Pauranik Ayurved
Pauranik Ayurveda is a unique idea, by the lows of Nature. We suggest Ayurveda Panchakarma Naturopath & lifestyle for complete healthcare of wellbeing.
01/05/2024
क्या मधुमेह रोगी आम खा सकते हैं?
गर्मियों के फलों का राजा कहा जाने वाला आम हर किसी का पसंदीदा होता है। आम खाने में बहुत रसीले होते हैं। अकेले भारत में इस फल की 1500 से अधिक किस्में उगाई जाती हैं। क्योंकि यह मिठास से भरपूर है।
मधुमेह रोगी अक्सर आम खाने में लापरवाही करते हैं, क्योंकि इसे खाने के बाद रक्त शर्करा का स्तर बढ़ जाता है। ऐसे में आपको आम खाना चाहिए या नहीं? ये सवाल हर किसी के मन में आता है. आइए जानते हैं इस पर पोषण विशेषज्ञ सुगंधा नैय्यर द्वारा दी गई जानकारी:
क्या मधुमेह रोगी आम खा सकते हैं?
● मधुमेह रोगी आम खा सकते हैं, बस शुगर नियंत्रित रखें।
● जिनका ब्लड शुगर लेवल मध्यम है वे भी आम खा सकते हैं।
● जिन लोगों का शुगर लेवल बहुत ज्यादा गड़बड़ रहता है उन्हें इसे बिल्कुल भी नहीं खाना चाहिए।
आम को आहार में कैसे शामिल करें?
मधुमेह रोगी भी आम का सेवन कर सकते हैं, बस उन्हें मात्रा का ध्यान रखना होगा। आप आम खा सकते हैं, लेकिन सावधान रहें कि ऐसे आम के साथ कुछ भी न खाएं जिसमें कार्बोहाइड्रेट की मात्रा अधिक हो।
आम के साथ कभी भी उच्च ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले खाद्य पदार्थ न खाएं।
किन लोगों को आम नहीं खाना चाहिए?
● जिन लोगों के शरीर में पोटैशियम की मात्रा कम होती है उन्हें आम नहीं खाना चाहिए।
● किडनी की समस्या वाले लोगों को आम नहीं खाना चाहिए।
● आम एक लिमिट में ही खाएं। लेकिन गलती से भी मैंगो शेक न पिएं, क्योंकि इनमें शुगर की मात्रा अधिक होती है।
# इन सब से एक बात तो साफ है कि आम खाएं, लेकिन मात्रा का ध्यान रखें।
संपर्क करें:
पौराणिक आयुर्वेद
094240 37637
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महर्षि सुश्रुत द्वारा विश्व कल्याण की भावना से सुश्रुतसंहिता की रचना की गई जो शल्य चिकित्सा प्रधान है। आधुनिक चिकित्सा ने उन्हें सम्मान पूर्वक "शल्यशास्त्र के पिता" Father of Surgery के रूप में स्वीकार किया। आज विश्व मे होने वाली समस्त सर्जरी का उद्गम व ज्ञान इसी सुश्रुतसंहिता से है। ऐसे सनातन भारतीय मनीषी को शतशः प्रणिपात।
मेलबर्न में रॉयल ऑस्ट्रेलियन कॉलेज ऑफ सर्जन्स में प्राचीन भारतीय चिकित्सक-सर्जन सुश्रुत को समर्पित एक मूर्ति स्थापित है। वह दुनिया के पहले प्रलेखित सर्जन हैं और उन्हें सर्जरी का जनक और प्लास्टिक सर्जरी का अग्रणी माना जाता है।
भारतीय आज भी इस बात से अनभिज्ञ हैं। आज भी आयुर्वेद चिकित्सकों से पूछा जाता है कि "आयुर्वेद में सर्जरी भी होती है क्या?"
महर्षि सुश्रुत के आशीष से सर्वजनारोग्यता की कामना के साथ।
अब थोड़ा खून बढ़ाएं:
एक राजा था ।.. उसने एक सर्वे करनेका सोचा कि *मेरे राज्य के लोगों की घर गृहस्थी पति से चलती है या पत्नि से..।*
उसने एक ईनाम रखा कि "जिसके घर में पति का शासन चलता हो उसे मनपसंद घोडा़ ईनाम में मिलेगा और जिसके घर में पत्नि की सरकार हो वह एक सेब ले जाए.. ।
एक के बाद एक सभी नगरजन सेब उठाकर जाने लगे। राजाको चिंता होने लगी.. क्या मेरे राज्य में सभी सेब ही हैं ?
इतने में एक लम्बी लम्बी आग मूछों वाला, मोटा तगडा़ और लाल लाल आखों वाला जवान आया और बोला - "राजा जी मेरे घर में मेरा ही हुकम चलता है .. ला ओ घोडा़ मुझे दीजिए .."
राजा खुश हो गए और कहा जा अपना मनपसंद घोडा़ ले जा ..। जवान काला घोडा़ लेकर रवाना हो गया।
घर गया और फिर थोडी़ देर बाद दरबार में वापिस लौट आया।
राजा: "क्या हुआ जवामर्द ? वापिस क्यों आया?"
जवान : "महाराज, घरवाली कहती है काला रंग अशुभ होता है, सफेद रंग शांति का प्रतिक होता है तो आप मुझे सफेद रंग का घोडा़ दीजिए!"
राजा: "घोडा़ रख ..और सेब लेकर चलती 👉 पकड़।"
इसी तरह रात हो गई .. दरबार खाली हो गया लोग सेब लेकर चले गए।
आधी रात को महामंत्री ने दरवाजा खटखटाया..
राजा : "बोलो महामंत्री कैसे आना हुआ ?"
महामंत्री : " महाराज आपने सेब और घोडा़ ईनाम में रखा, इसकी जगह एक मण अनाज या सोना महोर रखा होता तो लोग बाग कुछ दिन खा सकते या जेवर बना सकते।"
राजा : "मुझे तो ईनाम में यही रखना था लेकिन महारानी ने कहा कि सेब और घोडा़ ही ठीक है इसलिए वही रखा।"
महामंत्री : "महाराज आपके लिए सेब काट दूँ..!!"
राजा को हँसी आ गई । और पूछा यह सवाल तुम दरबार में या कल सुबह भी पुछ सकते थे, तो आधी रात को क्यों आये ??
महामंत्री : "मेरी धर्मपत्नि ने कहा अभी जाओ और पूछ के आओ ताकि सच्ची घटना का पता चले ..।"
राजा ( बात काटकर ) : " महामंत्री जी, सेब आप खुद ले लोगे या घर भेजवा दिया जाये !"
Moral of the story..
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*समाज चाहे पुरुष प्रधान हो लेकिन संसार स्त्री प्रधान है*!
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🙏🏻🚩जय सियाराम🚩🙏
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