं आए हैं लेकिन चूंकि यह खून में शर्करा की मात्रा कम करती है। इसलिए इस बात पर नजर रखें कि ब्लड शुगर जरूरत से ज्यादा कम न हो जाए।
*गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को गिलोय के सेवन से बचना चाहिए।पांच साल से छोटे बच्चों को गिलोय न दे* 🙏
*_एक निवेदन :---अभी वर्षाऋतु का काल है अपने घर में बड़े गमले या आंगन में जहाँ भी उचित स्थान हो गिलोय की बेल अवश्य लगायें यह बहु उपयोगी वनस्पति ही नही बल्कि आयुर्वेद का अमृत और ईश्वरीय अवदान है ।👏_*
✍🏻 पवन विष्णुदास पारीक
9420344777
HIV - काँगो
NIPAH -मलेशिया
EBOLA - सुदान
BIRD FLU -हॉंगकॉंग
DENGUE - इंडोनेशिया
CORONA - चीन
लाखो लोक गंगा गोदावरी पुष्कर येथे जमतात
अनेक जण कुंभ मेळयात येतात
पंढरीला येतात
पण
ना कोणती साथ येत ना कोणता व्हायरस
कारण आम्ही निसर्गाला,नदीला पूजतो
देव मानतो
तोच देव आम्हाला वाचवतो
ॐ प्रणाम
जय आयुर्वेद
जय पतंजलि
21/01/2020
#हल्दी (औषधीय गुणों से भरपूर)
हल्दी (टर्मरिक) भारतीय खाद्य वनस्पति है।
◆हल्दी (टर्मरिक) भारतीय वनस्पति है। यह अदरक की प्रजाति का ५-६ फुट तक बढ़ने वाला पौधा है जिसमें जड़ की गाठों में हल्दी मिलती है। हल्दी को आयुर्वेद में प्राचीन काल से ही एक चमत्कारिक द्रव्य के रूप में मान्यता प्राप्त है। औषधि ग्रंथों में इसे हल्दी के अतिरिक्त हरिद्रा, कुरकुमा लौंगा, वरवर्णिनी, गौरी, क्रिमिघ्ना योशितप्रीया, हट्टविलासनी, हरदल, कुमकुम, टर्मरिक नाम दिए गए हैं। आयुर्वेद में हल्दी को एक महत्वपूर्ण औषधि कहा गया है। भारतीय रसोई में इसका महत्वपूर्ण स्थान है और धार्मिक रूप से इसको बहुत शुभ समझा जाता है। विवाह में तो हल्दी की रसम का अपना एक विशेष महत्व है।
●लैटिन नाम : करकुमा लौंगा (Curcuma longa)
●अंग्रेजी नाम : टरमरिक (Turmeric)
●पारिवारिक नाम : जिन्जिबरऐसे
★परिचय★
◆हल्दी में उड़नशील तेल 5.8%, प्रोटीन 6.3%, द्रव्य 5.1%, खनिज द्रव्य 3.5%, और करबोहाईड्रेट 68.4% के अतिरिक्त कुर्कुमिन नामक पीत रंजक द्रव्य, विटमिन A पाए जाते हैं। हल्दी पाचन तन्त्र की समस्याओं, गठिया, रक्त-प्रवाह की समस्याओं, कैंसर, जीवाणुओं (बेक्टीरिया) के संक्रमण, उच्च रक्तचाप और एलडीएल कोलेस्ट्रॉल की समस्या और शरीर की कोशिकाओं की टूट-फूट की मरम्मत में लाभकारी है। हल्दी कफ़-वात शामक, पित्त रेचक व पित्त शामक है। रक्त स्तम्भन, मूत्र रोग, गर्भश्य, प्रमेह, त्वचा रोग, वात-पित्त-कफ़ में इसका प्रयोग बहुत लाभकारी है। यकृत की वृद्धि में इसका लेप किया जाता है। नाड़ी शूल के अतिरिक्त पाचन क्रिया के रोगों अरुचि (भूख न लगना) विबंध, कमला, जलोधर व कृमि में भी यह लाभकारी पाई गई है। इसी प्रकार हल्दी कि एक किस्म काली हल्दी के रूप में भी होती है। उपचार में काली हल्दी पीली हल्दी के मुक़ाबले अधिक लाभकारी होती है।
★हल्दी के चामत्कारिक गुण★
◆रसोई की शान होने के साथ-साथ हल्दी कई चामत्कारिक औषधीय गुणों से भरपूर है। आयुर्वेद में तो हल्दी को बेहद ही महत्वपूर्ण माना गया है क्योंकि हल्दी गुमचोट के इलाज में तो सहायक है ही साथ ही कफ-खांसी सहित अनेक बीमारियों के इलाज़ में काम आती है। इसके अलावा हल्दी सौन्दर्यवर्धक भी मानी जाती है और प्रचीनकाल से ही इसका उपयोग रूप को निखारने के लिए किया जाता रहा है। वर्तमान समय में हल्दी का प्रयोग उबटन से लेकर विभिन्न तरह की क्रीमों में भी किया जा है।
★औषधीय गुण★
◆हल्दी एक महत्वपूर्ण औषधि है। इसका उपयोग रसोई घर से लेकर मांगलिक कार्यों तक किया जाता है, घरेलू उपचार के रूप में भी इसका कई तरह से इस्तेमाल किया जाता है। किन-किन स्वास्थ्य समस्याओं में हल्दी लाभदायक साबित होती है..
●चोट लगे तो हल्दी आजमाएं
यदि किसी कारण से शरीर के बाहरी या अंदरूनी हिस्से में चोट लग जाए, तो प्रभावित व्यक्ति को हल्दी वाला दूध पिलाएं। यह अपने एंटी बैक्टीरियल और एंटीसेप्टिक गुणों के कारण बैक्टीरिया को पनपने नहीं देता।
●डायबिटीज में लाभकारी
हल्दी डायबिटीज के रोगियों के लिए लाभकारी है। इसके लिए हल्दी को एक चम्मच आंवले के रस, एक चम्मच शहद और एक चम्मच गिलोय के रस के साथ मिलाकर पिएं।
●दूध के साथ हल्दी का सेवन
हल्दी, मंजिष्ठा, गेरू, मुलतानी मिट्टी, गुलाब जल, एलोवेरा एवं कच्चे दूध को मिलाकर लेप तैयार करें। इसे चेहरे पर लगाने से त्वचा में निखार आता है। हल्दी वाला दूध पीने से त्वचा में प्राकृतिक चमक पैदा होती है।
●यदि आप नजले, जुकाम, खांसी से परेशान हैं, तो गर्म दूध में एक चम्मच हल्दी मिलाकर पिएं, इससे लाभ होगा।
रोज सुबह खाली पेट गुनगुने दूध में हल्दी मिलाकर सेवन करें, तो शरीर के दर्द, पेट के रोग आदि से छुटकारा पा सकते हैं।
●रक्त की सफाई करे हल्दी
हल्दी के सेवन से रक्त साफ होता है। इसके सेवन से रक्त में मौजूद विषैले तत्व बाहर निकल जाते हैं। अगर चोट लगने पर तेजी से खून बह रहा है, तो आप उस जगह तुरंत हल्दी डाल दें। इससे खून बहना रुक जाएगा।
●स्त्रियों के लिए हल्दी का उपयोग
महिलाओं में होने वाले श्वेत प्रदर या ल्युकोरिया जैसे रोगों में हल्दी अत्यंत गुणकारी औषधि है। इसके लिए पांच ग्राम हल्दी और अंजीर के तीन टुकड़े का सेवन करने से लाभ होता है।
●’हल्दी, खाने वाला चूना और शहद का लेप बना कर इसे मोच, ऐंठन, चोट या शरीर में आई सूजन वाली जगह पर लगाने से तुरंत लाभ होता है।
●’एनीमिया, पीलिया, बवासीर, सांस के रोग और लगातार हिचकी आने की स्थिति में हल्दी और काली मिर्च के धुएं को सूंघने से लाभ होता है।
●’चर्म रोगों में एक चम्मच कच्ची हल्दी और एक चम्मच आंवले के रस को पानी के साथ लेने से लाभ होता है।
’देसी घी से यदि दुर्गंध आ रही हो, तो उसे दूर करने के लिए हल्दी के पत्तों को पीसकर घी के साथ उबाल लें। इसके बाद इसे छान लें। इससे घी की दुर्गंध दूर हो जाएगी।
●’खुजली, दाद या त्वचा पर चकत्ते पड़ जाने पर हल्दी को गौ मूत्र के साथ मिलाकर इसका लेप प्रभावित जगह पर लगाएं, इससे जल्द आराम मिलेगा।
●मोटापा दूर करे
मोटापा कम करने के लिए हल्दी, नीबू, पुदीना, तुलसी और अदरक को आपस में मिलाकर चटनी बना लें। इसका नियमित सेवन करें, मोटापे पर काबू पाने में सफलता मिलेगी।
●मौसमी रोगों में फायदेमंद
’हल्दी की गांठों को नियमित रूप से चूसने से खांसी में राहत मिलती है। खांसी में हल्दी को भूनकर आधा चम्मच शहद या देसी घी के साथ खाने से भी लाभ होता है।
’जुकाम होने पर हल्दी पाउडर या हल्दी की गांठ को चूल्हे पर गर्म कर इससे निकलने वाले धुएं को सूंघें, लाभ होगा।
●’सिरदर्द होने या चक्कर आने पर हल्दी का लेप सिर पर लगाने से लाभ होता होता है।
बरतें सावधानी
●हल्दी का सेवन 3 से 5 ग्राम की मात्रा में ही करना चाहिए। विशेष स्थिति में आयुर्वेद विशेषज्ञ की सलाह से इसका सेवन करना चाहिए।
यूरिक एसिड पर कंट्रोल रखेंगी 3 चीजें, दवाइयों की नहीं पड़ेगी जरूरत
यूरिक सिड, आज आम सुनाई देने वाली समस्या हो गई है। 5 में से 3 शख्स को आप इस रोग की चपेट में फंसे पाएंगे लेकिन आम लगने वाली यह समस्या अगर समय रहते कंट्रोल में ना की जाए तो यह गंभीर रोग भी बन सकती है इसलिए इस पर काबू पाना जरूरी है लेकिन उससे पहले यूरिक एसिड बढ़ने की वजह जानना भी बहुत जरूरी है।
क्यों बढ़ने लगता है यूरिक एसिड ?
दरअसल, शरीर में मौजूद प्यूरिन नामक पदार्थ के टूटने से यूरिक एसिड बनता है। यह खून के जरिए किडनी तक पहुंचता है और यूरीन के रूप में शरीर से बाहर निकल जाता है लेकिन जब यह शरीर में ही स्टोर होने लगता है तो इसकी मात्रा बढ़ने लगती है जिससे दिक्कतें शुरू होने लगती है।
इसके चलते शरीर में इस तरह के संकेत नजर आते हैं...
जोड़ों में दर्दएड़ियों में दर्दगांठों में सूजनज्यादा देर तक बैठने या उठने पर एड़ियों में दर्दशुगर लेवल बढ़ना।सोते समय पैर में जकड़नचलने में समस्याघुटनों में दर्दपैर के अंगूठे में खुजली
यूरिक एसिड कम करने के लिए क्या खाएं ?
1. भरपूर पानी पीएं
यूरिक एसिड को कंट्रोल रखना है तो दिन में भरपूर मात्रा में पानी पीएं। पानी यूरिक एसिड को पतला करने का काम करता है और ऐसा करने से वह किडनी के रास्ते शरीर से बाहर निकल जाता है।
2. सेब का सिरका
सेब का सिरका भी बढ़े यूरिक एसिड को कंट्रोल करने में मदद कर सकता है। सेब के सिरके में एंटी-ऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेंटरी होते हैं जो यूरिक एसिड को नियंत्रित रखने का काम करते हैं। सेब का सिरका खून में पीएच स्तर को बढ़ा देता है जो यूरिक एसिड को कम करने में मददगार है।
3.जैतून के तेल
बढ़े हुए यूरिक एसिड को कंट्रोल करने में ऑलिव यानि जैतून का तेल भी मददगार साबित हो सकता है। इसमें पाए जाने वाला विटामिन ई यूरिक एसिड को कंट्रोल में रखता है।
इसके अलावा आप पानी में छोटी इलायची उबाल कर पीएं। ऐसा करने से यूरिक एसिड की मात्रा कम होने के साथ ही कोलेस्ट्रॉल लेवल भी कम होगा।
-प्याज खाएं क्योंकि यह शरीर में प्रोटीन की मात्रा व मेटाबॉलिज्म को बढ़ाता है और जब शरीर में इन दोनों की मात्रा बढ़ जाती है तो यूरिक एसिड की मात्रा नियंत्रण में रहती है।
-यूरिक एसिड की मात्रा को कम करने के लिए रोज अपनी डाइट में विटामिन सी लें। एक-दो महीने में यूरिक एसिड काफी कम हो जाएगा। संतरा, आंवला विटामिन सी के अच्छे स्त्रोत हैं।
-एक कच्चे पपीते को 2 लीटर पानी में 5 मिनट के लिए उबा लें। इस पानी को ठंडा करके छान लें फिर दिन 2 से 3 बार पिएं।
किन चीजों से रखें परहेज
*बीयर में यीस्ट होता है इसलिए इसके इससे भी बचें।
*रात को सोते समय दूध या दाल न खाएं।
*दही, चावल, अचार, ड्राई फ्रूट्स, दाल, पालक, फास्ट फूड, कोल्ड ड्रिंक्स, पैकड फूड, अंडा, मांस, मछली ना खाएं। ये सब चीजें यूरिक एसिड की समस्या बढ़ाती है।
*खाना खाते समय पानी न पीएं। खाना खाने से डेढ़ घंटे पहले या बाद में ही पानी पीना पिएं।
*बेकरी प्रॉडक्ट्स से बचें। ट्रांस फैट से भरपूर खाना यूरिक सिड का स्तर बढ़ाते हैं, इसलिए बेकरी के उत्पाद जैसे पेस्ट्रीज, कुकीज से दूर रहें।
*अगर आप इन चीजों से परहेज रखते हैं और बताए टिप्स को फॉलो करते हैं तो आप बिना दवाओं का सहारा लिए यूरिक एसिड पर कंट्रोल रख सकते हैं।
*सतत आजारी पडत असाल तर या 5 पानांचा करा वापर, आजारांपासून राहाल दूर*🌹
अॅलर्जी झाली असेल किंवा सर्दी, पोट दुखी अशा आजारांवर अनेकदा ठोस असा कोणताही वैद्यकीय उपचार नसतो. अशावेळी रुग्ण तर हैराण होतोच पण छोट्या आजारांमुळे शारीरिक त्रासापेक्षा मानसिक त्रास जास्त प्रमाणात होतो. पण अशा सततच्या आजारां पुढील पाच पानं आहेत रामबाण उपाय. कडूलिंब, तुळस, बाभूळ, वड आणि बोराची पानं फार गुणकारी असतात. घरगुती उपचार म्हणून या पानांचा उपयोग केला जातो. त्वचारोगपासून ते केस गळतीपर्यंतच्या अनेक समस्यांवर ही पानं रामबाण उपाय आहेत.
कडूलिंबाचं पान हे फार गुणकारी आहे. सकाळी रिकाम्या पोटी कडूलिंबाची 10-12 पानं कुटून त्याचा रस प्या. यामुळे त्वचारोग होणार नाही. याशिवाय कडूलिंबाची पानं उकळून त्या पाण्याने आंघोळ केली तर केस गळतीच्या समस्या उद्भवणार नाहीत. तसेच केसात कोंडा आणि उवा होणार नाहीत.
तुळशीची पानं टाकलेला चहा प्यायल्याने सर्दी- खोकला बरा होतो. रोज सकाळी तुळशीच्या पानांचा चहा नियमित प्यायला तर आपसूक अनेक आजारांपासून तुम्ही दूर राहता. कडूलिंब आणि तुळशीच्या पानांसोबतच बाभळाची पानंही अत्यंत गुणकारी आहेत. ही पानं पाण्यात उकळून त्याच्या गुळण्या केल्या तर दात आणि हिरड्या मजबूत होतात.
कडूलिंबाच्या पानांप्रमाणे बोराची पानंही केस गळतीसाठी उपयुक्त आहेत. कडूलिंबाची पानं आणि बोराची पानं एकत्र वाटून त्याचा रस केसांना लावला तर केस मजबूत होतात आणि केस गळतीची समस्या दूर होते.
*तिल के तेल के औषधीय प्रयोग*
1. तिल का सेवन १०-१५ मिनट तक मुँह में रखकर कुल्ला करने से शरीर पुष्ट होता है, होंठ नहीं फटते, कंठ नहीं सूखता, आवाज सुरीली होती है, जबड़ा व हिलते दाँत मजबूत बनते हैं और पायरिया दूर होता है |
2. ५० ग्राम तिल के तेल में १ चम्मच पीसी हुई सोंठ और मटर के दाने बराबर हींग डालकर गर्म किये हुए तेल की मालिश करने से कमर का दर्द, जोड़ों का दर्द, अंगों की जकड़न, लकवा आदि वायु के रोगों में फायदा होता है |
3. २०-२५ लहसुन की कलियाँ २५० ग्राम तिल के तेल में डालकर उबालें | इस तेल की बूँदे कान में डालने से कान का दर्द दूर होता है |
4. प्रतिदिन सिर में काले तिलों के शुद्ध तेल से मालिश करने से बाल सदैव मुलायम, काले और घने रहते हैं, बाल असमय सफेद नहीं होते |
5. ५० मि.ली. तिल के तेल में ५० मि.ली. अदरक का रस मिला के इतना उबालें कि सिर्फ तेल रह जाय | इस तेल से मालिश करने से वायुजन्य जोड़ों के दर्द में आराम मिलता है |
6. तिल के तेल में सेंधा नमक मिलाकर कुल्ले करने से दाँतों के हिलने में लाभ होता है |
7. घाव आदि पर तिल का तेल लगाने से वे जल्दी भर जाते हैं |
🙏🏻🙏🏻🙏🏻
Ahmednagar
ओ३म्
*ध्यान की ताकत*
क्या आप ध्यान करते है यदि नही तो आप बहुत बड़े घाटे में है।
*जब100 लोग एक साथ साधना करते है तो उत्पन्न लहरें*
*5 कि.मी.तक फैलती है और नकारात्मकता नष्ट कर*
*सकारात्मकता का निर्माण करती है*
*आईस्टांईन नें वैज्ञानिक दृष्टिकोण से कहा था के*
*एक अणु के विघटन से लाखों अणुओं का विघटन होता*
*है, इसीको हम अणु विस्फोट कहते है।*
*यही सूत्र हमारे ऋषि, मुनियों ने हमें हजारो साल*
*पहले दिया था।*..
*आज पृथ्वी पर केवल4% लोग ही ध्यान करते है*
*लेकिन*
*बचे 96% लोंगो को इसका पॉजिटिव इफेक्ट*
*होता है।*..
*अगर हम भी लगातार 90 दिनो तक ध्यान करे तो*
*इसका सकारात्मक प्रभाव हमारे और हमारे परिवार*
*पर दिखाई देगा।*.
*अगर पृथ्वी पर 10% लोंग ध्यान करनें लगे*
*तो पृथ्वी पर विद्यमान लगभग* *सभी,समस्याओं को*
*नष्ट करने की ताकत ध्यान में है।*..
*उदारहण के लिए हम बात करे तो महर्षि महेश योगी*
*जी ने सन् 1993 में वैज्ञानिकों के समक्ष यह सिद्ध*
*किया था।।*
*हुआ यू कि उन्होने वॉशिंगटन डि सी में 4000*
*अध्यापको को बुलाकर एक साथ ध्यान(मेडिटेशन)*
*करने को कहा और चमत्कारीक परिणाम यह था कि*
*शहर का क्राईम रिपोर्ट 50% तक कम हुवा पाया गया।*
*वैज्ञानिकों को कारण समझ नहीं आया और* *उन्होनें*
*इसे`महर्षि इफेक्ट"यह नाम दिया।*
*यह ताकत है ध्यान मे।*
*ओउम*
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