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14/09/2024
Attar Wallah
Waqf Act Series -
वक़्फ़ एक्ट —1995 के तहत वक़्फ़ बोर्ड का गठन अनिवार्य है. इस बोर्ड में कम से कम 7 और ज़्यादा से ज़्यादा 11 सदस्य होंगे.
इन सदस्यों में से चार सदस्य सरकार द्वारा नॉमिनेट किए जाते हैं.
1. एक मुस्लिम व्यक्ति को सरकार नॉमिनेट करेगी, जिसको टाउन प्लानिंग या बिज़नेस मैनेजमेंट, सोशल वर्क, फाइनेंस या रेविन्यू, एग्रीकल्चर या डेवलपमेंट कार्य का प्रोफ़ेशनल एक्सप्रीरिएंस हो.
2. दो मान्यता प्राप्त इस्लामिक स्कॉलर (एक शिया और एक सुन्नी) को सरकार नॉमिनेट करेगी.
3. ज्वाइंट सेकेट्री रैंक के एक मुस्लिम अफ़सर को सरकार नॉमिनेट करेगी.
इसके अलावा एक या अधिक से अधिक दो सदस्य (संसद सदस्य, विधान मंडल सदस्य) होंगे. दोनों का मुस्लिम होना अनिवार्य है. इसके अलावा राज्य के बार कौंसिल का एक मुस्लिम सदस्य और एक लाख रुपये प्रतिवर्ष की आय वाले वक़्फ़ के दो मुतवल्ली बोर्ड में शामिल होंगे. ये बोर्ड इलेक्शन के ज़रिए एक अध्यक्ष का चयन करेगा.
बता दें कि 2013 में एक्ट में किए गए संशोधन के मुताबिक़ केन्द्र या किसी राज्य सरकार का कोई मंत्री बोर्ड का सदस्य नहीं हो सकता. साथ ही बोर्ड में कम से कम दो महिला सदस्य होने चाहिए.
प्रस्तावित वक़्फ़ (संशोधन) विधेयक — 2024 के अनुसार:
किसी भी राज्य और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के लिए बोर्ड में राज्य सरकार द्वारा नामित सदस्य 11 से ज़्यादा नहीं होंगे, -
(a) एक अध्यक्ष;
(b) (i) एक संसद सदस्य;
(ii) राज्य विधानमंडल का एक सदस्य;
(c) मुस्लिम समुदाय से संबंधित निम्नलिखित सदस्य, अर्थात:
(i) वक़्फ़ का एक मुतवल्ली जिसकी वार्षिक आय एक लाख रुपये या उससे अधिक हो;
(ii) इस्लामी धर्मशास्त्र का एक प्रख्यात विद्वान;
(iii) नगर पालिकाओं या पंचायतों से दो या अधिक निर्वाचित सदस्य:
बशर्ते कि यदि उप-खंड (i) से (iii) में किसी भी श्रेणी से कोई मुस्लिम सदस्य उपलब्ध न हो, तो उप-खंड (iii) में श्रेणी से अतिरिक्त सदस्य नामित किए जा सकते हैं;
(d) दो व्यक्ति जिनके पास व्यवसाय प्रबंधन, सामाजिक कार्य, वित्त या राजस्व, कृषि और विकास गतिविधियों में पेशेवर अनुभव हो;
(e) राज्य सरकार का एक अधिकारी, जो उस राज्य सरकार के संयुक्त सचिव के पद से नीचे का न हो;
(f) संबंधित राज्य या संघ राज्य क्षेत्र की बार काउंसिल का एक सदस्य:
बशर्ते कि 35 खंड (ग) के तहत नियुक्त बोर्ड के दो सदस्य महिलाएं होंगी:
बशर्ते कि इस उपधारा के तहत नियुक्त बोर्ड के कुल सदस्यों में से दो ग़ैर-मुस्लिम होंगे:
बशर्ते कि बोर्ड में मुस्लिम 40 समुदायों में से शिया, सुन्नी और अन्य पिछड़े वर्गों से कम से कम एक सदस्य होगा:
बशर्ते कि बोहरा और अगाखानी समुदायों में से प्रत्येक का एक सदस्य बोर्ड में नामित किया जाएगा, यदि उनके पास राज्य या संघ राज्य क्षेत्र में कार्यात्मक औक़ाफ़ है:
बशर्ते कि वक़्फ़ (संशोधन) अधिनियम, 2024 के प्रारंभ होने पर पद धारण करने वाले बोर्ड के निर्वाचित सदस्य अपने कार्यकाल की समाप्ति तक पद पर बने रहेंगे.
प्रस्तावित वक़्फ़ (संशोधन) विधेयक — 2024 में यह भी कहा गया है:
— केन्द्रीय सरकार या, जैसा भी मामला हो, राज्य सरकार का कोई मंत्री बोर्ड के सदस्य के रूप में नामित नहीं किया जाएगा.
— संघ राज्य क्षेत्र की स्थिति में, बोर्ड में न्यूनतम पांच और अधिकतम सात सदस्य होंगे, जिन्हें केन्द्र सरकार द्वारा नामित किया जाएगा.
सरकार बार-बार कह रही है कि वक़्फ़ एक्ट में संशोधन का असल मक़सद ग़रीब मुसलमान और विशेष रूप से मुस्लिम महिलाओं को वक़्फ़ बोर्ड में शामिल कराना है. अब महिलाओं को तो 2013 में ही एक्ट में संशोधन करके शामिल कर लिया गया है. इस वक़्त जम्मू-कश्मीर वक़्फ़ बोर्ड की चेयर-पर्सन एक महिला हैं. कई राज्यों में महिलाएं वक़्फ़ बोर्ड संभाल चुकी हैं. दिल्ली में भी एक महिला वक़्फ़ बोर्ड को लीड कर चुकी हैं.
बाक़ी अब आप ज़रा, दोनों में तुलना करके बताइए कि सरकार गरीबों को किस तरह से वक़्फ़ में शामिल करेगी? आपको प्रस्तावित वक़्फ़ विधेयक से क्या समझ रहे हैं? आप इस बदलाव को कैसे देखते हैं? और हां, जब तक वक़्फ़ (संशोधन) विधेयक — 2024 इस देश में लागू नहीं हो जाता, तब तक के लिए अपने-अपने राज्यों में देखिए कि वक़्फ़ बोर्ड का क्या हाल है? बोर्ड में सदस्य कौन लोग हैं? क्या आप कभी वक़्फ़ बोर्ड के दफ़्तर में गए हैं? अगर हां, तो आपका क्या एक्सपीरिंयस रहा?
वक़्फ़ एक्ट —1995 के सेक्शन 32 के मुताबिक़, बोर्ड का कर्तव्य होगा कि वो वक़्फ़ एक्ट के तहत अपने अख़्तियारात (शक्तियों) का इस्तेमाल करें, जिससे यह सुनिश्चित हो जाए कि उसकी निगरानी में आने वाले औक़ाफ़ मुनासिब तरीक़े से मेंटेन, कंट्रोल और प्रशासित किया जाए और इसकी आमदनी का इस्तेमाल उन्हीं कामों में खर्च किया जाए, जिस मक़सद के तहत ये वक़्फ़ बना था.
वक़्फ़ बोर्ड का कर्तव्य:
1. रिकार्ड को मेंटेन रखना, जिसमें हर वक़्फ़ की शुरूआत, आमदनी, मक़सद और लाभार्थियों के बारे में जानकारी हो.
2. ये सुनिश्चित करना कि औक़ाफ़ की आमदनी और संपत्ति का इस्तेमाल वहीं हो रहा है, जिस मक़सद के लिए वो वक़्फ़ क़ायम किया गया था.
3. औक़ाफ़ के इंतज़ाम के लिए निर्देश देना.
4. किसी वक़्फ़ मैनेजमेंट के लिए स्कीम तय करना, लेकिन प्रभावित पक्षकारों को सुनवाई का अवसर दिए बिना ऐसा नहीं किया जाएगा.
5. किसी ऐसी सूरत में जहां किसी वक़्फ़ का मक़सद वजूद में नहीं रह पाया या वो मक़सद हासिल नहीं किया जा सकता, वहां आमदनी का इस्तेमाल गरीबों के फ़ायदे के लिए या मुस्लिम समाज में नॉलेज के प्रमोशन और लर्निंग के कामों पर इस्तेमाल किया जाए. परन्तु इस संबंध में कोई निर्देश प्रभावित पक्षकारों को सुनवाई का अवसर दिए बिना नहीं दिया जाएगा.
6. मुतवल्लियों द्वारा प्रस्तुत बजट की जांच-पड़ताल, मंज़ूरी और औक़ाफ़ के अकाउंट की ऑडिट का बंदोबस्त करना.
7. मुतवल्ली की नियुक्ती और उन्हें हटाने का अधिकार बोर्ड के पास होगा.
8. वक़्फ़ की खोई हुई सम्पत्तियों को पुनः हासिल करने के लिए उपाय करना.
9. अदालतों में औक़ाफ़ से संबंधित मामलों को ले जाना और बचाव करना.
10. वक़्फ़ एक्ट के तहत बनाए गए नियमों के अनुसार वक़्फ़ की किसी अचल संपत्ति के लीज के लिए मंजूरी देना. बशर्ते कि ऐसी कोई स्वीकृति तब तक नहीं दी जाएगी जब तक कि उपस्थित बोर्ड के सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत ने इस लीज़ के पक्ष में अपना वोट न दिया हो.
11. वक़्फ़ फंड का इंतज़ाम करना.
12. मुतवल्लियों से वक्फ की सम्पत्ति की रिटर्न्स, आंकड़े, अकाउंट और अन्य जानकारी मांगना, जिसकी बोर्ड को समय-समय पर ज़रूरत पड़ती हो.
13. वक़्फ़ सम्पत्ति, अकाउंट्स, रिकार्ड्स या इनसे संबंधित दस्तावेजों का निरीक्षण करना या निरीक्षण कराना.
14. वक़्फ़ और उस संपत्ति की प्रकृति और सीमा की जांच और निर्धारित करना, और जब भी ज़रूरी हो, वक़्फ़ संपत्तियों का सर्वेक्षण कराना
15. वक़्फ़ भूमि या भवन का बाज़ार किराया निर्धारित करना या निर्धारित कराना
16. वो सभी ऐसे काम करना, जो औक़ाफ़ के नियंत्रण, रख-रखाव और प्रशासन के लिए आवश्यक हो सकते हैं.
— प्रस्तावित वक़्फ़ (संशोधन) विधेयक — 2024 में वक़्फ़ एक्ट -1995 के सेक्शन 32 के सब-सेक्शन 2 के क्लॉज e को हटाने की बात की गई है. अब आईए जानते कि इस क्लॉज में आख़िर है क्या?
इस क्लॉज के तहत वक़्फ़ बोर्ड का काम है, निर्देश देना—
(i) वक़्फ़ की surplus income का उपयोग वक़्फ़ के उद्देश्यों के अनुरूप करना;
(ii) वक़्फ़ की अमदनी, जिसका उद्देश्य किसी लिखित दस्तावेज़ से स्पष्ट नहीं हैं, उसका उपयोग किस प्रकार किया जाएगा;
(iii) किसी ऐसे मामले में जहां वक़्फ़ का कोई उद्देश्य समाप्त हो गया है या हासिल करने में असमर्थ हो गया है, वक़्फ़ की उतनी आय जो पहले उस उद्देश्य पर लगाई जाती थी, किसी अन्य उद्देश्य पर लगाई जाएगी, जो मूल उद्देश्य के समान या लगभग समान होगी या गरीबों के लाभ के लिए होगी या मुस्लिम समुदाय में ज्ञान और शिक्षा को बढ़ावा देने के प्रयोजन के लिए होगी:
बशर्ते कि इस क्लॉज के अधीन कोई निर्देश प्रभावित पक्षों को सुनवाई का अवसर दिए बिना नहीं दिया जाएगा.
स्पष्टीकरण :—
इस खंड के प्रयोजनों के लिए, बोर्ड की शक्तियों का प्रयोग —
(i) सुन्नी वक़्फ़ के मामले में, बोर्ड के केवल सुन्नी सदस्यों द्वारा किया जाएगा; और
(ii) शिया वक़्फ़ के मामले में, बोर्ड के केवल शिया सदस्यों द्वारा:
बशर्ते कि जहां बोर्ड में सुन्नी या शिया सदस्यों की संख्या और अन्य परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए, बोर्ड को यह प्रतीत होता है कि शक्ति का प्रयोग केवल ऐसे सदस्यों द्वारा नहीं किया जाना चाहिए, वह ऐसे अन्य मुसलमानों को, जो सुन्नी या शिया हों, जैसा भी मामला हो, जैसा भी वह ठीक समझे, इस क्लॉज के तहत अपनी शक्तियों का प्रयोग करने के लिए बोर्ड के अस्थायी सदस्य के रूप में सहयोजित कर सकता है;
प्रस्तावित वक़्फ़ (संशोधन) विधेयक — 2024 में उपर लिखे क्लॉज की तमाम बातों को हटा दिया गया. यानी सरकार चाहती है कि आपके वक़्फ़ का पैसा कहीं और किसी काम में खर्च किया जा सके.
इतना ही नहीं, प्रस्तावित वक़्फ़ (संशोधन) विधेयक — 2024 में वक़्फ़ एक्ट -1995 के सेक्शन 32 के सब-सेक्शन 3 में दर्ज शब्द “और उस पर ट्रिब्यूनल का निर्णय अंतिम होगा” को भी हटाने की बात की है.
बता दे कि वक़्फ़ एक्ट -1995 के सेक्शन 32 के सब-सेक्शन 3 में लिखा है, — “जहां बोर्ड ने सब-सेक्शन 2 के क्लॉज d के अधीन प्रबंधन की कोई योजना तय कर दी है या क्लॉज e के अधीन कोई निर्देश दे दिया है, वहां वक़्फ़ में हितबद्ध या ऐसे समझौते या निर्देश से प्रभावित कोई व्यक्ति ऐसे समझौते या निर्देश को रद्द करने के लिए ट्रिब्यूनल में वाद संस्थित कर सकता है और उस पर ट्रिब्यूनल का निर्णय अंतिम होगा.” यानी प्रस्तावित वक़्फ़ (संशोधन) विधेयक — 2024 में ट्रिब्यूनल की अहमियत को पूरी तरह से ख़त्म कर दिया गया है.
आइए, ये समझ लीजिए कि सब-सेक्शन 2 के क्लॉज d में है क्या? इस क्लॉज में साफ़ तौर लिखा है कि वक़्फ़ बोर्ड को ये अधिकार होगा कि वो “वक़्फ़ के लिए प्रबंधन की योजनाएं तय कर सके” यानी अब सरकार वक़्फ़ बोर्ड से ये अधिकार भी छिनना चाहती है. बाक़ी सब-सेक्शन 2 के क्लॉज e की बातें आप उपर पढ़ चुके हैं.
ऊपर हमने ये समझने की कोशिश की थी कि वक़्फ़ बोर्ड के पास क्या पावर है और काम कैसे करती है? उनका कर्तव्य क्या है? आज हम ये समझने की कोशिश करेंगे कि वक़्फ़ बोर्ड किन मेम्बरों को अयोग्य मानकर उसे हटा सकता है?
वक़्फ़ एक्ट -1995 की धारा 16 के तहत ये लोग वक़्फ़ बोर्ड के मेम्बर नहीं हो सकते :
1. अगर मुस्लिम नहीं हैं और उसकी उम्र 21 साल से कम है.
2. अगर किसी शख़्स के बारे में पाया जाता है कि वो विकृत दिमाग़ का है.
3. अगर वह अनुन्मोचित दिवालिया है.
4. अगर उसे किसी नैतिक अधमता (moral turpitude) वाले अपराध के लिए दोषी ठहराया गया है और वो इस दोष से मुक्त नहीं हुआ है या उसे इस अपराध के लिए पूर्ण रूप से माफ़ नहीं किया है.
5. अगर उसे किसी वक़्फ़ संपत्ति पर अतिक्रमण का दोषी ठहराया गया है.
6. अगर उसे पहले कभी वक़्फ़ बोर्ड के सदस्य या मुतवल्ली के रूप में अपने पद से हटा दिया गया हो, या मिस-मैनेज़मेंट या करप्शन की वजह से किसी सक्षम न्यायालय या ट्रिब्यूनल के आदेश से किसी भी विश्वास के पद से हटा दिया गया है.
प्रस्तावित वक़्फ़ (संशोधन) विधेयक — 2024 में एक छोटी सी तब्दीली की गई है. इसमें कहा गया है कि वक़्फ़ एक्ट -1995 के सेक्शन 16 के क्लॉज d बदला जाएगा. अब इस क्लॉज के तहत अगर किसी व्यक्ति को “किसी अपराध के लिए दोषसिद्ध किया गया है और कम से कम दो वर्ष के कारावास की सज़ा दी गई है;” तो वो व्यक्ति वक़्फ़ बोर्ड का मेम्बर नहीं हो सकता.
ऊपर हमने ये जाना कि कौन से लोग वक़्फ़ बोर्ड के मेम्बर नहीं हो सकते. अब हम ये समझने की कोशिश करेंगे कि वक़्फ़ बोर्ड के निर्देशों को लागू करने के लिए डिस्ट्रिक मजिस्ट्रेट, अडिश्नल डिस्ट्रिक मजिस्ट्रेट या सब-डिवीज़नल मजिस्ट्रेट के क्या अख़्तियार है?
वक़्फ़ एक्ट -1995 के सेक्शन 28 के मुताबिक़, वक़्फ़ एक्ट के प्रावधानों और इसके तहत बनाए गए नियमों के अधीन राज्य में डिस्ट्रिक मजिस्ट्रेट, या इनकी ग़ैर-हाज़िरी में अडिश्नल डिस्ट्रिक मजिस्ट्रेट या सब-डिवीज़नल मजिस्ट्रेट, बोर्ड के फ़ैसलों के लागू कराने के लिए ज़िम्मेदार होगा. वक़्फ़ बोर्ड अपने चीफ़ एक्जीक्यूटिव ऑफ़िसर के ज़रिए जब कभी भी ज़रूरी समझे, अपने निर्णयों के कार्यान्वयन के लिए ट्रिब्यूनल से निर्देश मांग सकता है.
प्रस्तावित वक़्फ़ (संशोधन) विधेयक — 2024 में सेक्शन 28 पर कोई बात नहीं की गई है.
ऊपर हमने ये समझने की कोशिश की थी कि वक़्फ़ बोर्ड के निर्देशों को लागू करने के लिए डिस्ट्रिक मजिस्ट्रेट, अडिश्नल डिस्ट्रिक मजिस्ट्रेट या सब-डिवीज़नल मजिस्ट्रेट के क्या अख़्तियार है?
अब हम बात करेंगे कि वक़्फ़ एक्ट —1995/2013 की धारा 40 की. हिन्दुत्व संगठनों का लैंड जिहाद का झूठा प्रोपगंडा इसी धारा 40 की बुनियाद पर इस देश में फल-फूल रहा है. वक़्फ़ एक्ट को ख़त्म कराने की कोशिश में लगे हिन्दुत्व नेता इस धारा 40 को बेहद ही ख़तरनाक बताते हैं. उनका कहना है कि “ये धारा बोर्ड को किसी की भी कोई भी संपत्ति पर क़ब्ज़ा करने का अधिकार देती है. क्योंकि धारा 40 के तहत बोर्ड के कोई भी दो सदस्य देशभर में किसी की भी संपत्ति को वक़्फ़ संपत्ति घोषित कर सकते हैं. इसके लिए उन्हें कोई सबूत पेश करने की ज़रूरत नहीं है. वे दोनों सदस्य ज़िला मजिस्ट्रेट या किसी ज़िम्मेदार अधिकारी को 24 से 72 घंटे के भीतर ख़ाली करने का आदेश दे सकते हैं. डरावनी बात यह है कि हाई कोर्ट में ऐसे मामलों की सुनवाई नहीं हो सकती. इससे भी बड़ी बात यह है कि पीड़ितों को इसके खिलाफ याचिका लेकर वक्फ बोर्ड के ट्रिब्यूनल में ही जाना होगा.”
ख़ैर, ये उनका काम है वो जाने, हमारा काम ये समझना है कि वक़्फ़ एक्ट इस बारे में क्या कहता है?
वक़्फ़ एक्ट —1995/2013 की धारा 40 कहता है अगर कोई संपत्ति वक़्फ़ है:
(1) बोर्ड स्वयं किसी ऐसी संपत्ति के बारे में सूचना एकत्र कर सकता है जिसके बारे में उसके पास यह विश्वास करने का कारण है कि वह वक़्फ़ संपत्ति है और यदि कोई प्रश्न उठता है कि क्या कोई विशेष संपत्ति वक़्फ़ संपत्ति है या नहीं या कोई वक़्फ़ सुन्नी वक़्फ़ है या शिया वक़्फ़, तो वह ऐसी जांच करने के पश्चात्, जैसा वह ठीक समझे, उस प्रश्न का निर्णय कर सकता है.
(2) उपधारा (1) के अधीन किसी प्रश्न पर बोर्ड का निर्णय, जब तक कि ट्रिब्यूनल द्वारा उसे वापस नहीं ले लिया जाता या संशोधित नहीं कर दिया जाता, अंतिम होगा.
(3) जहां बोर्ड के पास यह मानने का कोई कारण है कि भारतीय ट्रस्ट अधिनियम, 1882 (1882 का 2) या सोसाइटी पंजीकरण अधिनियम, 1860 (1860 का 21) या किसी अन्य अधिनियम के अधीन पंजीकृत किसी ट्रस्ट या सोसाइटी की कोई संपत्ति वक्फ़ संपत्ति है, वहां बोर्ड ऐसे अधिनियम में किसी बात के होते हुए भी ऐसी संपत्ति के संबंध में जांच कर सकता है और यदि ऐसी जांच के बाद बोर्ड को यह विश्वास हो जाता है कि ऐसी संपत्ति वक़्फ़ संपत्ति है, तो वह ट्रस्ट या सोसाइटी, जैसी भी स्थिति हो, से कह सकता है कि वह या तो ऐसी संपत्ति को इस अधिनियम के अधीन वक़्फ़ संपत्ति के रूप में पंजीकृत करे या कारण बताए कि ऐसी संपत्ति को इस प्रकार पंजीकृत क्यों न किया जाए:
बशर्ते कि ऐसे सभी मामलों में इस उपधारा के अधीन की जाने वाली प्रस्तावित कार्रवाई की सूचना उस प्राधिकारी को दी जाएगी जिसके द्वारा ट्रस्ट या सोसाइटी को पंजीकृत किया गया था.
(4) बोर्ड, उपधारा (3) के अधीन जारी किए गए नोटिस के अनुसरण में दर्शाए गए कारणों पर सम्यक् रूप से विचार करने के पश्चात् ऐसे आदेश पारित करेगा, जो वह ठीक समझे और बोर्ड द्वारा इस प्रकार किया गया आदेश अंतिम होगा, जब तक कि उसे न्यायाधिकरण द्वारा वापस नहीं ले लिया जाता या उसमें परिवर्तन नहीं कर दिया जाता.
इस प्रकार वक़्फ़ अधिनियम की धारा 40 बोर्ड को वक़्फ़ संपत्तियों की वैधता और प्रामाणिकता तय करने का अधिकार देती है और यह वक़्फ़ के संदर्भ में बहुत महत्वपूर्ण है और इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि यह धारा केवल वक़्फ़ संपत्तियों पर लागू होती है.
प्रस्तावित वक़्फ़ (संशोधन) विधेयक — 2024 में इस धारा 40 को पूरी तरह से हटाने की बात कही गई है.
ऊपर हमने वक़्फ़ एक्ट —1995/2013 की धारा 40 के बारे में बात की थी, अब धारा 41 को समझने की कोशिश करते हैं. ये धारा वक़्फ़ बोर्ड को वक़्फ़ का पंजीकरण कराने तथा रजिस्टर में संशोधन करने की शक्ति देता है.
इसके तहत बोर्ड किसी मुतवल्ली को वक़्फ़ के पंजीकरण के लिए आवेदन करने, या वक़्फ़ के बारे में कोई जानकारी देने का निर्देश दे सकता है या स्वयं वक़्फ़ का पंजीकरण करा सकता है या किसी भी समय औक़ाफ़ के रजिस्टर में संशोधन कर सकता है.
प्रस्तावित वक़्फ़ (संशोधन) विधेयक — 2024 में इस धारा पर कोई बात नहीं की गई है.
नोट: वक़्फ़ से संबंधित आपके ज़ेहन में कोई सवाल है तो पूछ सकते हैं. और ये ज़रूर बताएं कि इस पोस्ट को पढ़ने के बाद आपको क्या समझ आया?
- Afroz Alam Sahil
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24/08/2024
Salute 🫡
बबलू की कहानी एक ऐसी दिल को छू लेने वाली दास्तान है, जो संघर्ष, प्यार, और जिम्मेदारी की अनोखी मिसाल पेश करती है। 😢💔 बबलू, जो एक साधारण रिक्शा चालक हैं, उनकी जिंदगी उस वक्त पूरी तरह बदल गई जब उनकी पत्नी ने बेटी दामिनी को जन्म दिया। लेकिन इस खुशी के पल के साथ ही एक बड़ी त्रासदी आई, जब दामिनी की मां ने जन्म के तुरंत बाद इस दुनिया को अलविदा कह दिया। अब बबलू पर न केवल अपनी बेटी की परवरिश की जिम्मेदारी थी, बल्कि उसे मां का प्यार देने का भी कर्तव्य निभाना था। 👶❤️
बबलू ने एक अनोखा फैसला लिया—अपनी नन्ही सी बेटी को गले में लटकाकर रिक्शा चलाने का। यह दृश्य जिसने भी देखा, उसका दिल पिघल गया। दामिनी को अपने गले में बांधे हुए, बबलू दिन-रात शहर की सड़कों पर रिक्शा चलाते नजर आते हैं। उनकी मेहनत का एक ही उद्देश्य है—यह सुनिश्चित करना कि उनकी बेटी को किसी चीज की कमी न हो। 💪🚴♂️
बबलू की जिम्मेदारी केवल आर्थिक ही नहीं, बल्कि भावनात्मक भी है। वे दामिनी के जीवन को बेहतर बनाने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने न सिर्फ अपनी बेटी को भोजन और कपड़े दिए, बल्कि उसे वह मां का प्यार भी देने की कोशिश की, जो उसकी मां नहीं दे सकी। 🌸👨👧
बबलू की संघर्षभरी यह कहानी हमें यह सिखाती है कि माता-पिता का प्यार और समर्पण कितना गहरा और सच्चा होता है। बबलू ने अपने जीवन को पूरी तरह से अपनी बेटी के लिए समर्पित कर दिया है, और उन्होंने हर कठिनाई का सामना करते हुए अपने कर्तव्यों को निभाया है। उनकी यह कहानी न केवल प्रेरणा देती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि सच्चा प्यार और जिम्मेदारी किसी भी मुश्किल का सामना कर सकती है और कभी हार नहीं मानती। 🌟
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15/08/2024