Art Of Sobriety

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24/12/2021

दिसंबर~24

समूह

“ हमारे व्यक्तिगत कार्यक्रम का बाहरवां भी यह कदम यह कहता है कि हम पीड़ित एडिक्ट को संदेश पहुंचाते हैं । संदेश को पहुंचाने के लिए समूह हमारा सबसे शक्तिशाली वाहन है । "

बेसिक टेक्स्ट पृष्ठ ... 62

जब हम नारकोटिक्स एनॉनिमस की सभाओं में पहली बार आते हैं , तब हम सुधरते हुए एडिक्टों से मिलते हैं । हम जानते हैं कि वह एडिक्ट हैं क्योंकि वह उन्हीं अनुभवों और अनुभूतियों की चर्चा करते हैं , जिनसे हम गुजरे हैं।हम उनकी आत्मशांति को देखकर जानते हैं कि वह सुधर रहे हैं , उनके पास कुछ ऐसा है जो हम पाना चाहते हैं । जब एन.ए की सभाओं में दूसरे तमाम एडिक्ट हमसे अपने सुधार का अनुभव शेयर करते हैं , तो हममें उम्मीद की एक किरण जाग उठती है ।

सुधार का माहौल हमें सभाओं की तरफ़ खींचता है । यह माहौल तब बनता है जब समूह के सदस्य आपस में मिलकर काम करने के लिए वचनबद्ध होते हैं । हम स्वभाव के आयोजनों में मदद करके , नए आने वाले का अभिनंदन करते हैं और सभा खत्म हो जाने के बाद दूसरे एडिक्टों से बातचीत करके सुधार के माहौल को बढ़ाने की कोशिश करते हैं । हमारी वचनबद्धता के प्रदर्शन हमारी सभाओं को काफी आकर्षक बना देते हैं और हमारे समूह को आपस में सुधार के अपने अनुभव को शेयर करने का मौका देते हैं ।

सभाओं में अपने-अपने अनुभवों को शेयर करना एक तरीका है जिसके द्वारा हम आपस में एक दूसरे की मदद करते हैं ओर बहुदा यह हमारे जुड़ाव की भावना का आधार होता है।हम दूसरे।एडिक्टों के साथ अपनी पहचान कायम करते हैं , जिससे हम उनकी उम्मीदों के संदेशों पर भरोसा कर सकें।उस जुड़ाव और उम्मीद की भावना बिना हममें से बहुत से तो नारकोटिक्स एनॉनिमस में तो ठहर ही नहीं पाते।जब हम समूह की सभाओं में परस्पर शेयर करते हैं तब हम दूसरों की मदद करने के साथ-साथ अपनी व्यक्तिगत सुधार को भी बढ़ावा देते हैं।

सिर्फ आज के दिन : - मैं अपने समूह के दूसरे किसी एडिक्ट तक पहुंच कर उससे अपने सुधार के अनुभवों को शेयर करूंगा।

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26/05/2021

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21/03/2021

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17/02/2021

फरवरी~17

*_सन्देश पहुँचायें एडिक्ट को न ढोये_*

*“ उनका विश्लेषण किया जा सकता है, सलाह दी जा सकती है, बातचीत की जा सकती है, उनके लिए प्रार्थना की जा सकती है, धमकाया जा सकता है, पिटाई की जा सकती है या बंद किये जा सकते हैं लेकिन वे नशा तब तक करना बंद नहीं करेंगे जब तक वे बन्द करना नहीं चाहते ! ”*

बेसिक टेक्स्ट, पृष्ठ....59
शायद अपने सुधार में सबसे कठिन इस सत्य को हमें समझ लेना चाहिए कि दूसरे के एडिक्शन की आदत को लेकर हम उतने ही शक्तिहीन हैं, जितने की अपने एडिक्शन को लेकर हैं! हम सोचते हैं कि हम क्योंकि अपने जीवन में एक आध्यत्मिक जागृति ला चुके है तो हम दूसरे एडिक्ट्स को भी उनके सुधार के दौरान ऐसा ही अनुभव पाने ऐसा ही अनुभव पाने के लिए उन्हें सहज ही मना लेंगे, तो शायद हम कुछ ज्यादा ही उम्मीद लगा बैठे हैं ! हमारी सीमाएं हैं कि, हम दूसरे एडिक्ट्स को सुधरने में किस हद तक मदद कर सकते हैं !

नशा छुड़वाने के लिए हम उन पर कोई ज़ोर-ज़बरदस्ती नही कर सकते ! हम उन्हें सुधार के कदमों के नतीजे नहीं दे सकते हैं और न ही उनकी जगह आगे बढ़ सकते हैं ! उनका अकेलापन या उनका दर्द हम नहीं ले सकते ! ऐसा कुछ भी नही है, जिसे हम सुधार की भयानक अनिश्चतता के मद्देनजर एक डरे हुए एडिक्ट को अपने जाने-पहचाने कष्ट को समर्पित कर देने के लिए भरोसा दिला सकें ! हम दूसरों के जिस्म में नहीं घुस सकते, उनके लक्ष्यों को नहीं बदल सकते, और उनके लिए सबसे बेहतरीन क्या हो सकता हैं, इसके फैसले हम नहीं कर सकते!

फिर भी हम दूसरों के एडिक्शन की आदतों पर इस शक्ति को जबरन थोपने से अपने से अलग रखें, तो एक तरह से हम उनकी मदद ही करते हैं ! वे विकसित हो सकते हैं, अगर हम उन्हें हक़ीक़त का सामना करने दें, भले ही यह विचार कितना ही दर्दनाक क्यों न हो ! अपने नज़रिये से वे ज्यादा उत्पादक बन सकते हैं, बशर्ते जब तक कि हम उनके लिए ऐसा कुछ भी न करें ! अपनी-अपनी ज़िन्दगियों के वे खुद मालिक बन सकते हैं, बशर्ते हम स्वयं अपनी ज़िन्दगियों के खुद मालिक हों ! अगर हम यह सब स्वीकार कर लें तो हम वह बन सकते हैं जो हमें बनना था – सन्देश ले जाने वाले न की नशेबाज को ढोने वाले !

*सिर्फ आज के दिन : मैं स्वीकार करता हूँ कि मैं अपने एडिक्शन पर ही नहीं अपितु हर दूसरे के एडिक्शन पर भी पूरी तरह शक्तिहीन हूँ ! मैं सन्देश ले जाऊँगा, एडिक्ट को दूँगा नहीं !*

06/02/2021

***************
🙏🏼हे ईश्वर🙏🏼
हमें आत्म शाँति दो,
उन चीजों को स्वीकार करने की
जिन्हेें हम बदल नहीं सकते.
हिम्मत दो,
उन चीजों को बदलने की,
जिन्हे हम बदल सकते हैं.
और इन दोनों में भेद जानने
की सदबुद्धि दो.
तेरी इच्छा चले, मेरी नहीं ।
🙌🏼💐🙌🏼
***************
📕📕📕 *दैनिक चिंतन*📕📕📕

💐💐💐 *फरवरी ०६* 💐💐💐

*🙏एकत्रित होने का स्थान 🙏*

इसीलिए दूसरा कदम हम सबका एकत्र होने का बिन्दू है। चाहे हम ईश्वर को ना मानने वाले हो, नास्तिक या पहले विश्‍वास करने वाले क्यों ना हो इस कदम पर हम इकट्ठे खडे हो सकते है।
*टवेल्व् स्टेप्स् एॅन्ड़ टवेल्व् ट्रेडिशंस पृ.३३*

मुझे लगता है कि ए.ए. एक ईश्वर से प्रेरित कार्यक्रम है और प्रत्येक ए.ए. मींटिग में ईश्‍वर है। मैं देखता हूँ,विश्‍वास करता हूँ और मुझे पता है कि ए.ए. काम करता है क्योंकि आज के दिन मैं संयमित (सोबर) हूँ। ए.ए. मींटिग्ज् में जाने से मैं अपने जीवन को ए.ए. के और ईश्‍वर के हवाले कर रहा हूँ। अगर ईश्‍वर मेरे दिल में है और दूसरों के भी दिल में है तो मैं उस संपूर्ण का एक छोटा सा हिस्सा हूँ और मै अनोखा नहीं हूँ। अगर ईश्‍वर मेरे ह्रदय में है और वह मुझसे औरों के द्वारा बात करता है, तो मुझे औरों के लिए ईश्‍वर का स्रोत बनना पडेगा। मुझे ईश्‍वर की इच्छा जानने के लिए आध्यात्मिक सिद्धान्तों पर चलना पडेगा और सद् बुद्धि एवम् भावनात्मक संयम (सोबराइटी) मेरा पुरस्कार होगा।

06/02/2021

फरवरी~6

मैं नहीं हम कर सकते हैं।

"हमने अपने आपको मंनवा लिया कि हम अकेले चल सकते हैं और इसी आधार पर हम अपनी जिंदगी जीने लगे । इसके परिणाम विनाशकारी निकले और आखिर हममें से हर एक को यह कबूल करना पड़ा कि आत्मनिर्भरता एक झूठ था ।"

बेसिक टेक्स्ट पृष्ठ 57

"मैं नहीं कर सकता , पर हम कर सकते हैं । "एक एन.ए सदस्य होने के नाते यह सरल पर बड़ा ही महत्वपूर्ण सत्य प्राथमिक स्तर पर पहली जरूरत पर पूरी तरह लागू होता है मिलकर , हम क्लीन रह सकते हैं , लेकिन जब हम अपने को अलग-थलग कर लेते हैं , तब हम एक बुरी सोहबत में फंसने लगते हैं। सुधरने के लिए हमें दूसरे एडिक्टों के सहयोग की जरूरत है।
हमारी आत्मनिर्भरता स्वच्छ रहने की हमारी क्षमता से कहीं अधिक हमारे सुधरने के मार्ग में रुकावट बन जाती है । नशा लिए बिना या नशा लेते हुए भी , अपनी इच्छा के आधार पर जिंदगी जीना निश्चय ही हमें महा नाश की ओर धकेल देता है । हम तमाम वस्तुओं ,बातों तथा प्रेम और साथ सहयोग की सेवाओं के लिए दूसरे लोगों पर निर्भर हो जाते हैं , फिर भी हमारी इच्छाएं उन्हीं लोगों से लगातार संघर्ष की स्थिति में लाकर खड़ा कर देती है । एक पूर्ण संतुष्टि भरा जीवन जीने के लिए जरूरी है कि हम दूसरों के साथ तालमेल स्थापित करें।
अन्य एडिक्ट्स तथा दूसरे तमाम लोग ही हमारे समुदायों में सब कुछ नहीं है , जिन पर हम निर्भर हो चलें । शक्ति कोई मानवीय लक्षण नहीं है , फिर भी हमें जीवित रहने के लिए शक्ति चाहिए । इसे हम अपने से महानतर एक उच्च शक्ति हमें पाते हैं जो हमें ऐसा नेतृत्व भी देती है और सामर्थ्य भी , जो हमारे पास नहीं है। जब आत्मनिर्भर होने का दिखावा करते हैं , तब हम अपने को शक्ति के एक स्त्रोत से अलग-थलग कर लेते हैं , जो पूरी उम्र हमें रास्ता दिखाते रहने में पूरी तरह सक्षम है - हमारी उच्च शक्ति !

कोरी आत्मनिर्भरता कारगर नहीं होती । हमें दूसरे एडिक्टों की जरूरत है , दूसरे लोगों की भी जरूरत है , और एक पूरी मुकम्मल जिंदगी जीने के लिए हमें अपने से महान एक उच्चशक्ति की भी जरूरत है ।

सिर्फ आज के दिन : - मैं दूसरे सुधरते हुए एडिक्टों का सहयोग पाने का पूरा प्रयास करुंगा , अपने समुदाय में तालमेल बिठाने की पूरी-पूरी कोशिश करूंगा और अपनी उच्च शक्ति की देखभाल प्राप्त करूंगा । मैं नहीं , पर हम कर सकते हैं ।

04/02/2021

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🙏🏼हे ईश्वर🙏🏼
हमें आत्म शाँति दो,
उन चीजों को स्वीकार करने की
जिन्हेें हम बदल नहीं सकते.
हिम्मत दो,
उन चीजों को बदलने की,
जिन्हे हम बदल सकते हैं.
और इन दोनों में भेद जानने
की सदबुद्धि दो.
तेरी इच्छा चले, मेरी नहीं ।
🙌🏼💐🙌🏼
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📕📕📕 *दैनिक चिंतन*📕📕📕

💐💐💐 *फरवरी ०४*💐💐💐

*🙏🏻 जब विश्वास खो जाता है🙏🏻*

जिन लोगों को कभी विश्वास नहीं था उनकी तुलना में कभी कभी उन लोगो के लिए ए.ए. ज्यादा कठिन होता है, जो पहले विश्वास करते थे और अब उसे खो स
चुके हैं या त्याग चुके हैं, क्योंकि उनके विचार से उन्होंने विश्वास का उपयोग किया और उसमे कमी महसूस की।।उन्होंने विश्वास का तरिका भी अपनाया और अविश्वास को भी अपनाया।
*टूवेलव स्टेप्स एंड टूवेलव ट्रडिशन पृ.२८*

मुझे ऐसा पक्का विश्वास हो गया था कि ईश्वर ने मेरा साथ नहीं दिया जिसकी वजह से मैं आखिर उधदत, जब कि मुझे पता था कि ऐसा नहीं है और मैने आखिरी बार जमकर शराब में डुबकी मारी।मेरा विश्वास कटु हो गया और वह कोई इत्तफाक नहीं था। जिनको कभी अति विश्वास होता था वे बरबादी के तल तक बहुत जोर से गिरते हैं।ए.ए .मे आने के बावजूद मेरे विश्वास को दुबारा जगाने मे समय लगा।बौध्दिक रूप से मै आभारी था कि मै इतनी बडी गिरावट के बावजूद बच गया लेकिन मेरा हृदय कठोर रहा।फिर भी मै ए.ए. के कार्यक्रम के साथ चिपका रहा,सारे विकल्प ज्यादा रूखे थे ! मैं वापस आता रहा और धीरे धीरे मेरा विश्वास जाग उठा।

04/02/2021

फरवरी~4

केवल अच्छा महसूस करना ही सब कुछ नहीं है

"हमारे लिए रिकवरी सिर्फ आनंद से भी बढ़कर है ।"

बेसिक टेक्स्ट पृष्ठ 41

अपने सक्रिय एडिक्शन के दौरान हममें से अधिकांश निश्चित तौर पर यह जानते थे कि हम एक दिन से आगे अगले दिन कैसा महसूस करेंगे । तब हमें बस यही करना होता था कि हम बोतलों पर चिपके लेबल पढ़ लें अथवा यह जान लें कि हम थेलों में क्या है । हम अपनी अनुभूतियों को योजनाबद्ध करते थे और हर रोज हमारा लक्ष्य सही रहता था कि हम अच्छा महसूस करें ।

पर अब सुधार कार्यक्रम में हम एक दिन से अगले दिन तक यहां तक कि एज मिनट से अगले मिनट भी कुछ महसूस कर सकते हैं । हम सुबह के समय अपने को ऊर्जा से भरपूर और प्रसन्न महसूस कर सकते हैं और शाम के समय अजीबोगरीब तरीके से अपने को टूटा हुआ और दुखी भी महसूस कर सकते हैं । क्योंकि अब हम सुबह अपनी अनुभूतियों के लिए कोई योजना नहीं बनाते । ऐसे में हम ऐसी अनुभूतियों से भर सकते हैं , जो हमारे लिए काफी असहज हों ,जैसे कि सुबह कुछ थका-थका सा महसूस करें और रात में सोने के समय देर तक जागें ।

ठीक है , यह संभावना हमेशा रहती है , कि हम अच्छा महसूस करें , लेकिन बात यह नहीं है । आज , हमारी मुख्य चिंता अच्छा महसूस करना ही नहीं है , अपितु चिंता यह है कि अपनी अनुभूतियों को कैसे समझा जाए और कैसे उनसे निपटा जाए , भले ही वे कुछ क्यों ना हों । हम सुधार कार्यक्रम के कदमों पर अमल करके तथा दूसरों के साथ अपनी अनुभूतियों को बांटकर यह कार्य करते हैं ।

सिर्फ आज के दिन : - मैं अपनी अनुभूतियों को भले ही वे कुछ भी हों , वैसे ही स्वीकार करूंगा । मैं सुधार कार्यक्रम पर अमल करूंगा और अपनी अनुभूतियों के साथ रहने का प्रयास करूंगा ।

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