Quantum Reiki
रेकी चिकित्सक, म्यूजिक थैरेपी, कलर थैरेपी, भजन गायक
11/02/2026
https://youtu.be/4Pj6KSoRnkQ?si=GNKP-cIAR0vItMV2🌄 #प्रार्थना की तरह भजन भी धन्यवाद-ज्ञापन मात्र है?
प्रार्थना बीज है, भजन वृक्ष। प्रार्थना अप्रकट है, भजन प्रकट। भजन नाचती हुई प्रार्थना है, गाती हुई प्रार्थना है। भजन अभिव्यक्ति है प्रार्थना की।
अगर प्रार्थना देखनी है, तो तुम्हें महावीर और बुद्ध में दिखाई पड़ेगी; अगर भजन देखना है तो मीरा और चैतन्य में। #बुद्ध और महावीर में जो भीतर सम्हला हुआ है, मीरा और #चैतन्य में बाहर बह गया है। बुद्ध और महावीर में जो थिर है, मीरा और चैतन्य में नाच उठा है। भजन प्रार्थना की अभिव्यंजना है।
ऐसा समझो कि तुम्हें किसी के प्रति प्रेम है। तुम इसे भीतर भी रख सकते हो, कोई जरूरत नहीं कहने की। कभी तुम ऐसा न भी कहो कि मुझे तुझसे प्रेम है, तो भी चलेगा; तुम भीतर ही भीतर रख सकते हो, सम्हाले रखते हो। अक्सर स्त्रियां किसी को कहती नहीं कि उन्हें प्रेम है; सम्हाल कर रखती हैं। है--कहना क्या; होना काफी है। लेकिन कभी प्रेम प्रकट भी होता है--कभी गीत में, कभी हाथ के स्पर्श में, कभी आंख की भाव-व्यंजना में, कभी मौन में भी। लेकिन जब भी प्रकट होता है, तब फूल खिल जाते हैं; बीज बीज नहीं रह जाता। दोनों सुंदर हैं।
दो तरह के लोग हैं दुनिया में। कुछ लोग हैं, जिन्हें प्रार्थना काफी है; कहने की कोई जरूरत नहीं है; जो अपने शून्य में और #मौन में परमात्मा को साध लेंगे। फिर दूसरे तरह के लोग भी हैं: जिनको इतना काफी न होगा; जब तक काफी से ज्यादा न हो जाए, उन्हें काफी न होगा; जब तक उनके ऊपर से जलधार बहने न लगे; जब तक उनकी प्याली इतनी लबालब न हो जाए कि बंटने लगे, बाहर उलिचने लगे, तब तक काफी न होगा।
मीरा नाच उठती है; बुद्ध के प्याले से जो छलकता नहीं, मीरा से छलक जाता है। दोनों शुभ हैं।
तुम अपनी #प्रकृति को पहचानना। अगर तुम भीतर रखना चाहो, कोई हर्जा नहीं है; लेकिन अगर बांटना चाहो, तो भी कोई हर्जा नहीं है। और दोनों में मैं कोई तुलना नहीं करता। बीज भी सुंदर है, क्योंकि फूल उसी से आता है; और फूल भी सुंदर है, क्योंकि फिर बीज बन जाते हैं। दोनों जुड़े हैं।
अभिव्यक्ति-अनभिव्यक्ति दोनों जुड़े हैं; प्रकट-अप्रकट दोनों जुड़े हैं। तुम अपनी प्रकृति को खोज लेना; तुम्हें जो रुचिकर लगे। लेकिन ध्यान रखना, भजन #अभिव्यक्ति है, प्रार्थना मौन है।
पूछा है कि क्या प्रार्थना की तरह भजन भी धन्यवाद-ज्ञापन मात्र है?
नहीं। #प्रार्थना धन्यवाद है, भजन #अहोभाव। प्रार्थना कहती है: जो दिया, वह बहुत है; जो दिया, उससे संतोष है; जो दिया, उससे गहन #तृप्ति है। लेकिन भजन कहता है: जो दिया, वह जरूरत से ज्यादा है; उसे बांटना है; वह सम्हलता नहीं, सम्हाले नहीं सम्हलता; उसे लुटाना है। भजन #नाचता है, कहता नहीं; #भजन #बोलता है, अनबोला नहीं है। भजन का अपना सौंदर्य है।
प्रार्थना न गाया हुआ गीत है; #चित्र है, #चित्रकार के मन में छिपा, कैनवस पर नहीं आया; मूर्ति है पत्थर में दबी, अभी छैनी से काटी नहीं गई, प्रकट नहीं हुई।
भजन प्रकट मूर्ति है। पत्थर काटा गया है, छैनी ने काम कर दिया है। भजन गाया हुआ गीत है।
रवींद्रनाथ मरे। मरने के दो दिन पहले एक मित्र मिलने आया और उसने कहा कि चिंतित होने की तो कोई जरूरत नहीं, तुम्हारा जीवन तो सफलता का जीवन था। पुराने साथी हैं दोनों; बचपन के मित्र हैं; दोनों बूढ़े हो गए हैं। दूसरे ने कहा कि तुम तो शांति से मर सकते हो, दुख से मरें तो हम--कुछ पाया नहीं, ऐसे ही गंवा दिया जीवन। तुमने इतने गीत गाए! छह हजार गीत #रवींद्रनाथ # ने गाए। कहते हैं, इतने गीत संसार में किसी कवि ने नहीं गाए। पश्चिम में महाकवि शैली का नाम है, पर उसके भी गीत तीन हजार हैं। रवींद्रनाथ के गीत छह हजार हैं। और छह हजार ही गीत संगीत में बांधे जा सकते हैं। नोबल पुरस्कार तुम्हें मिला, उस बूढ़े ने कहा; तुम सब तरह से सम्मानित हुए, तुम शांति से मर सकते हो; अशांति से मरें हम; तुम तो विदा हो सकते हो; तुम #परमात्मा # को #धन्यवाद # दे सकते हो।
रवींद्रनाथ यह सब सुनते रहे, फिर उन्होंने कहा कि सुनो, मैं जो गीत गाना चाहता था, वह अभी तक गा नहीं पाया; वह अभी भी मेरे भीतर बीज की तरह पड़ा है। वे जो छह हजार मैंने गाए, वे मेरी असफल चेष्टाएं हैं उस एक #गीत # को गाने के लिए। वह जो गीत मेरे भीतर बीज की तरह पड़ा है, उसको गाने के लिए मैंने चेष्टाएं की हैं, हर बार असफल हुआ हूं। तुमने उन गीतों में कुछ पाया होगा, मेरी वे असफलता की कथाएं हैं। और मेरा गीत अभी गाया गया नहीं है, अभी मैं बिनगाया पड़ा हूं।
अगर तुम्हें बुद्ध की भांति चुप बैठ जाना, मौन में डूब जाना, कि अंग भी न हिले...
बुद्ध और #महावीर की प्रतिमाएं संगमरमर की हमने बनाईं, अकारण नहीं। वे ऐसे ही संगमरमर जैसे बैठे थे। वे जब थे मौजूद, तब भी निष्कंप थे। अब मीरा की प्रतिमा तुम संगमरमर में बनाओ, जंचेगी न। बनाई है लोगों ने, जंचती नहीं। अगर मीरा की प्रतिमा बनानी हो तो जल की बनानी पड़ेगी; वह बनती नहीं--नाचती हुई, तरल--ठहरी हुई नहीं।
#मीरा # एक गति है; एक भावभंगिमा है; एक नृत्य है।
महावीर एक ठहराव हैं। महावीर एक सरोवर हैं, जहां तरंग भी नहीं उठती।
मीरा एक जलधार है पर्वत से गिरती--जलप्रपात है; जहां बूंद-बूंद नाच रही है।
बड़े भेद हैं, पर भेद मार्ग के हैं। अंततः सरोवर भी सूरज की किरणों पर चढ़ कर आकाश में खो जाता है और नदी भी समुद्र में गिर कर सूरज की किरणों पर चढ़ कर आकाश में खो जाती है।
मंजिल एक है, मार्ग अलग हैं। मंदिर एक है, द्वार अनेक हैं। अपना द्वार चुन लेना, दूसरे का अनुकरण मत करना।
अनुकरण करने से #संप्रदाय #पैदा होता है, स्वभाव के अनुकूल चलने से धर्म।
🧡 #ओशो💛
भज #गोंविंदम #मुढ़मते (आदि #शंक्राचार्य) प्रवचन--04
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04/12/2025
https://youtu.be/i8vOkWxgSD0?si=gvbgWZNc1L73eEHp🌅आज बात करते हैं, कि क्षत्रिय क्या हैं,और क्या है इनका इतिहास.
वैसे हमारे कुछ विरोधी शुरू से ही हमारा इतिहास विकृत करने के लिए, जलनवश , #रामायण ,महाभारत को कल्पना कहते आये हैं,पर ये हमारा स्वर्णिम प्राचीन इतिहास है. जिसके साक्ष्य आज भी जिंदा हैं..
क्षत्रिय वो है, जिसने पोरस के रूप में सिकन्दर को भारत से खदेड़ दिया था.।
जिस इस्लाम ने 45 वर्षो में 90 देशों को #इस्लामिक बना लिया था,उसको भारत मे घुसने में 500 साल लगे, सिर्फ इन क्षत्रियों की वजह से..
क्षत्रिय वो हैं, जिसने दुनिया के सबसे बड़े किले बनवाये,जिसके #आर्किटेक्चर को देखने दुनिया से लोग भारत आते हैं..जिसमे #चितौड़गढ़, #कुम्भलगढ़ #, ग्वालियर फोर्ट, #खजुराहो जैसे अविश्वसनीय विशालकाय स्थल हैं..
क्षत्रिय वो हैं,जिससे बचने के लिए महमूद गजनवी ने सोमनाथ लूट के बाद #रेगिस्तान का रास्ता चुना,वो अज़मेर के चौहानों से भय खाता था...
क्षत्रिय वो हैं जिन्होंने तराइन में गौरी को हराकर जीवन दान दिया. और इसी गौरी को #भीमदेव सोलंकी ने भी गुजरात से मारकर भगाया था.
क्षत्रिय वो हैं, जिन्होंने हमीर सिंह #सिसोदिया के रूप में सिंगोली युद्ध मे मोहम्मद विन तुगलक को धूल चटाई थी. और बन्दी बनाकर रखा .
क्षत्रिय वो हैं,जिन्होंने इल्तुतमिश जैसे आक्रांता को कई बार अपने क्षेत्रों से भगाया .
क्षत्रिय वो हैं, जिसने अलाउदीन खिलजी जैसे क्रूर आक्रांता के आगे हार नही मानी, लाखो #क्षत्रिय मरे और मारा भी.
क्षत्रिय वो हैं, जिसने राणा कुम्भा के रूप में भारत को एक महान आर्किटेक्ट दिया,जिसने अपने जीवनकाल में 32 दुर्गों का निमार्ण कराया, जिसमे विश्व की सबसे बड़ी दीवार, #कुम्भलगढ़ की दीवार भी शामिल है.
ये वही राणा कुम्भा हैं, जिन्होंने गुजरात और मालवा के सुल्तान को हराकर, विजयस्तम्भ का निर्माण कराया था...
क्षत्रिय वो है,जिसने डूबते भारत के अस्तित्व को राणा सांगा के रूप में आखिरी उम्मीद को जन्म दिया, जिसने इब्राहिम लोधी, और बाबर जैसे शासक को धूल चटाई थी...
क्षत्रिय वो है, जिसकी बजह से इसी दौर में विजयनगर व उड़ीसा जैसे सम्राज्य में केसरिया लहराता रहा.
क्षत्रिय वो है जिसने #कलिंजर युद्ध मे शेर शाह शूरी को रौंद डाला था..और वो मारा गया. ये वही शेरशाह शूरी है जिसने गिरी-सुमेल के युद्ध के बाद क्षत्रियोँ के लिए कहा था,की एक मुट्ठी बाजरे के खातिर मैं अपनी सल्तनत खो देता. इस युद्ध मे 6000 राजपूतो का सामना 80 हज़ार अफगानों से था.
क्षत्रिय वो हैं, जिसने गुलाम होते भारत मे एक बार फिर एकलौती किरण को जन्म दिया था, #महराणा प्रताप के रूप में, जिसने भारत का मान रखा, ये एकलौता ऐसा राजा था देश का जो अकबर के सामने नही झुका, और तो और हल्दीघाटी, दिवेर जैसे युद्ध मे अकबर को धूल भी चटाई .
क्षत्रिय वो है, जिसने #बुंदेलखंड से छत्रसाल के रूप में औरंगजेब को खदेड़ा, और बुंदेलखंड को स्लाम मुक्त कराया .
क्षत्रिय वो है जिसने खालसा धर्म की रक्षा की ,वीर बंदा बहादुर व बज्जर सिंह #राठौड़ के रूप में .
क्षत्रिय वो है, जो लद्दाख को, लड़कर भारत के नक्से में लाये,जनरल जोरावर सिंह जैसे रूप में.
क्षत्रिय वो हैं,जिन्होंनें अग्रेंजो के खिलाफ सबसे बड़ा मोर्चा लिया, बाबू कुंवर सिंह, ठाकुर कुशाल सिंह आउआ,राम प्रसाद विस्मिल,ठाकुर रोशन सिंह,महावीर सिंह राठौड़ जैसे सैकड़ो महान क्रांतिकारियों के रूप में . या फिर प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के सैनिकों के रूप में ...
क्षत्रिय वो हैं जिन्होंने 19वी सदी में भी,7 समुन्द्र पार जाकर विदेशी ताकतों से #राकेशइजरायल को आजाद कराया, #जोधपुर लांसर के रूप में, वो भी तब जब तलवारों का मुकाबला ,मशीनगन से था..इजरायल आज भी हमे सम्मान देता है.
क्षत्रिय वो हैं, जो इस जनतन्त्र में भी सबसे ज्यादा शहीद होने वाली कौम है, सेना में सबसे ज्यादा वीरता मैडल इन्ही राजपूतो के पास हैं यंहा तक कि 5 परमवीर चक्र..
क्षत्रिय वो हैं जो थार रेगिस्तान में भी महल बनादे, जो आज 900 साल बाद भी हमारे इतिहास की गवाही देता है, रेगिस्तान में बना जैसलमेर महल , दुनिया के लिए एक अजूबा है..
क्षत्रिय वो है जिसने आधुनिक भारत को सबसे बड़ा खगोलशास्त्री दिया,सवाई जय सिंह जी जिन्होंने जंतरमंतर नाम की दुनिया की सबसे बड़ी खगोल वैधशाला बनाई.
क्षत्रिय वो है जो आज भी भारत को सम्मान दिलाते हैं, भारत के 3 शहर जयपुर,जोधपुर, उदयपुर किसी ना किसी बजह से भारत का नाम दुनिया मे रोशन करते रहते हैं..
क्षत्रिय वो है जिसकी बजह से आज भी भारत को सबसे ज्यादा टूरिस्ट रेवन्यू व रोजगार मिला हुआ है, भारत मे सबसे ज्यादा टूरिस्ट राजस्थान में ही आता है, वो भी सिर्फ इन क्षत्रियो द्वारा बने शहरों,नगरों,महलों को देखने, इसी टूरिज्म से पूरे राजस्थान में लाखों लोगों का जीबन यापन होता है...इसकी कड़ी में मध्यप्रदेश, गुजरात भी है..यंहा भी 80% टूरिज्म इन्ही क्षत्रियोँ की देन है..
क्षत्रिय वो हैं जो आज भी सनातनधर्म की परम्परा की झलक पूरे विश्व को दिखाते हैं.
विदेशी शासक कहते हैं,की ऐसे राजपूत योद्धा मेरी सेना में हों तो मैं संसार को जीत लेता।
एसे हजारों हजार प्रमाण भरे हैं अतित में। क्षत्रियों की वीरता और शौर्यगाथाओं का गुणगान कंहा तक और कितना किया जाए क्यूंकि ये महानता का वो अथाह सागर है जो कि युगों युगों से बहता आ रहा है। शायद इस सृष्टि के प्रारम्भ से ही।तो फिर क्यूं न गर्व करे हम अपने रक्त पर क्यूं भुल गए हम अपनी रक्त शक्ति को क्यूं गुलाम हो रहें हैं हम आज राजनीतिक दलों के । विचार अवश्य करें 🙏
कृतिका जी वॉल से
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15/10/2025
https://youtu.be/nIJEdmsxDkQ?si=JGee1JMjVwLRQ_s3🌅मां अजस्ता जी के संचालन में हाटपिपल्या अद्भुत ओशो ध्यान शिविर परस्पर गार्डन फूटी कोठी इंदौर*
ध्यान शिविर में विभिन्न स्थानों से ओशो मित्रो की उपस्थिति ने हमारे दिलो में एक नई रोशनी का संचार किया है।आपके चरणों की धूल ने हमारे आयोजन को एक अद्वितीय और अविस्मरणीय बना दिया है।आपकी अभिसिंचित ऊर्जा,आपकी मुस्कान ने हमारे बीच एक नई ऊर्जा का स्त्रोत खोलकर हमे मजबूत और एक जुट बनाया हे।
आपके सकारात्मक सहयोग और समर्थन के लिए🥀फ्रेंड्स ऑफ ओशो हाटपिपल्या 🥀आपको हृदय से कृतज्ञता व्यक्त करता है। आपकी उपस्थिति ने हमें यह महसूस कराया है, की हम एक दूसरे के साथ जुड़े हुवे है।हमारे बीच एक अद्वितीय संबंध हैं,जिसे कभी भुला नहीं सकते है।
आपकी गरिमामय उपस्थिति ने,,ओशो शिविर,को सुंदर सूर्योदय की तरह बना दिया।आप लोगो की कृपा से एक नई आशा की किरण के साथ उत्साह का संचार हुआ है।
आपकी सुंदर मुस्कान से हमारे मुरझाए चेहरों को सुंदर फूल की तरह खिला दिया है।
*इस अद्भुत और सुंदर आयोजन में समस्त ओशो प्रेमियों व मा प्रेम अजास्ता जी की भागीदारी ने ,,ओशो शिविर,,को सफल विस्मृणीय बनाया इस हेतु आपके लाड़,दुलार,प्यार,स्नेह,ओर समर्थन के लिए हम हमेशा कृतज्ञ रहेंगे,ओर आशा करते हे की भविष्य में हमारा आमंत्रण स्वीकार करने में संकोच नही करेगे।*
*👣👏गलती हमसे 100% हुई होगी,इसलिए सुझाव,मार्गदर्शन स्वीकार्य है।*
*आपका*
*शुभचिंतक*
*✍️वीतराग*
🌅🌎🌠
ये सारी घटनाएं 1960 से 1989 तक के बीच की होगी
तो इस में घुसने से पहले पढ़ने से पहले
❌दिमाग और जूते बाहर ही उतार दे❌
“भगवान श्री रजनीश ईसा मसीह के बाद सर्वाधिक खतरनाक व्यक्ति हैं। "
(हालांकि इसमें मेरी अस्वीकृति है)
ये भविष्यसूचक शब्द इस वर्ष के प्रारंभ में कहे थे टॉम रॉबिन्स ने, जो “अमरीका के सर्वश्रेष्ठ जीवित साहित्यिक
लेखकों में एक” गिने जाते हैं। उस समय उन्हें इस बात का पता नहीं था लेकिन भविष्य में कुछ
ऐसी घटनाएं घटनेवाली थीं, जो इस अतिशयोक्तिपूर्ण दिखाई देनेवाले वक्तव्य का समर्थन करने
वाली थीं। वे आगामी घटनाएं दिखानेवाली थीं कि विश्व का हर प्रमुख शासन भगवान श्री
रजनीश से भयभीत था ।
क्यों?
भगवान श्री रजनीश कौन हैं?
और वे इतने असामान्य रूप से अंतर्राष्ट्रीय विवादास्पद व्यक्ति किस तरह बन गए?
वस्तुतः उन्हें खतरनाक कहने वाले टॉम रॉबिन्स पहले व्यक्ति नहीं थे। यह ख्याति उन्हें बहुत
पहले छठे दशक में भारतीय पत्रकारों द्वारा प्राप्त हुई थी, जब वे विश्वविद्यालय में दर्शन के
एक
प्राध्यापक थे और सेक्स, धर्म तथा राजनीति संबंधी अपने क्रांतिकारी और स्पष्टवादी विचारों से
अतिशय रूढ़िवादी भारतीय जनता को क्रुद्ध कर चुके थे।
सातवें दशक के उत्तरार्ध में पाश्चात्य पत्रकार उनकी ओर आकृष्ट हुए और उन्होंने भी अपने
विशेषण जोड़ दिए। लेकिन, लगभग निरपवाद रूप से, उनमें से जो भी पूना के उनके आश्रम में
गए और उन्हें सुना, वे लोग अपने भारतीय समकक्षों से कहीं अधिक विवेकपूर्ण थे। जब वे
पश्चिम वापिस लौटे तो “असाधारण”, “विलक्षण", "गहन रूप से प्रभावित करने वाले",
“अत्यंत विचलित करने वाले" और "अत्यंत चित्ताकर्षक" जैसे विशेषण अपने साथ ले गए।
पाश्चात्य प्रसार-माध्यम के सारे रूप यहां आए, और समीक्षाएं कीं। 1977 में “वोग” पत्रिका
की जीन लिएल ने उनके लिए कहा, “वे एक सौम्य, करुणामय और समूचे अखण्डित व्यक्ति...
अत्यंत अनुप्राणित, अत्यंत सुशिक्षित... और विशद व गहन जानकारी रखनेवाला ऐसा वक्ता मैंने
पहले कभी और कहीं नहीं सुना। जर्मन "कॉस्मॉपॉलिटन' मैगजीन की फ्लॉरेन्स गाल ने उनका
वर्णन “करिश्मापूर्ण” कहकर किया, ऐसे जैसे एविता पेरॉन, मार्टिन लूथर किंग, जॉन एफ. केनेडी
और पोप जॉन-तेईसवें। 1979 में दूरदर्शन के निष्ठुर आलोचक अलन विकर ने अपने कार्यक्रम
"
"विकर्स वर्ल्ड" में कहाः "वे बहुत सुंदर हैं... बोलते वक्त वे बहुत ही प्रभावशाली लगते हैं
डच "पैनोरमा" मेगजीन के मार्सेल मियेर, जो 1978 में पूना आए थे, की दृष्टि में वे "मनोविज्ञान
के आचार्य और परम बुद्धिमान" थे। उन्होंने आगे कहा, "ऐसा व्यक्ति मैंने सिर्फ किताबों में देखा
था, वास्तव में नहीं।
"अरगेंटिनिशेस टेल्लाट" की मेरीलुइज़ एलेमन ने 1980 में लिखा,
“पूरबेतर देशों के लोगों के मन में "भारत" अथवा "गुरु" शब्द सुनते ही बेखटके जो छवि
उभरती है, स्पष्टतः उस सौम्य पवित्र व्यक्ति नामक लहर पर सवार होना उन्होंने स्वीकार नहीं किया
है, और न ही सर्वज्ञ, करुणामय सद्गुरु वाली छवि की नकाब उन्होंने ओढ़नी चाही है।
"
रोनाल्ड कॉनवे, जो कि ऑस्ट्रेलिया में प्राध्यापक, लेखक, केथलिक तथा वहां के एक
अस्पताल में वरिष्ठ परामर्शक मनोवैज्ञानिक हैं, 1980 में पूना के आश्रम में आए थे। वे अपनी
रिपोर्ट में कहते हैं, “उनके आसपास कुछ मीटर की दूरी पर होना मात्र कुछ विलक्षण परिणाम लाता
है। उसका स्रोत कुछ भी हो, लेकिन रजनीश में कोई विलक्षण शक्ति और चुम्बकत्व है, जो इतनी
स्पर्शगोचर है कि महसूस की जा सके... उनको देखकर मुझे लगा कि शायद ईसा मसीह इसी
तरह के रहे होंगे।
"और “लंडन टाइम्स” के बर्नार्ड लेविन जिन्हें रूढ़िवादी सामाजिक समीक्षकों में तीखे वाग्बाणों
का प्रयोग करनेवाले वरिष्ठ सदस्य कहा जाता है, जब 1980 में रजनीश आश्रम देखने आए तो
उनके उद्गार इस प्रकार थेः "उस व्यक्ति से मैं एकदम सम्मोहित हो गया... और उनके आसपास
रहनेवाले लोगों से भी। रजनीश एक अनूठे शिक्षक हैं... और एक असाधारण चुंबक ।
"जिन लोगों के बहुत संदेहवादी होने की अपेक्षा थी, उनके ये उद्गार देखकर लगता है कि उन
तुलनात्मक रूप से प्रारंभिक दिनों में भी भगवान मात्र एक अन्य मशहूर किये गये पूर्वीय गुरु नहीं थे।
जैसा कि “एडिलेड (ऑस्ट्रेलियाई) सैटरडे रिव्यू" में एलन अटकिन्सन ने 1 अगस्त, 1981 के अंक
में लिखा, “यह बात साफ है कि रजनीश कोई साधारण आदमी नहीं हैं। उनका वर्णन इन शब्दों में
किया जाता हैः एक महान आधुनिक आध्यात्मिक ऋषि; जीसस और बुद्ध की परंपरा के; बुद्धत्व को
उपलब्ध सद्गुरु; पूना के झक्की संत, वर्तमान समय के प्रसन्नचित्त जॉन द बैप्टिस्ट — और उनके
विरोधियों के अनुसार वे क्राइस्ट-विरोधी, पागल, संसार के सबसे खतरनाक आदमी हैं। विगत दो
वर्षों से पश्चिम के मनोवैज्ञानिकों, मनस्चिकित्सकों, चर्च से संबंधित लोगों, पत्रकारों तथा व्यावसायिक
संदेहवादियों के मन में उनकी उपस्थिति और उनके प्रभाव के कारण कुतूहल पैदा हो गया है।
"साढ़े चार साल बाद, सन् 1986 तक, वही कुतूहल जगानेवाली उपस्थिति और प्रभाव दुनिया
के लगभग हर देश के लिए अपने-अपने कम्प्यूटरों में भगवान श्री रजनीश के नाम के आगे लाल
सावधान चिह्न अंकित कर लेने का कारण बन गया है- "राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए
खतरनाक ”..."सार्वजनिक कल्याण की दृष्टि से अहितकारक उपस्थिति”...“राज्य के हितों के
लिए बाधा"... "प्रवेश कदापि न दें।
क्यों?
उनके साथ जुड़ा 'खतरनाक' विशेषण केवल उनके विचारों के कारण उन्हें दिया गया है।
आतंकवादी अथवा किसी संघातक गिरोह के नेता के अर्थों में उनके खतरनाक होने का तो कोई
कभी सवाल ही नहीं था। समस्त ज्ञात वृत्तान्त के अनुसार वे एक ऐसे व्यक्ति थे जो कभी अपने
घर से बाहर नहीं गए, बल्कि प्रवचन देने के अलावा जो वास्तव में अपने कमरे तक से बाहर नहीं
गए। और जिन्होंने बोलने के अलावा और कुछ भी नहीं किया है। जिन दो देशों में वे रहे
भारत और अमेरिका • उनमें गहरी छानबीन करने के बावजूद भी जिस व्यक्ति के ऊपर कोई भी
जुर्म कायम नहीं किया जा सका, सिवाय इसके कि उन्होंने आप्रवास अधिकारियों को झूठे वक्तव्य
दिए हैं।
*
फिर जर्मन, स्विस, ऑस्ट्रेलियन तथा डच सरकारों को 1986 में आपातकालीन आदेश क्यों
पास करने पड़े कि यह व्यक्ति उनके देश की जमीन पर पांव तक नहीं रख सकता?
इटली और स्वीडन ने उन्हें पर्यटक-वीसा देने से इन्कार क्यों कर दिया?
जब हीथ्रो हवाई अड्डे पर उनका जेट आठ घंटे के लिए उतरा तब इंग्लैंड ने उनको ट्रांजिट
लाउंज में रात भर रुकने की इजाजत क्यों नहीं दी? ग्रीस में जब उन्हें चार हफ्ते रुकने की अनुमति
थी तब उन्हें सिर्फ दो हफ्तों के बाद वहां से अचानक निकाल बाहर क्यों कर दिया गया— -जबकि
इन दो हफ्तों में उन्होंने अपने घर से बाहर कदम भी नहीं रखा था?
जिस जेट प्लेन में वे यात्रा कर रहे थे, उसे कनाडा ने ईंधन लेने हेतु पैंतालीस मिनटों के लिए
भी क्यों नहीं उतरने दिया—ऐसी लिखित गांरटी के बावजूद भी कि वे प्लेन के बाहर कदम नहीं
रखेंगे?
सामान्यतः सीधे-सादे करीबियन द्वीप-समूहों ने अखबारों द्वारा प्रसारित मात्र एक अफवाह की
हल्की-सी भनक पर कि वे वहीं जा रहे हैं, अपने हवाई अड्डों को सतर्क क्यों कर दिया कि उनका
हवाई जहाज वहां उतरने न दें?
जमाइका ने उन्हें दस दिन का वीसा देने के बाद, उनके वहां पहुंचने पर उन्हें चौबीस घंटे के
भीतर देश छोड़ने का आदेश क्यों दे दिया?
* पीत पत्रकारिता द्वारा उत्कंठापूर्वक प्रसारित की गयी अफवाहों के ठीक विपरीत, भगवान श्री रजनीश भारत
में कभी किसी प्रकार के आरोप के जुर्म में नहीं थे। अमरीका में, चार वर्ष तक प्रायः प्रत्येक सरकारी एजेंसी द्वारा
चलाई गयी जांच-पड़तालों के बाद, केवल क्षुद्र आरोप जो उन पर लगाये जा सके वे थे कि अमरीका- आगमन पर
उन्होंने झूठा वक्तव्य दिया कि उनका उस देश में स्थायी आवास का इरादा नहीं था जबकि वास्तव में उनका वैसा
इरादा था, और कि उन्होंने कुछ लोगों को ऐसे विवाहों के आधार पर स्थायी आवास के लिए आवेदन करने की प्रेरणा
दी जिनके बारे में उन्हें पता था कि वे विवाह सही नहीं थे।
क्रिस्टन डेमोक्रेटों के एक गुट ने यूरोप की संसद के सामने यह प्रस्ताव क्यों रखा कि सभी सदस्य देश ऐसा उपाय करे कि जिससे वे (भगवान) कभी भी उन देशों की सीमा में रह न सके ?
वेटिकन के अपने नियंत्रण के अंतर्गत आने वाले सभी इतालवी समाचार पत्रों से यह निवेदन क्यों किया कि वे उनके नाम का उल्लेख न करे?
अमरीकी अलर्नी जनरल एड मिज ने ऐसा क्यों कहा वे चाहते है कि " वे (भगवान) भारत वापिस हो ओर फिर कभी देखने सुनने न आय "
ओर वे पश्चिम जगत में न रहे इसके लिए अमरीकी सरकार को ब्लैकमेल पर क्यों उतरना पड़ा ?
ऐसी क्या बात थी जिससे कि विश्व की सर्वाधिक ताकतवर सरकार एक अकेले व्यक्ति से इतनी भयभीत हो गई
जिसके पास न की राजनीतिक पद था , जो स्वयं के अलावा किसी ओर का प्रतिनिधत्व नहीं करता था जो बोलने के अलावा कोई कृत्य नहीं करता था ?
यह कौन आदमी था जिससे अपने खिलाफ कम्युनिस्ट, पूंजीवाद, कैथलिक, ओर फासिस्टुको एक पवित्र बंधन में जोड़ दिया ।
आज इतना ही🙏
आपके अंदर बैठे परमात्मा को मेरा नमस्कार
#मैं_कृष्ण_हुँ
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इस वीडियो का उद्देश्य पैसा कमाना ही नहीं अपितु लोगों के जीवन में आनंद बड़े सभी मित्रों को ओशो नमन💚🌹👏
🌅#इंदौर#परस्पर गार्डन#मां#अजस्ताजी के#संचालन#में#हाटपिपल्या#फ्रेंडस#ग्रुप्स#द्वारा#आयोजित#कि 🌅मां अजस्ता जी के संचालन में हाटपिपल्या अद्भुत ओशो ध्यान शिविर परस्पर गार्डन फूटी कोठी इंदौर* ध्यान शिविर में विभ...
14/09/2025
https://www.youtube.com/live/pNUPG9esHtk?si=wf-LOxKpYCG7PpoD🌅 #श्राद्धपक्ष #हिंदू #जीवन शैली में अपने पूर्वजों का स्मरण करने, उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने एवं उनकी आत्मा को सद्गति मिले इस भावना के साथ किए जाने वाले संकल्पों का पर्व है।
आज के समय में समाज वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर दिए गए तर्कों से ही किसी अवधारणा को समझता जो बिलकुल ठीक बात है। श्राद्ध पक्ष के लिए कई बार मन में सवाल उठता है कि जो पूर्वज #दिवंगत #हो चुके हैं उनके लिए किए जाने वाले किसी भी कार्य का फल उन तक कैसे पहुंच पाता होगा और इस क्रिया को करने से हमें क्या लाभ मिलता है।हमारी संस्कृति में मानव जीवन का मूललक्ष्य जीवन –मरण के चक्र से मुक्त होकर ईश्वर से एकाकार हो जाना है, जिसे मोक्ष कहा जाता है। मनुष्य जब जन्म लेता है तो वो पशुवत होता है।हमारी संस्कृति- परंपराओं में पिरोए गए संस्कारों का उद्देश्य मनुष्य को पशुत्व से मानवत्व की ओर तथा मानवत्व से देवत्व की ओर ले जाने का है जिससे मनुष्य मोक्ष को पाने की दिशा में आगे बढ़ सके।
जब मनुष्य जीवित होता है तब वो अपने आत्मकल्याण के लिए स्वयं प्रयास करता है किंतु जब वो शरीर को छोड़ देता है तब उसकी आत्मा जिस अवस्था अथवा स्थिति में होती है वहाँ से उच्चलोक में उन्नति के लिए, मोक्ष पाने के लिए शरीर के बिना वो कैसे प्रयास कर सकता है। इसलिए दिवंगत आत्मा की उन्नति का प्रावधान भी हमारी संस्कृति में श्राद्ध के माध्यम से किया गया है।
मनुष्य, शरीर और आत्मा का समुच्चय है। आधुनिक विज्ञान शरीर को पदार्थ (Matter) और आत्मा को ऊर्जा(Energy) कहता है। ये पदार्थ #पंच तत्वों #धरती, जल, अग्नि, वायु और आकाश से बना हुआ हैं।आत्मा को विज्ञान उर्जा कहता है, इस उर्जा का भी विज्ञान ने दो भागों में वर्गीकरण किया है -अर्थात विद्युत ऊर्जा जो स्पंदन एवं संकेत के स्वरूप में होती है। #रासायनिक #भाग जो प्रक्रिया स्वरूप में होता है।
जब ये ऊर्जा या आत्मा, पदार्थ से बने शरीर को छोड़ देती है तब उस व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है। उस #पार्थिव #शरीर को परंपराओं के अनुसार पंचतत्व में विलीन करने के लिए अंतिम संस्कार किया जाता है। यहाँ सवाल ये उठता है कि शरीर तो अपने मूल तत्वों में जाकर विलीन हो जाता है लेकिन उस आत्मा या ऊर्जा का क्या होता है? आधुनिक विज्ञान ऊर्जा के बारे में कहता है कि "अर्थात ऊर्जा को न तो नष्ट किया जा सकता है न ही बनाया जा सकता है, उसका केवल स्वरूप बदला जा सकता है।
#विज्ञान #की इस ‘ऊर्जा’ को भारत के आध्यात्मिक विज्ञान में “आत्मा” कहा गया। उस आत्मा के स्वरूप का वर्णन करते हुए भगवान श्री कृष्ण ने गीता में कहा है- इसका अर्थ हम भली भांति जानते हैं। आज विज्ञान जिस बात को कह रहा है,हमारे शास्त्रों में हजारों वर्षों से ये बात बता दी गई है कि आत्मा अजर व अमर है।
प्रसिद्ध वैज्ञानिक ने पदार्थ एवं ऊर्जा के अंतरसंबंधों का रहस्य एक सूत्र से दुनिया को समझाने का प्रयास किया। उस सूत्र को E= mc2 कहा जाता है।
इस सूत्र के अनुसार इस अखिल ब्रम्हांड में पदार्थ एवं ऊर्जा स्थिर है।अर्थात यदि इस ब्रम्हांड को एक पिंड के रूप में कल्पना करें तो इस पिंड के भीतर का पदार्थ एवं ऊर्जा न तो बढ़ाई जा सकती है न ही घटाई जा सकती है केवल रूपांतरित की जा सकती है। गीता के अध्याय 2 - श्लोक 22 में भगवान ने कहा है – “वासांसि जीर्णानि यथा विहाय नवानि गृह्णाति नरोऽपराणि।तथा शरीराणि विहाय जीर्णा-न्यन्यानि संयाति नवानि देही।।“ अर्थात- जैसे मनुष्य पुराने कपड़ों को बदल कर दूसरे नये कपड़े धारण कर लेता है, ठीक उसी तरह आत्मा पुराने शरीरों को छोड़कर दूसरे नये शरीर में चला जाता है।
अब सवाल उठता है कि आत्मा कोई दूसरा शरीर अपनी इच्छा से धारण करता है या किसी नियम के आधार पर करता है।चूंकि पूरी सृष्टि एक नियम से चल रही है जैसे सूर्य का उगना अस्त होना, नवग्रहों का अपने पथ पर भ्रमण, धरती पर चलने वाला ऋतु चक्र आदि। उसी तरह मनुष्य का जन्म तथा मृत्यु के बाद आत्मा की गति आदि भी एक नियम से संचालित है। इस नियम को भगवान श्री कृष्ण ने कर्मफल सिद्धांत के माध्यम से समझाया है।
अपनी #संस्कृति #में वर्णित सर्वोच्च लक्ष्य (मोक्ष) का लाभ अपने पूर्वजों को मिले,उनकी की दिवंगत आत्मा को सद्गति मिले इस हेतु से और यदि अपने कर्मफल के आधार पर उनका जन्म फिर धरती पर होना है तो यहाँ भी उनको सहायता मिले इन सभी उद्देश्यों की पूर्ति के लिए श्राद्ध किया जाता है।
अब सवाल उठता है कि धरती पर किए हुए #श्राद्धकर्म #के प्रतिफल उस आत्मा विशेष तक तक कैसे पहुँचते है। जैसे हमने पूर्व में देखा कि विज्ञान के अनुसार इस आत्मा का स्वरूप स्पंदनों और संकेतों से मिलकर बना है। विज्ञान कहता है कि इस सृष्टि में दिखाई देने वाली हर वस्तु स्पंदनों का घनीभूत स्वरूप है।
पितृतर्पण - #श्राद्ध #आदि करने के लिए हाथ में कुशा,जौ #काला #तिल, अक्षत् एवं जल लेकर संकल्प किया जाता है।
श्राद्ध के अनुकूल समय,स्थान, विधि, सामग्री आदि का चयन हमारे #पूर्वजों #ने अनेक वर्षों तक अनुसंधान कर मिले परिणामों के आधार पर तय किया है। हमारे #संकल्प #स्पंदन आत्मा विशेष को सद्गति प्राप्त करने में सहायता प्रदान करते हैं जिसके फलस्वरूप वो आत्मा हमारे लिए कृतज्ञता के स्पंदन भेजती है। ये स्पंदन धरती पर हमारे संकल्पों को पूरा करने में सहायक बनते है जिसे हम पूर्वजों का आशीर्वाद कहते हैं । #श्राद्ध #कृतज्ञता #आत्मोन्नति #और संकल्पपूर्ति का पर्व है - गिरीश जोशी
संस्कृति अध्येता एवं अकादमिक प्रशासक
💚 #राकेश #सिंह #भदौरिया # रेकी #ग्रैंड #मास्टर #
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🌅 आज#क्वान्टम#रेकी#हीलिंग#सुंदरकांड#पाठ#एवं#भजन #शर्माजी#के यहां#पिंक#सिटी#निरंजनपुर#इंदौर#में 🌅🌠🌎 #श्राद्धपक्ष #हिंदू #जीवन शैली में अपने पूर्वजों का स्मरण करने, उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने एवं उनकी आत्मा ....
02/08/2025
https://youtu.be/14GDKk-ttvM?si=RaPekhH3hm8c11Pd🌅 #रेकी #क्वांटम #ध्यान #के 100 लाभ🌴
ध्यान के कई फायदे हैं ध्यान शक्तिशाली है यहाँ लाभों की निश्चित सूची है जो ध्यान आपको प्रदान कर सकती है:
शारीरिक लाभ:
1- यह ऑक्सीजन खपत को कम करता है।
2- यह श्वसन दर घट जाती है।
3- यह रक्त के प्रवाह को बढ़ाता है और हृदय गति को धीमा कर देता है
4- व्यायाम सहिष्णुता बढ़ जाती है
5- शारीरिक विश्राम के एक गहरे स्तर पर जाता है
6- उच्च रक्तचाप वाले लोगों के लिए अच्छा
7- रक्त लैक्टेट के स्तर को कम करके चिंता का दौरा कम कर देता है।
8- मांसपेशियों की तनाव में कमी
9- एलर्जी, गठिया आदि जैसी पुरानी बीमारियों में मदद करता है
10- पूर्व-मासिक सिंड्रोम के लक्षणों को कम कर देता है
11- पोस्ट ऑपरेटिव चिकित्सा में मदद करता है।
12- प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ाता है
13- वायरस और भावनात्मक संकट की गतिविधि कम कर देता है
14- ऊर्जा, #ताकत #और #उत्साह #बढ़ाता है
15- वजन घटाने में मदद करता है
16- मुक्त कण, कम ऊतक क्षति की कमी
17- उच्च त्वचा प्रतिरोध
18- कोलेस्ट्रॉल के स्तर में गिरावट, हृदय रोग के खतरे को कम करता है।
1 9- फेफड़ों में हवा का बेहतर प्रवाह जिसके परिणामस्वरूप आसान साँस लेना होता है।
20- उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को घटाता है
21- DHEAS के #उच्च स्तर #
22- पुराने रोगों की रोकथाम, धीमा या नियंत्रित दर्द
23- आपको कम पसीना बनाती है
24 - इलाज सिर दर्द और माइग्रेन
25 - मस्तिष्क क्रियाकलाप की अधिकतर अनुशासन
26 - मेडिकल केयर की कमी की आवश्यकता
27- कम ऊर्जा बर्बाद हुई
28- अधिक खेल, गतिविधियों के लिए इच्छुक
29- अस्थमा से महत्वपूर्ण राहत
30- एथलेटिक घटनाओं में बेहतर प्रदर्शन
31- आपके आदर्श वजन को सामान्यीकृत करता है
32- हमारे एंडोक्राइन सिस्टम को सुसंगत बनाता है
33- हमारे तंत्रिका तंत्र को आराम
34- मस्तिष्क विद्युत गतिविधि में स्थायी लाभकारी परिवर्तन का उत्पादन
35 - बांझपन का इलाज (बांझपन का तनाव हार्मोन के रिलीज के साथ हस्तक्षेप कर सकता है जो ओव्यूलेशन को नियंत्रित करता है)।
मनोवैज्ञानिक लाभ:
36- आत्मविश्वास बनाता है
37- सेरोटोनिन स्तर बढ़ता है, मूड और व्यवहार को प्रभावित करता है
38- द्रव और भय का हल
39- खुद के विचारों को नियंत्रित करने में मदद करता है
40- फोकस और एकाग्रता के साथ मदद करता है
41- रचनात्मकता बढ़ाएँ
42- बढ़ी हुई मस्तिष्क तरंग जुटना।
43- बेहतर सीखने की क्षमता और स्मृति
44- जीवन शक्ति और कायाकल्प की भावनाओं में वृद्धि।
45 - भावनात्मक स्थिरता में वृद्धि
46- बेहतर संबंध
47- धीमी दर पर उम्र का मन
48- बुरी आदतों को दूर करने के लिए आसान
49- अंतर्ज्ञान विकसित
50- उत्पादकता में वृद्धि
51- घर और काम पर बेहतर संबंध
52- किसी विशेष स्थिति में बड़ी तस्वीर देखने के लिए सक्षम
53- छोटे मुद्दों को अनदेखा करने में मदद करता है
54- जटिल समस्याओं को हल करने की क्षमता में वृद्धि
55- अपने चरित्र को पुष्ट करता है
56- विकास शक्ति होगी
57- दो मस्तिष्क के गोलार्धों के बीच अधिक संचार
58- एक तनावपूर्ण घटना के लिए और अधिक प्रभावी ढंग से और अधिक प्रभावी ढंग से प्रतिक्रिया।
59- एक की अवधारणात्मक क्षमता और मोटर प्रदर्शन बढ़ता है
60- उच्च खुफिया विकास दर
61- बढ़ी नौकरी की संतुष्टि
62- प्रियजनों के साथ अंतरंग संपर्क की क्षमता में वृद्धि
63- संभावित मानसिक बीमारी में कमी
64- बेहतर, अधिक मिलनसार व्यवहार
65- कम आक्रामकता
66- धूम्रपान, शराब की लत छोड़ने में मदद करता है
67- ड्रग्स, गोलियां और फार्मास्यूटिकल्स पर निर्भरता और निर्भरता कम कर देता है
68- नींद के अभाव से उबरने के लिए कम नींद की आवश्यकता है
69- नींद आने में कम समय की आवश्यकता है, अनिद्रा को ठीक करने में मदद करता है
70- जिम्मेदारी की भावना बढ़ जाती है
71- सड़क क्रोध को कम कर देता है
72- बेचैन सोच में कमी
73- चिंता करने की प्रवृत्ति में कमी
74- कौशल और सहानुभूति सुनना बढ़ता है
75- अधिक सटीक निर्णय करने में मदद करता है
76- ग्रेटर सहिष्णुता
77- माना और रचनात्मक तरीके से कार्य करने के लिए संयम देता है
78 - एक स्थिर, अधिक संतुलित व्यक्तित्व बढ़ता है
79- भावनात्मक परिपक्वता का विकास
आध्यात्मिक लाभ:
80- परिप्रेक्ष्य में चीजों को रखने में मदद करता है
81- मन की शांति, खुशी प्रदान करता है
82- आपको अपने उद्देश्य की खोज में मदद करता है
83- आत्म-वास्तविकता में वृद्धि
84- बढ़ती करुणा
85-बढ़ते ज्ञान
86 -अपने और दूसरों के बारे में गहरी समझ
87-शरीर, मन, सद्भाव में आत्मा लाता है
88-आध्यात्मिक विश्राम का गहरा स्तर
89-अपने आप को स्वीकृति में वृद्धि
90-माफी सीखने में मदद करता है
91-जीवन के प्रति दृष्टिकोण को बदलता है
92 -अपने भगवान के साथ एक गहरा संबंध बना देता है
93-आत्मज्ञान प्राप्त करें
94-अधिक आंतरिक-निर्देशन
95-वर्तमान क्षण में रहने में मदद करता है
96प्यार के लिए एक चौड़ी, गहराई क्षमता विकसित करता है
97अहं के परे शक्ति और चेतना की खोज
98-आश्वासन या ज्ञान" की आंतरिक भावना का अनुभव करें
99-"एकता" की भावना का अनुभव करें
100 आपके जीवन में एकजुटता बढ़ता है
ध्यान पूरी तरह से मुफ़्त है!
इसके लिए कोई विशेष उपकरण की आवश्यकता नहीं है, और जानने के लिए जटिल नहीं है यह किसी भी समय, कहीं भी अभ्यास किया जा सकता है, और यह समय लेने वाली नहीं है सबसे अच्छा, ध्यान के कोई नकारात्मक पक्ष प्रभाव नहीं है। नीचे की तरफ, इसके अलावा प्राप्त करने के लिए कुछ भी सकारात्मक नहीं है!
लाभ की इतनी बड़ी सूची के साथ, आपको अपने आप से पूछना चाहिए कि वह सवाल है,
"💜मैं अभी तक ध्यान क्यों नहीं कर रहा हूं?
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