Journalist Vipin Baniyal
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-यह पेज खास तौर पर, हिमालयी लोक गीत-संगीत, आंचलिक फिल्में, सामाजिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक, धार्मिक आदि के साथ ही सम सामायिक विषयों की महत्वपूर्ण, दिलचस्प व मौलिक जानकारी देने के उद्देश्य से निर्मित किया गया है।
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-पहली उत्तराखंडी गढ़वाली फिल्म 'जग्वाल' बनाने वाले पाराशर गौड़ ने अस्सी के दशक में आशा जी से एक गाना रिकार्ड कराया था। हालांकि बदकिस्मती से उस गाने का इस्तेमाल नहीं हो पाया । आशा जी को याद करते हुए पाराशर गौड़ की जुबानी, इस गाने की कहानी । Parashar Gaur
-महान आशा भोसले दुनिया को अलविदा कह गई हैं। हिंदी फिल्मों में उनके गाए सुपरहिट गीतों की तो बात ही अलग है, तमाम आंचलिक भाषाओं के गीत भी उनकी आवाज में महके हैं। उत्तराखंडी गढ़वाली फिल्म इंडस्ट्री का भी अहोभाग्य की एक गाना उसे आशाजी की आवाज में नसीब हुआ है। महान आशा जी को भावपूर्ण श्रद्धांजलि । Balraj Negi Kailash Thaledi
13/04/2026
थोड़ा समझा, थोड़ा जाना, एक टेक में हो गया पहाड़ी गाना
उत्तराखंड का सौभाग्य, आशा भोंसले ने गाया है गढ़वाली गाना- 'जन्मों कू साथ'
-वर्ष 1989 में रिकार्ड हुआ था आशा भोंसले का यह गाना
-कैलाश थलेड़ी ने लिखा और कंपोज किया था यह गीत
विपिन बनियाल
-यह वर्ष 1989 की बात है। मुंबई के एक स्टूडियो में हलचल तेज थी। एक उत्तराखंडी गढ़वाली फिल्मी गाने की रिकार्डिंग होनी थी। गाना आशा ताई यानी आशा भोंसले की आवाज में रिकार्ड होना था। आशा जी स्टूडियो पहुंची, तो फिल्म के हीरो बलराज नेगी और संगीतकार कैलाश थलेड़ी ने गर्मजोशी से उनका स्वागत किया। आशा जी ने पहले गाने के बोल समझे और फिर धुन। इसके बाद, एक ही टेक में उन्होंने गाना गा दिया- 'जन्मों कू साथ छयो किले त्वेन तोड़ि, कख लुकी ग्वेर छोरा, अधबट्टा मा छोड़ि।'
आशा जी, दुनिया को अलविदा कह गईं हैं । मगर उनकी आवाज, उनके गीतों की खुशबू कभी कम नहीं होंगी । भारतीय फिल्म संगीत को अपनी मखमली आवाज के मार्फत उन्होंने नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया और उसे समृद्ध किया। उनके गाए हिंदी फिल्मी गानों की लंबी फेहरिस्त है। आंचलिक फिल्मों के लिए भी उन्होंने तमाम सारे गाने रिकार्ड कराए। उत्तराखंड का परम सौभाग्य कि उनकी आवाज वाला 'जन्मों कू साथ' गीत बेशकीमती धरोहर की तरह हमारेे पास मौजूद है।
वर्ष 1989 में जब यह गीत रिकार्ड किया गया, तब फिल्म का नाम 'ग्वेर छोरा ' था, लेकिन बाद में इसे 'जन्मों कू साथ' कर दिया गया। इस सेड सांग को कैलाश थलेड़ी ने न सिर्फ कंपोज किया था, बल्कि लिखा भी खुद ही था। थलेड़ी बताते हैं- 'गाने के मिजाज को समझने में आशा जी ने जितनी तेजी दिखाई, वह हैरत में डालने वाली थी। एक टेक में उन्होंने यह गाना रिकार्ड करा दिया '। थलेड़ी कहते हैं- 'मुुझ से बड़ा सौभाग्यशाली और कौन होगा, जिसके गाने को आशा जी की मखमली आवाज नसीब हुई '।
रिकार्डिंग के दौरान अपने व्यवहार से आशा जी ने स्टूडियो में मौजूद हर एक शख्स को प्रभावित किया। फिल्म के हीरो रहे बलराज नेगी कहते हैं- 'वह हर एक के साथ आत्मीयता से पेश आई। गायकी में उनके परफेक्शन का तो दुनिया ने लोहा माना है। उनका निधन वास्तव में संगीत जगत की बहुत बड़ी क्षति है '।
आशाजी को लेकर पाराशर गौड़ का मलाल
-पहली गढ़वाली फिल्म 'जग्वाल' बनाने वाले पाराशर गौड़ का आशा जी को लेकर वर्षों पुराना मलाल है। दरअसल, एक समय कुछ लोगों की सलाह पर पाराशर गौड़ ने हिंदी में 'प्रतीक्षा' नाम से फिल्म बनाने की तैयारी की थी। इस क्रम में उन्होंने आशा जी से एक गीत रिकार्ड कराया था। इस गीत के बोल थे- 'अनहोनी हो गई '। बाद में हिंदी की जगह गढ़वाली में फिल्म बनाने का पाराशर गौड़ ने निर्णय लिया, तो यह गाना अनुपयोगी ही रह गया। पाराशर गौड़ कहते हैं- 'आशाजी के गाने का उपयोग ना कर पाने का मलाल है '।
-उत्तराखंड साहित्य गौरव सम्मान पाने वाले गजेंद्र नौटियाल यूं तो मूल रूप से साहित्यकार, नाटककार और रंगकर्मी हैं, लेकिन उन्होंने समय-समय पर कई गढ़वाली गीत भी लिखे हैं । अपने अभिन्न मित्र प्रीतम भरतवाण और ओम बधानी के लिए भी उन्होंने गीत लिखे हैं । इस बार गजेंद्र नौटियाल के साथ ही ओम बधानी को उत्तराखंड साहित्य गौरव सम्मान हासिल हुआ है।
-उत्तराखंड की सबसे बड़ी हिट फिल्म घरजवै का गाना छम घुंघरू बजला . . . एक तरह का आइटम सांग था, जो जबरदस्त कामयाब रहा । इस गाने को मुंबई के स्टूडियो में शूट किया गया और भीड़ में पहाड़ी चेहरे दिखाने के लिए बकायदा उत्तराखंड से लोगों को वहां ले जाया गया। फिल्म के हीरो बलराज नेगी ने 'धुन पहाड़ की' चैनल को एक इंटरव्यू में यह दिलचस्प जानकारी साझा की। Balraj Negi
-बॉलीवुड की ब्लॉक बस्टर फिल्म धुरंधर -2 में जुबिन नौटियाल की आवाज का जादू बिखर रहा है। मायानगरी के सितारे जुबिन नौटियाल पहाड़ के ऐसे लाल हैं, जो अपनी जड़ों से हमेशा जुड़े रहे हैं। सुपरहिट गीत - जो मै ना रहा, के लिए धुरंधर जुबिन को उत्तराखंड की ओर से ढेर सारी बधाई । Jubin Nautiyal
-फोक व फ्यूजन रजनीकांत सेमवाल की गीतों का अनिवार्य सी शर्त है। करीब 16 वर्ष पहले टिकुलिया मामा गीत से अपने संगीत के कॅरियर की शुरुआत करते वक्त भी उनके केंद्र में फोक - फ्यूजन था और अब भी है, जबकि वह टिकुलिया मामा पार्ट टू लेकर आए हैं। यह जबरदस्त परफॉरमेंस है और आनंदित करती है। Rajanikant Semwaal
-अजय दीवान की जोड़ी का आखिरी रिकार्ड किया गया गीत है 'बुरांस'। दीवान दा के असामयिक निधन के बाद इसे रिलीज किया गया है। गाना पहले ही रिकार्ड हो चुका था, लेकिन इसके वीडियो शूट के लिए बुरांस खिलने की प्रतीक्षा हो रही थी। बुरांस खिले, लेकिन दीवान दा नहीं रहे। एक तरह से 'बुरांस' गीत दीवान दा को भावपूर्ण श्रद्धांजलि है। श्रद्धांजलि सुमित्रानंदन पंत जी को # भी है, जिनकी यह रचना है। अजय दीवान की हर प्रस्तुति की तरह ही ये प्रस्तुति है। यानी खास है
। DrAjay Dhoundiyal
-नेगीदा की संगीत यात्रा को 50 वर्ष से ज्यादा का वक्त हो गया है। उनके कॅरियर की शुरुआत के दौरान आकाशवाणी ने उन्हें एक खास पहचान दिलाई थी। उनके गाने पहले लखनऊ और बाद में नजीबाबाद केंद्र से खूब बजे और घर घर तक पहुंचे। नेगीदा को आकाशवाणी से जोड़ने का श्रेय केशव अनुरागी को जाता है, जो कि आकाशवाणी मै कार्यरत थे और उत्कृष्ट लोक गायक, गीतकार संगीतकार थे। नेगीदा हमेशा अनुरागी जी को याद करते हैं और उनके प्रति कृतज्ञता प्रकट करते हैं। अनुरागी जी की पुस्तक नाद नंदिनी के पुनर्प्रकाशन के दौरान नेगीदा ने एक बार फिर खुलकर अपने, अनुरागी जी और आकाशवाणी के बारे में बात की।
-प्रहलाद मेहरा बहुत जल्दी दुनिया से विदा ले गए, लेकिन उन्होंने अपने निधन से पहले ही कई गीत रिकार्ड करा लिए थे। ये गीत अब सामने आ रहे हैं । ये अफसोस और गहरा हो रहा है कि प्रहलाद दा तुम इतनी जल्दी क्यों चले गए । उनके दो गीत लगभग एक साथ ही रिलीज हुए हैं, जो उनकी याद ताजा कराते हैं।
दीवान कनवाल की सबसे बड़ी पहचान क्या रही है। निसंदेह, एक लोक गायक । वे आकाशवाणी के 'ए' ग्रेड गायक कलाकार थे। उत्तराखंडी लोक संगीत के तमाम बड़े गायक आज भी 'ए' ग्रेड नहीं हैं। दीवान दा के व्यक्तित्व में तमाम तरह की कलाकारी कूट कूट कर भरी थी। मसलन, अच्छे गायक, बढ़िया गीतकार, संगीतकार, कुशल अभिनेता और हुड़के के मंझे हुए वादक । एक कलाकार में एक साथ इतनी खूबी नामुमकिन नहीं, तो बहुत मुश्किल जरूर है। दीवान दा को दिल की गहराइयों से श्रद्धांजलि ।
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