Adventure with Vinu sunil

Adventure with Vinu sunil

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05/03/2026
16/11/2025

दिसंबर की कड़ाके की ठिठुरा देने वाली ठंड.... ऐसे मे दिल्ली तक के सफ़र में रात मे ट्रेन में सब अपने अपने गर्म लिहाफ़ मे दुबके थे....
श्रवण भी अपनी सीट पर बस दुबकने की ही तैयारी कर रहा था। सोने से पूर्व एक बार फ्रेश होने के इरादे से वो वॉशरूम की तरफ़ गया।
वॉशरूम के बाहर की ओर दरवाजे के सामने एक अधेड़ उम्र की महिला एक छोटा सा थैला लिए बैठी थी... शायद उसमें उसका सामान था।
गर्म कपड़ों के नाम पर मात्र एक पतला सा शॉल ओढ़े हुए थी...जो ठंड से राहत देने के लिए काफ़ी नही थी...श्रवण ने देखा...महिला की आँखों में आँसू की बूंदें थी..जो बार बार गालों पर लुढ़क जाती.. और महिला शॉल से उसे पौंछ देती...
तभी बाजू वाले ट्रैक पर कोई ट्रेन गुज़री.....उससे आती हवा में वह महिला सिहर उठी....कंप-कंपा कर स्वयं को स्वयं मे लपेटने का प्रयास करने लगी।
"कहाँ जा रहीं हैं आप...."अचानक श्रवण ने पूछ लिया।
महिला ने चेहरा ऊपर किया... श्रवण को देखा।
"मथुरा...."महिला ने संक्षिप्त सा उत्तर दिया।
"टिकट नहीं लिया...."श्रवण ने पूछा।
"बेटा... अचानक जाना पड़ रहा है... टीसी आएगा... तो ले लूंगी..."महिला ने आँसू पोंछते हुए कहा।
"क्यों... ऐसे अचानक क्यों.... इतनी ठंड में.... आपको रिजर्वेशन करवाना चाहिए था..."पता नही क्यों पर श्रवण को उस महिला से एक जुड़ाव सा महसूस हो रहा था।
"बेटा....अभी पता चला कि मेरी बेटी प्रसव के दौरान चल बसी.."कहते कहते महिला फ़फक पड़ी।
"ओह.... तो आप अकेली.... परिवार का कोई और सदस्य..." श्रवण ने कुछ पूछना चाहा।
"कोई भी नहीं है... हम माँ बेटी ही एक दूसरे का सहारा थीं... अभी साल हुआ... बिटिया का ब्याह किया था...."महिला सिसकती हुई बोली।
इतने में टीसी आ गया।श्रवण महिला की मनःस्थिति बखूबी समझ रहा था, उसने महिला का टिकट बनवाया और उसे सीट पर बैठाकर.... अपना एक कंबल निकालकर उसे औढाया....
महिला अचरच भरी निगाहों से बस उसे देखती रही... बेचारी कुछ भी बोलने की स्थिति में नहीं थी...उसे तो श्रवण के रूप में जैसे स्वयं ईश्वर मिल गए थे।
"मांजी.... आप ये हज़ार रुपये अपने पास रखें... और अपना पता मुझे नोट करवा दीजिए.... और फिर कभी ऐसा मत कहिएगा कि आपका इस दुनिया में कोई नहीं.... ये आपका बेटा है न...
हर महीने जितना भी संभव हो.... पैसे भेजेगा... और जब कभी मौका लगेगा... मैं आपसे मिलने भी आऊंगा.... मांजी मैं आप पर कोई उपकार नही कर रहा हूँ.... मुझे भी आपके रूप में माँ मिली है...."कहकर श्रवण ने महिला के चरण स्पर्श कर लिए।
महिला की आँखों से अविरल अश्रुधार प्रवाहित हो रही थी....
उसे सबकुछ स्वप्न की तरह प्रतीत हो रहा था....।
महिला कंबल औढ़े चुपचाप लेटी श्रवण को निहार रही थी और श्रवण वॉलेट मे लगे अपनी माँ की तस्वीर को देख रहा था.....।
कड़ाके की ठंड में जहाँ लोग अपने अपने बिस्तरों मे दुबके हुए थे.....वहाँ अपने पन के गर्म लिहाफ से ज़िंदगी के सफ़र मे एक अतुलनीय रिश्ता वज़ूद ले चुका था।....

आप सबको कहानी कैसा लगा। कॉमेंट में जरुर बताएगा। 👍🌹🌻🌼

16/11/2025

चलो देखूँ कौन असली गाँव वाला है—
खेत में लकड़ी को पुराने कपड़े पहनाकर
कौन-सी चीज़ खड़ी कर देते हैं?”

16/11/2025

Good night

15/11/2025

ना बीस का जोश,
ना साठ की समझ…
यही तो वजह है
कि चालीस की उम्र हर तरह से अजीब होती है।
बालों में सफेदी दिखने लगती है,
तेज़ चलो तो साँस थमने लगती है,
टूटे हुए सपने,
अधूरी ख्वाहिशें…
सब अचानक आँखों से सवाल करने लगते हैं।
लेकिन सुकून इस बात का है—
कि ये उम्र हर किसी को नसीब नहीं होती।
जो होती है,
वो बहुत कुछ समझा देती है।
इस उम्र में—
ना कोई हसीना मुस्कुरा कर देखती है,
ना नजरों के तीर चलती है…
और अगर कभी नज़रें टकर भी जाएँ,
तो उम्र खुद तुम्हें
सीमा में खड़े रहना सिखाती है।
जिसकी कदर जवानी में नहीं थी,
वही पत्नी अब सबसे ज़्यादा करीब लगती है।
सच कहें तो—
यही उम्र रिश्तों की असली कीमत समझाती है।
पर बात ये भी सच है—
नज़रिया बदलो तो
शुरुआत आज भी हो सकती है।
आधी उम्र निकल गई सही,
पर आधी अभी भी खूबसूरत बन सकती है।
थोड़े बाल काले कर लो,
थोड़ा दिल फिर से हरा कर लो,
अधूरी ख्वाहिशों से
थोड़ा समझौता कर लो…
ज़िंदगी अपनी रफ़्तार से ही चलेगी—
तुम बस अपनी चाल ठहराना सीख लो।
फिर देखना,
ये उम्र अजीब कम
और खुशनसीब ज़्यादा लगेगी…
क्योंकि चालीस की उम्र—
वास्तव में बहुत ख़ास होती है। ❤️✨ ゚viralシfypシ゚

15/11/2025

फूल 🌹 सी बहु चाहिए,पर बेटी बोझ है 😒😒

15/11/2025

धुल की तरह उडती है अफवाहें पार्थ सत्य जानने के लिए सब्र करणा पडता है..!!

15/11/2025

राजस्थान की परंपराओं में हर रस्म के पीछे एक गहरी भावना छुपी होती है ❤️
जब दूल्हा पहली बार अपनी ससुराल जाने लगता है,
तो उसकी माँ उसे दूध पिलाती है…
लोग कहते हैं ये सिर्फ़ एक रिवाज है,
पर असल में… ये एक माँ का आशीर्वाद होता है।
👩‍🦳 वो दूध नहीं,
अपनी दुआएँ पिलाती है…
कि बेटा अब नया जीवन शुरू कर रहा है,
पर मेरी ममता की आख़िरी बूंद उसके साथ रहे।
उस पल में माँ के मन में एक अनकहा दर्द होता है —
“आज मेरा लाल सच में पराया हो गया…”
पर उसी पल वो अपने आँसू रोककर मुस्कुराती है,
क्योंकि बेटा अब किसी और की ज़िम्मेदारी है।
🌿 ये रस्म ममता से मुक्ति नहीं,
बल्कि ममता की अमरता का प्रतीक है।
🎬 कैप्शन (पोस्ट के नीचे):
राजस्थान की हर रस्म में भावनाओं का सागर छुपा है…
माँ का दूध सिर्फ़ आशीर्वाद नहीं —
वो बेटे के नए जीवन का शुभारंभ होता है।
#राजस्थान_की_रिवायतें

15/11/2025

सफलता की लड़ाई अकेले ही लड़नी पड़ती है भीड़ तो जीत का उत्सव मनाने के लिए होती है 🙏🙏🙏

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