Marma Chikitsa kanpur
DR GYANENDRA KUMAR PANDEY 8528041577
।। बथुवा ।।
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बथुवा को अंग्रेजी में Lamb's Quarters कहते है, इसका वैज्ञानिक नाम Chenopodium album है।
साग और रायता बना कर बथुवा अनादि काल से खाया जाता रहा है लेकिन क्या आपको पता है कि विश्व की सबसे पुरानी महल बनाने की पुस्तक शिल्प शास्त्र में लिखा है कि *हमारे बुजुर्ग अपने घरों को हरा रंग करने के लिए प्लस्तर में बथुवा मिलाते थे* और हमारी बुढ़ियां *सिर से ढेरे व फांस (डैंड्रफ) साफ करने के लिए बथुवै के पानी से बाल धोया करती थी ।* बथुवा गुणों की खान है और *भारत में ऐसी ऐसी जड़ी बूटियां हैं तभी तो मेरा भारत महान है।*
बथुवै में क्या क्या है?? मतलब कौन कौन से विटामिन और मिनरल्स होते हैं ??
तो सुने, बथुवे में क्या नहीं है?? *बथुवा विटामिन B1, B2, B3, B5, B6, B9 और विटामिन C से भरपूर है तथा बथुवे में कैल्शियम, लोहा, मैग्नीशियम, मैगनीज, फास्फोरस, पोटाशियम, सोडियम व जिंक आदि मिनरल्स हैं। 100 ग्राम कच्चे बथुवे यानि पत्तों में 7.3 ग्राम कार्बोहाइड्रेट, 4.2 ग्राम प्रोटीन व 4 ग्राम पोषक रेशे होते हैं। कुल मिलाकर 43 Kcal होती है।*
जब बथुवा शीत (मट्ठा, लस्सी) या दही में मिला दिया जाता है तो *यह किसी भी मांसाहार से ज्यादा प्रोटीन वाला व किसी भी अन्य खाद्य पदार्थ से ज्यादा सुपाच्य व पौष्टिक आहार बन जाता है* और साथ में बाजरे या मक्के की रोटी, मक्खन व गुड़ हो तो इस खाने के लिए देवता भी तरसते हैं।
जब हम बीमार होते हैं तो आजकल डॉक्टर सबसे पहले विटामिन की गोली ही खाने की सलाह देते हैं। खासतौर पर विटामिन बी, सी व लोहे ( Iron) की गोली बताई जाती है और बथुवे में वो सबकुछ है ही, कहने का मतलब है कि *बथुवा पहलवानो बच्चों से लेकर बूढों तक, सबके लिए अमृत समान है।*
यह साग प्रतिदिन खाने से गुर्दों में पथरी नहीं होती। बथुआ आमाशय को बलवान बनाता है, गर्मी से बढ़े हुए यकृत को ठीक करता है। बथुए के साग का सही मात्रा में सेवन किया जाए तो निरोग रहने के लिए सबसे उत्तम औषधि है। बथुए का सेवन कम से कम मसाले डालकर करें। नमक न मिलाएँ तो अच्छा है, यदि स्वाद के लिए मिलाना पड़े तो काला नमक मिलाएँ और देशी गाय के घी से छौंक लगाएँ। बथुए का उबाला हुआ पानी अच्छा लगता है तथा दही में बनाया हुआ रायता स्वादिष्ट होता है।
बथुवा कब्ज दूर करता है और अगर *पेट साफ रहेगा तो कोइ भी बीमारी शरीर में लगेगी ही नहीं,
13/07/2022
1. आम भाषा में मर्म का अर्थ क्या है?
भेद, रहस्य, सीक्रेट, किसी बात के अंदर छिपा हुआ तत्व।
2. क्या शरीर के अंदर भी मर्म होते हैं ?
हाँ शरीर के अंदर भी मर्म होते हैं . मोटे तोर पे ये वे जंक्शन हैं जहां दो या दो से अधिक प्रकार के tissues मिलते हैं, जैसे की हमारी मांसपेशियों, नसें, हड्डियाँ या जोड़।
3. शरीर में मर्म की क्या भूमिका होती है?
छोटी छोटी कोशिकाएं मिलके यह बनती है तथा यह पुरे शरीर का संचालन करते हैं। आयुर्वेद के अनुसार, अच्छे शरीर के लिए इनका स्वस्थ रहना बहुत आवश्यक है।
4. इसकी चिकित्सा कैसे शुरू हुई ?
मर्म-बिंदु मालिश दक्षिण भारत में 1500 ईसा पूर्व की है। एक प्राचीन मार्शल आर्ट, कलारी के परास्नातक ने पहली बार मर्म बिंदु की शक्ति की खोज की। लड़ाई में कलरी सैनानी दुश्मनों को घायल करने के लिए चुने हुए बिंदुओं पर वार करते थे और स्वयं का इलाज भी करते थे
5. क्या है मर्म बिंदु अथवा पॉइंट्और इन्हें क्यों चुना गया है?
कुल हमारे शरीर मैं 107 मर्म बिंदु चयनित किये गए हैं। हमारा मस्तिष्क 108वा मर्म बिंदु है.
प्रमुख मर्म बिंदु शरीर के सात चक्रों या ऊर्जा केंद्रों के अनुरूप होते हैं, जबकि छोटे बिंदु धड़, हाथ और पाओं में पाए जाते हैं। ये बिंदु आकार में एक से छह इंच के व्यास के होते हैं।
ये बिंदु महत्वपूर्ण ऊर्जाओं को लगातार प्रसारित करते हैं। लेकिन जब रास्ते में रुकावट होती है, तो इन्द्रियां प्रभवित हो जाती हैं तथा शरीर के कामकाज में असंतुलन की ओर ले जाता है । इस प्रकार, आयुर्वेद ने एक विशेष उपचार विकसित किया, जिसे मर्म बिंदुओंमें रुकावटों को खोलने के लिए मर्म चिकत्स के रूप में जाना जाता है।
“Mriyatae asmin iti marma”
संस्कृत में कहा गया है की इन मर्म बिंदु में किसी भी तरह की ख़राबी - imbalance, blockage, pain, inflammation से मृत्यु या शरीर को गंभीर नुकसान होने की संभावना अधिक होती है।
4. मर्म बिंदु में imbalance, blockage, pain, inflammation, negative energy किन किन कारणों से हो सकती है?
- खाने में पाए जाने वाले टॉक्सिन्स, विषाक्त पदार्थ
- नियमित व्यायाम न करने से
- एक जगह लगातर बैठ कर काम करने से
5. मर्म चिकित्सा से कैसे इलाज होता है?
विशेष जड़ी बूटियों द्वारा बनाये गए औषधीय तेल से कोमल मालिश के साथ मर्म चिकित्सा मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक उपचार
गुरुपूर्णिमा की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं
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