Aayursiddha Arogyam

Aayursiddha Arogyam

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ayursiddha arogyam is ayurvedic treatment, panchakarma, yoga, naturopathy, skin care, psychology, beauty therapy center at hingana road, nagpur

13/04/2026

*फिगर मेंटेनेंस*

आयुर्वेद (Ayurveda) केवल बीमारियों का इलाज नहीं, बल्कि एक स्वस्थ जीवनशैली है जो शरीर को संतुलित (balance), टोन (tone) और सुडौल (maintain) बनाने में मदद करती है। फिगर मेंटेनेंस के लिए आयुर्वेद त्रिदोष (वात, पित्त, कफ) के संतुलन और स्वस्थ पाचन (Agni) पर जोर देता है।
यहाँ आयुर्वेद के अनुसार शरीर को सुडौल बनाए रखने के मुख्य उपाय दिए गए हैं:

*1. खान-पान में बदलाव (Ayurvedic Diet)*
*गुनगुना पानी पिएं:* दिन भर गुनगुना पानी पीने से चयापचय (metabolism) तेज होता है और शरीर से टॉक्सिन्स (ama) बाहर निकलते हैं।

*पाचन के अनुसार खाएं:* जब भूख लगे तभी खाएं। हल्का और ताजा भोजन करें।

*कफ नाशक आहार:* यदि वजन ज्यादा है, तो कफ बढ़ाने वाली चीजें (जैसे- दही, पनीर, चावल, मीठा) कम खाएं। शहद, अदरक, और त्रिफला का सेवन पाचन में मदद करता है।

*जंक फूड से बचें:* प्रोसेस्ड और तली हुई चीजों से बचें क्योंकि ये शरीर में फैट जमा करती हैं।

*2. आयुर्वेदिक दिनचर्या (Dinacharya)*
*सुबह की शुरुआत:* सुबह खाली पेट गुनगुना पानी और नींबू/शहद का सेवन करें।

*योग और प्राणायाम:* फिगर को मेंटेन करने के लिए सूर्य नमस्कार, भुजंगासन, और वज्रासन बहुत फायदेमंद हैं।

*योग/प्राणायाम:* सांस लेने के व्यायाम (प्राणायाम) कोशिकाओं को ऑक्सीजन पहुंचाते हैं और फैट कम करते हैं।

*3. डिटॉक्स और मालिश (Detox & Massage)*
*अभ्यंग (मसाज):* तिल के तेल या आयुर्वेदिक तेलों से शरीर की मालिश करने से त्वचा टोन होती है, ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है और मांसपेशियों को मजबूती मिलती है।

*पंचकर्म:* एक्सपर्ट की सलाह पर पंचकर्म (जैसे विरेचन या बस्ती) शरीर को अंदर से डिटॉक्स करता है, जिससे वजन कंट्रोल में रहता है।

4. *हर्बल सप्लीमेंट्स (Herbs for Body Shaping)*
*त्रिफला:* यह पाचन को सही रखता है और डिटॉक्स में मदद करता है।

*अश्वगंधा:* यह तनाव को कम करता है (कोर्टिसोल कम करता है), जो अक्सर पेट की चर्बी का कारण बनता है।

*गुलुची (गिलोय):* शरीर को टोन करने और सूजन कम करने में सहायक।

*5. तनाव प्रबंधन (Stress Management)*
आयुर्वेद के अनुसार, तनाव (Stress) वजन बढ़ने का एक बड़ा कारण है। इसके लिए ध्यान (Meditation) और शिरोधारा जैसी चिकित्सा शरीर को शांत करती है।

*महत्वपूर्ण सलाह:* किसी भी आयुर्वेदिक उपाय को शुरू करने से पहले किसी योग्य आयुर्वेदिक डॉक्टर (Vaidya) से सलाह जरूर लें, क्योंकि हर व्यक्ति की शारीरिक प्रकृति (वात, पित्त, कफ) अलग होती है।

डॉ. निलेश वानखडे
*आयुर्सिद्ध आरोग्यम*
आयुर्वेदिय पंचकर्म चिकित्सालय
33, शिवशक्ती नगर, वाडी पोलीस स्टेशन के सामने, वाडी, नागपूर.
मो. नं. -9860008801/9960008801
Website -

www.ayursiddhaarogyam.com

07/04/2026

*वातव्याधि (Vatavyadhi)*

आयुर्वेद में वात दोष के असंतुलन से उत्पन्न जोड़ों के दर्द, लकवा, और तंत्रिका संबंधी विकारों (जैसे संधिवात, गृध्रसी) का समूह है। इसकी मुख्य चिकित्सा में स्नेहपन (तेल मालिश), स्वेदन (भाप), और बस्ति (एनीमा) प्रमुख हैं, जो वात को शांत करते हैं। उपचार में आहार (गर्म, पौष्टिक भोजन) और योग भी शामिल हैं।

*वातव्याधि के प्रमुख कारण और लक्षण:*

*कारण:* रुखा, ठंडा भोजन, उपवास, तनाव, और उम्र बढ़ना वात को बढ़ाते हैं।

*लक्षण:* अंगों में दर्द, जकड़न, पक्षाघात (लकवा), बदन दर्द, और कब्ज।

*आयुर्वेदिक चिकित्सा (Vatavyadhi Chikitsa):*

*स्नेहन (Malish):* आयुर्वेदिय सिद्ध तेल से मालिश वात को कम करने के लिए सबसे प्रभावी है।

*स्वेदन (Sudation/Steam)*: पिंड स्वेद (जड़ी-बूटियों की पोटली से सिकाई) दर्द और जकड़न में बहुत राहत देती है।

*बस्ति चिकित्सा (Basti):* वात रोगों के लिए इसे सर्वोत्तम माना गया है, जो पेट के रास्ते औषधि देकर वात को संतुलित करती है।

*आंतरिक औषधियाँ*: रस्नादी क्वाथ, दशमूलारिष्ट, योगराज गुग्गुलु, और अश्वगंधा वातहर जड़ी-बूटियों के रूप में उपयोग की जाती हैं।

*जीवनशैली और आहार (Lifestyle & Diet):*

*आहार:* गर्म, पका हुआ, और स्निग्ध (घी, तेल युक्त) भोजन करें।

*जीवनशैली:* गर्म पानी का सेवन, नियमित मालिश, और हल्का व्यायाम (योग) करें।

डॉ. निलेश वानखडे
*आयुर्सिद्ध आरोग्यम*
आयुर्वेदिय पंचकर्म चिकित्सालय
33, शिवशक्ती नगर, वाडी पोलीस स्टेशन के सामने, वाडी, नागपूर.
मो. नं. -9860008801/9960008801
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29/03/2026

*कटी बस्ती (Kati Basti)*

एक आयुर्वेदिक चिकित्सा है, जो पीठ के निचले हिस्से (कमर) पर गर्म औषधीय तेल को एक घेरे में रोककर की जाती है। यह कमर दर्द, साइटिका, स्लिप डिस्क, मांसपेशियों में अकड़न और जोड़ों के दर्द में तुरंत राहत, सूजन को कम करने और रीढ़ की हड्डी को मजबूत करने के लिए बेहद फायदेमंद है।

*कटी बस्ती के प्रमुख फायदे:*
*कमर दर्द में राहत:* यह रीढ़ की हड्डी के निचले हिस्से (Lumbar region) के पुराने दर्द को कम करता है।

*अकड़न और मांसपेशियों में ऐंठन:* यह मांसपेशियों की जकड़न को कम करता है और उनमें लचीलापन (flexibility) बढ़ाता है।

*साइटिका और स्लिप डिस्क:* यह साइटिका, लम्बर स्पॉन्डिलोसिस और स्लिप डिस्क से संबंधित दर्द और तंत्रिका संबंधी समस्याओं में आराम दिलाता है।

*जोड़ों में चिकनाई:* यह जोड़ों (joints) को पोषण देकर जोड़ों की चिकनाई को बेहतर बनाता है।

*सूजन कम करना:* गर्म औषधीय तेलों के उपयोग से प्रभावित क्षेत्र में सूजन कम होती है और रक्त परिसंचरण (blood circulation) बढ़ता है।

*तनाव मुक्ति:* यह पीठ के निचले हिस्से को आराम (relaxation) देता है, जिससे मानसिक तनाव भी कम होता है।

*नोट:* यह एक चिकित्सीय प्रक्रिया है, इसलिए इसे किसी विशेषज्ञ आयुर्वेदिक चिकित्सक (Ayurvedic Doctor) से ही करवाना चाहिए।

डॉ. निलेश वानखडे
*आयुर्सिद्ध आरोग्यम*
आयुर्वेदिय पंचकर्म चिकित्सलाय
33, शिवशक्ती नगर, वाडी पोलीस स्टेशन के सामने, वाडी, नागपूर.
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28/03/2026

*पिंड स्वेद (Pinda Sweda)*

एक प्रभावी आयुर्वेदिक थेरेपी है, जिसमें गर्म औषधीय पोटली (चावल, जड़ी-बूटियों या पाउडर) से जोड़ों और मांसपेशियों की सिकाई की जाती है। यह मुख्य रूप से जोड़ों के दर्द, सूजन, अकड़न (जैसे गठिया), मांसपेशियों की कमजोरी, साइटिका और तनाव को कम करने में सहायक है। यह रक्त संचार बढ़ाकर शरीर को डिटॉक्सिफाई करता है और कायाकल्प (Rejuvenation) में मदद करता है।

*पिंड स्वेद के प्रमुख फायदे (Pinda Sweda Benefits):*

*दर्द और सूजन में राहत:* यह जोड़ों के दर्द, मांसपेशियों की जकड़न, जीर्ण गठिया (Arthritis), स्पोंडिलोसिस और फ्रोजन शोल्डर जैसी समस्याओं में सूजन को कम कर बहुत राहत देता है।

*रक्त संचार और गतिशीलता में वृद्धि:* गर्म पोटली से मालिश करने से रक्त परिसंचरण में सुधार होता है, जोड़ों के लचीलेपन और गतिशीलता में सुधार होता है।

*मांसपेशियों को मजबूती:* विशेष रूप से षष्ठिका शाली पिंड स्वेद (चावल की पोटली) का उपयोग करने से मांसपेशियों को पोषण मिलता है, कमजोरी दूर होती है और शरीर को ताकत मिलती है।

*तनाव और अनिद्रा का उपचार:* यह तंत्रिका तंत्र (Nervous system) को शांत करता है, नसों को आराम देता है और अनिद्रा (नींद न आना) को दूर करने में बहुत फायदेमंद है।

*शरीर को विषमुक्त (Detox) करना:* इस थेरेपी से आने वाला पसीना शरीर से चयापचय अपशिष्ट (metabolic wastes) और विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालता है, जिससे त्वचा में निखार और चमक भी आती है।

*तंत्रिका संबंधी समस्याओं में सहायक:* यह साइटिका, पक्षाघात (Paralysis) और कार्पल टनल सिंड्रोम जैसी न्यूरोमस्कुलर स्थितियों के प्रबंधन में प्रभावी है।

*पिंड स्वेद के प्रकार:*
👉*पत्र पिंड स्वेद:* औषधीय पत्तियों से की जाने वाली सिकाई।
👉*चूर्ण पिंड स्वेद:* औषधीय पाउडर की पोटली।
👉*षष्ठिका शाली पिंड स्वेद:* विशेष चावल और दूध से बनी पोटली।

*नोट:* किसी भी आयुर्वेदिक उपचार को विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार ही कराना चाहिए

डॉ. निलेश वानखडे
*आयुर्सिद्ध आरोग्यम*
आयुर्वेदिय पंचकर्म चिकित्सालय
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23/03/2026

*मालिश करने के फायदे*

नियमित मालिश (Massage) शरीर और मन के लिए अत्यंत फायदेमंद है। यह तनाव कम करने, मांसपेशियों के दर्द और अकड़न से राहत दिलाने, रक्त संचार (Blood circulation) में सुधार करने और जोड़ों के लचीलेपन को बढ़ाने में मदद करती है। यह बेहतर नींद को बढ़ावा देती है, प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करती है और त्वचा की गुणवत्ता में भी सुधार करती है।

*मालिश के प्रमुख फायदे:*

*तनाव और चिंता में कमी*: मालिश रिलैक्सेशन को बढ़ावा देती है, जिससे तनाव पैदा करने वाले हार्मोन कम होते हैं और शरीर में एंडोर्फिन (खुशी के हार्मोन) बढ़ते हैं।

*दर्द से राहत*: यह मांसपेशियों की जकड़न, जोड़ों के दर्द और पीठ के निचले हिस्से के दर्द को कम करने में अत्यधिक प्रभावी है।

*रक्त संचार में सुधार*: मालिश से रक्त परिसंचरण बेहतर होता है, जिससे शरीर के अंगों तक अधिक ऑक्सीजन और पोषक तत्व पहुंचते हैं।

*बेहतर नींद*: नियमित रूप से तेल की मालिश करने से मन शांत होता है और गहरी नींद आने में मदद मिलती है।

*त्वचा और कांति:* यह त्वचा के छिद्रों को खोलती है, विषैले पदार्थों को बाहर निकालती है और त्वचा में चमक लाती है।

*लचीलापन और मजबूती:* यह मांसपेशियों को ताकत देती है, जोड़ों को लचीला बनाती है और शरीर की अकड़न को दूर करती है।

डॉ. निलेश वानखडे
*आयुर्सिद्ध आरोग्यम*
आयुर्वेदिय पंचकर्म चिकित्सलय
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19/12/2023

आज के दौर मे पुरुषो मे संभोग के समय चरम आनंद पर पहुँचने से पहले वीर्य का निकल जाना सबसे बडी समस्या हो गई है।, ऐसे में शारीरिक और मानसिक कमजोरी की वजह से वीर्य स्खलन पर कंट्रोल नहीं हो पाता। ये भी माना जाता है कि हर पुरुष अपने जीवन काल में कभी न कभी शीघ्रपतन की समस्या से ग्रस्त होता है। इसलिए अगर आप इस समस्या से परेशान हैं तो खुद को अकेला मत समझिये, आप अकेले नहीं जूझ रहे बल्कि एक-तिहाई पुरुष जाति आपके साथ है। कुछ पुरुष सेक्स के दौरान जल्दी वीर्य झड़ने की समस्या का उपचार के लिए दवा लेते है पर बिना मेडिसिन शीघ्रपतन का इलाज नहीं होता है। आयुर्वेदिक दवा से भी कर सकते है।

#शीघ्रपतन
#लिंग से चिपचिपा पानी निकलना
#सही से तनाव ना बन पाना
#लिंग में छोटा पन
#लिंग में पतलापन
#लिंग में टेढ़ापन
#शुक्राणु की कमी
#गर्भ ना रुकना
#संभोग की रूचि ना बनना
#बॉडी में वीकनेस हो जाना
#संभोग के दौरान काफी कमजोरी महसूस होना
#वीर्य में पतलापन
#कम मात्रा में वीर्य निकलना
#संतान ना होना
#वाइफ को संतुष्ट ना कर पाना
#नपुंसकता
#सेक्स पॉवर मैं कमी होना
#बॉडी में संभोग के प्रति इच्छाशक्ति का ना बन पाना
#बचपन की गलतियां हस्त मैथुन से छुटकारा
#सेक्स के प्रति शर्मिंदगी महसूस होना

जिन लोगों को ये तीन सेक्स समस्यायें हों....
1 – लिंग का, छोटा, पतला होना या टेढ़ा होना।
2 – हस्तमैथुन की वजह से लिंग का आकार छोटा रह जाना।
3 – सेक्स करते वक्त, लिंग में कड़ापन ना आना, या फिर कड़ापन आते ही तुरन्त ढीला हो जाना तथा।
शीघ्रपतन की बीमारी होना ।

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16/12/2023
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