Gayatri Jadi Booti Bhandar& Treatment Centre,Lucknow

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22/02/2026
24/12/2025

*उदास रहने की अनगिनत वजहों के बीच...*

*खुश रहने की एक वज़ह ढूंढना ही "जिंदगी" हैं...!!*

🌹🌴🙏 सुप्रभात 🙏🌴🌹

01/12/2025

बुढ़ापे की लाठी (वृद्धदारूक) #विधारा,,,,।।।।
विधारा,,,,,,,,
इसीलिए हमारे बुजुर्ग कह गए हैं #विधारा बुढ़ापे का सहारा
विधारा को कई नामों से जाना जाता है, जैसे कि घावपत्ता, अधोगुडा, समुद्रशोख, हाथीलता, वृद्धदारुक,, अर्गेरिया, एलीफ़ेंट क्रीपर, ऊनी मॉर्निंग ग्लोरी, हवाईयन बेबी वुडरोज़, सिल्की हाथी ग्लोरी, समुद्रबेल, गुगुलिक, और चंद्रपदा. विधारा एक सदाबहार लता है. यह भारतीय उपमहाद्वीप की देशज है ,विधारा के पत्तों की आकृति पान के पत्तों जैसी होती है,विधारा के फूल बैंगनी रंग के होते हैं,विधारा के फूल, पत्ते, और शाखाओं में कई तरह के स्वास्थ्यवर्धक गुण होते हैं।

विधारा की जड़ से लेकर तना और पत्तियों तक का इस्तेमाल कई बीमारियों को दूर करने में किया जाता है।
विधारा में एंटीऑक्सीडेंट्स, एंटी-इंफ़्लेमेटरी, एनालजेसिक, हेपाटोप्रोटेक्टिव और एफ़्रोडिसिएक गुण पाए जाते हैं।

विधारा नसों के पोर-पोर को खोलने में टॉनिक का काम करता है।विधारा पुरुषों में स्टेमिना को बढ़ाता है।

विधारा महिलाओं के लिए भी फ़ायदेमंद है, विधारा का इस्तेमाल जोड़ों का दर्द, गठिया, बवासीर, सूजन, डायबिटीज, खाँसी, पेट के कीड़े, सिफलिश, एनीमिया, मिरगी, मैनिया, दर्द और दस्त में किया जाता है। विधारा की जड़ पेशाब के रोगों तथा त्वचा संबंधी रोगों और बुखार दूर करने में उपयोगी होती है।
जड़ का एथेनॉलिक सार सूजन दूर करने के साथ-साथ घाव को भरता है। इसकी जड़ के चूर्ण का मेथेनॉल सर दर्द और सूजन को समाप्त करता है। इसके फूलों का ऐथेनॉल सार उपयुक्त मात्रा में लिए जाने पर घावों को भरता है।

विधारा स्वाद में कड़वा, तीखा, कसैला तथा गर्म प्रकृति का होता है। यह जल्द पचता है और भोजन को भी पचाता है। विधारा के प्रयोग से कफ तथा वात शान्त होता है। यह औषधि पुरुषों में शुक्राणुओं को बढ़ाती है और वीर्य को गाढ़ा करती है। इसके सेवन से हड्डियां मजबूत होती हैं, सातों धातु पुष्ट होते हैं और मनुष्य बलवान तथा तेजस्वी होकर लम्बी आयु तक जवान बना रहता है। सिर में दर्द में विधारा की जड़ को चावल के पानी के साथ पीसकर माथे में यानी ललाट पर लगाने से सिर दर्द ठीक हो जाता है।

कई बार पेट में फोड़ा हो जाता है जिसमें बहुत सारे छेद होते हैं। इन्हें दबाने से इनमें से पस भी निकलता है। ऐसे फोड़े को विद्रधि यानी बहुछिद्रिल फोड़ा या कार्बंकल कहते हैं। ऐसे फोड़े पर विधारा की जड़ को पीसकर लगाने से फोड़ा ठीक हो जाता है।

विधारा, भल्लातक तथा सोंठ, तीनों द्रव्यों को बराबर मात्रा में लेकर चूर्ण बना लें। इस 2-4 ग्राम चूर्ण का सेवन गुड़ के साथ करने से बवासीर रोग में लाभ होता है मधुमेह यानी डायबीटिजके मरीज आज लगभग हर किसी के घर में है विधारा डायबीटिज में तो लाभ पहुँचाता ही है, साथ ही यह धातुओं को पुष्ट करके इसे होने से भी रोकता है। विधारा का सेवन करने से मधुमेह होने की संभावना घट जाएगी और शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ेगी। इसके लिए एक से दो ग्राम विधारा चूर्ण में शहद मिलाकर सेवन करना चाहिए। इससे पूयमेह यानी गोनोरिया में भी लाभ होता है।मूत्रकृच्छ्र रोग में पेशाब में जलन और दर्द होता है। पेशाब की मात्रा भी कम होती है।

विधारा पेशाब को बढ़ाता है और जलन तथा दर्द में आराम दिलाता है। दो भाग विधारा की जड़ के चूर्ण में एक भाग गाय का दूध मिलाकर सेवन करें। अवश्य लाभ होगा यदि गर्भधारण करने में सफलता नहीं मिल रही हो तो विधारा का सेवन करें। विधारा तथा प्लक्ष की जड़ के काढ़े को एक वर्ष तक प्रतिदिन सुबह सेवन करें। इससे स्त्री के गर्भवती होने की सम्भावना बढ़ जाती है ।पेट में दर्द मुख्यतः अपच, कब्ज और गैस के कारण ही होता है। विधारा भोजन को भी पचाता है, कब्ज को भी दूर करता है। विधारा वात यानी गैस को भी नष्ट करता है। पेट दर्द को ठीक करना हो तो विधारा के पत्तों के 5-10 मिली रस में शहद मिलाकर सेवन करें।
निश्चित लाभ होगा।सफेद प्रदर यानी ल्यूकोरिया स्त्रियों में संक्रमण के कारण योनी से सफेद पानी जाने की एक बीमारी है। समय पर चिकित्सा न किए जाने पर स्त्रियों में काफी कमजोरी आ जाती है।

विधारा चूर्ण को ठंडे या सामान्य जल के साथ सेवन करने से सफेद प्रदर में लाभ होता है ,पक्षाघात यानी लकवा का एक प्रकार है। अर्धांग पक्षाघात में शरीर का बाँया या दाँया भाग लकवे का शिकार हो जाता है। विधारा की जड़ एवं कई अन्य घटक द्रव्यों के द्वारा बनाए अजमोदादि चूर्ण का सेवन करने से अर्धांग पक्षाघात में लाभ होता है।विधारा मूल में बराबर भाग शतावर मूल मिलाकर काढ़ा बना लें। इस काढ़े को 15-30 मिली मात्रा में पीने से गठिया में लाभ होता है।
विधारा की जड़ का काढ़ा बना लें। इसे 15-30 मिली मात्रा में पीने से अथवा 1-2 ग्राम विधारा की जड़ के चूर्ण का सेवन करने से जोड़ों के दर्द, आमवात यानी रयूमैटिस अर्थराइटिस तथा सभी प्रकार की सूजन में लाभ होता है।

विधारा के पत्तों की सब्जी बनाकर खाने से वात के कारण होने वाले जोड़ों के दर्द आदि विकार ठीक होते है।..

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