Shiwaay Ayurveda

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आयुर्वेद भारतकी 5000 वर्षसे अधिक पुरानी पारंपरिक चिकित्सा पद्धति है, जिसका अर्थ है जीवनका ज्ञान। यह एक समग्र विज्ञान है जो प्राकृतिक चिकित्सा,आहार,योग& जीवनशैलीमें बदलावके माध्यमसे शरीर,मन&आत्माके बीच संतुलन बनाकर रोगोंको रोकने & इलाज करनेमें मदद करता है।

07/05/2026

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"माइंड हाइपर" या हाइपर-इंडिपेंडेंस (Hyper-independence) एक ऐसी स्थिति है, जिसमें व्यक्ति को अत्यधिक स्वतंत्र होने की लत लग जाती है। यह अक्सर किसी ट्रॉमा (trauma) के कारण विकसित होता है, जहाँ व्यक्ति दूसरों पर भरोसा करने या मदद मांगने में असमर्थ महसूस करता है।

👉 अत्यधिक तनाव और एंग्जायटी :- हर काम खुद करने की जिद के कारण मानसिक तनाव (stress) और चिंता (anxiety) बहुत बढ़ जाती है।
👉 मदद मांगने में हिचकिचाहट :- मुसीबत में होने पर भी दूसरों से मदद न मांगना, जिससे काम का बोझ और बढ़ जाता है।
👉 अकेलापन और अलगाव :- दूसरों पर भरोसा न करने के कारण रिश्ते खराब हो सकते हैं और व्यक्ति भावनात्मक रूप से अकेला पड़ जाता है।
👉 मेंटल बर्नआउट (Mental Burnout) :- खुद पर बहुत अधिक जिम्मेदारियां लेने के कारण मानसिक और शारीरिक थकान।याददाश्त में कमी और एकाग्रता में कमी: ब्रेन फॉग जैसी स्थिति, जिसमें सोचने की क्षमता धीमी हो जाती है।
👉 भावनाओं को दबाना :- अपनी तकलीफों को दूसरों से छिपाना, जिससे मानसिक स्थिति और बिगड़ सकती है।

सावधानी :- यदि ये लक्षण आपकी दैनिक जीवन शैली (daily routine) को प्रभावित कर रहे हैं, तो किसी विशेषज्ञ या थेरेपिस्ट से सलाह लेना बहुत महत्वपूर्ण है।

अस्वीकरण :- यह जानकारी केवल शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है और इसे चिकित्सा सलाह नहीं माना जाना चाहिए।

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02/05/2026

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कैंसर के सामान्य लक्षणों में बिना कारण वजन कम होना, लगातार थकान, शरीर में कहीं भी गांठ या सूजन, लंबे समय तक बुखार या खांसी, त्वचा में बदलाव (जैसे नए तिल), और असामान्य रक्तस्राव शामिल हैं। ये लक्षण शरीर के प्रभावित अंग के अनुसार भिन्न हो सकते हैं।

कैंसर के प्रमुख चेतावनी संकेत (Warning Signs)

👉 अचानक वजन घटना :- बिना किसी डाइट या एक्सरसाइज के वजन का तेज़ी से कम होना।लगातार थकान: आराम करने के बाद भी थकान महसूस होना।

👉 शरीर में गांठ या सूजन :- त्वचा के नीचे गांठ महसूस होना, जो समय के साथ बढ़ सकती है।

👉 असामान्य खून बहना :- खांसी, उल्टी, मल या पेशाब में खून आना।त्वचा में बदलाव: नए तिल का बनना या पुराने तिल का रंग/आकार बदलना।

👉 निगलने में कठिनाई :- खाना निगलने में लगातार दर्द या परेशानी।लंबे समय तक बुखार या खांसी: ऐसा बुखार या खांसी जो दवाओं से ठीक न हो रही हो।

👉 पाचन में बदलाव :- बार-बार कब्ज, दस्त या मल त्याग की आदतों में बदलाव।सावधानी: इन लक्षणों का मतलब हमेशा कैंसर नहीं होता, लेकिन इन्हें नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। शुरुआती पहचान से इलाज की सफलता की संभावना बढ़ जाती है।

अस्वीकरण :- यह जानकारी केवल जागरूकता के लिए है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या के लिए कृपया डॉक्टर से परामर्श लें।

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01/05/2026

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जोड़ों की समस्याओं (Joint Problems) की शुरुआत में शरीर कुछ खास संकेत देता है, जिन्हें समय पर पहचानना जरूरी है। इनके शुरुआती लक्षणों में मुख्य रूप से दर्द, अकड़न और सूजन शामिल हैं।

जोड़ों की समस्या के शुरुआती लक्षण (Early Symptoms)
👉 सुबह के समय अकड़न (Morning Stiffness) :- नींद से उठने के बाद जोड़ों में जकड़न होना, जो आमतौर पर 30 मिनट से अधिक समय तक बनी रहती है।👉 हल्का या लगातार दर्द (Persistent Pain) :- जोड़ में ऐसा दर्द जो कुछ हफ्तों तक बना रहे, खासकर आराम करने या हल्की गतिविधि के बाद।
👉 सूजन और गर्माहट (Swelling and Warmth) :- जोड़ों के आसपास सूजन आना और प्रभावित जगह का लाल या गर्म महसूस होना।
👉 चलने-फिरने में कमी (Reduced Range of Motion) :- जोड़ों को मोड़ने या सीधा करने में कठिनाई महसूस होना।
👉 आवाज आना (Clicking or Grinding) :- जोड़ को हिलाते समय चटकने (clicking) या पीसने (grinding) जैसी आवाज आना।
👉 कमजोरी या अस्थिरता (Weakness or Instability) :- जोड़ों में कमजोरी महसूस होना या जोड़ का अपनी जगह से अस्थिर लगना (जैसे घुटने में)।

चेतावनी के संकेत (कब डॉक्टर को दिखाएं)
👉 यदि जोड़ों का दर्द 3 दिन या उससे अधिक समय तक बना रहे, तेज बुखार के साथ सूजन हो, या जोड़ों का आकार बदलता हुआ दिखे, तो यह अर्थराइटिस (गठिया) का संकेत हो सकता है,

नोट: यह जानकारी सामान्य है। किसी भी तरह के दर्द के लिए पेशेवर चिकित्सा सलाह लें।

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29/04/2026

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नींद न आना या खराब नींद (Insomnia) एक गंभीर समस्या हो सकती है, जो मानसिक तनाव, एंग्जायटी, अवसाद, पाचन समस्याओं या कैफीन के अधिक सेवन के कारण होती है। इससे निपटने के लिए सोने का समय निश्चित करें, स्क्रीन टाइम कम करें, और रात में कैमोमाइल चाय या गुनगुना दूध पिएं।

खराब नींद के कारण (Reasons for Poor Sleep):
👉 मानसिक तनाव (Stress) :- डिप्रेशन और एंग्जायटी।
👉 गलत जीवनशैली :- दोपहर में देर तक सोना, देर रात तक स्क्रीन देखना।
👉 स्वास्थ्य संबंधी कारण :- शारीरिक दर्द, मधुमेह, या पाचन संबंधी समस्याएं।
👉 कैफीन/नशा :- सोने से पहले चाय, कॉफी या धूम्रपान।

अच्छी नींद के लिए उपाय (Tips for Better Sleep):
👉 नियमित समय :- हर रात एक ही समय पर सोने और सुबह उठने की आदत डालें।
👉 सोने का माहौल :- बेडरूम में अंधेरा और शांति रखें, तापमान आरामदायक हो।
👉 स्क्रीन से दूरी :- सोने से कम से कम एक घंटा पहले फोन और लैपटॉप बंद कर दें।
👉 मालिश :- सरसों के तेल से पैरों के तलवों की मालिश करने से दिमाग शांत होता है।
👉 गुनगुना दूध :- रात में हल्दी या जायफल मिलाकर गर्म दूध पिएं।
👉 अश्वगंधा :- अश्वगंधा और सर्पगंधा का चूर्ण (3-5 ग्राम) पानी के साथ लेना भी फायदेमंद हो सकता है।

खराब नींद का प्रभाव (Effects of Poor Sleep):
👉 दिन में थकान :- ऊर्जा की कमी और चिड़चिड़ापन।
👉 ध्यान में कमी :- काम या पढ़ाई में फोकस न कर पाना।
👉 दीर्घकालिक जोखिम :- उच्च रक्तचाप और हृदय रोग का खतरा बढ़ सकता है।

यदि यह समस्या लंबे समय तक बनी रहती है, तो डॉक्टर से सलाह लें।

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28/04/2026

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हार्ट अटैक (दिल का दौरा) के प्रमुख लक्षणों में छाती के बीच में तेज दर्द, भारीपन या दबाव महसूस होना शामिल है, जो बाएं हाथ, गर्दन, जबड़े या पीठ तक फैल सकता है। अन्य लक्षणों में सांस फूलना, बहुत पसीना आना, चक्कर आना, जी मिचलाना और घबराहट होना शामिल है। यह दर्द कुछ मिनटों से अधिक समय तक रह सकता है।

हार्ट अटैक के मुख्य चेतावनी संकेत (Heart Attack Symptoms in Hindi)
👉 सीने में दर्द या बेचैनी :- छाती के केंद्र में भारीपन, दबाव, जकड़न या निचोड़ने जैसा महसूस होना।
👉 दर्द का फैलना :- दर्द सीने से निकलकर बाएं हाथ (कभी-कभी दोनों हाथों), गर्दन, जबड़े, पीठ या पेट तक जा सकता है।
सांस लेने में तकलीफ :- सांस फूलना या भारी सांस चलना, जो सीने में दर्द के साथ या उससे पहले हो सकता है।
👉 ठंडा पसीना आना :- बिना किसी शारीरिक मेहनत के अचानक बहुत अधिक पसीना आना।
👉 जी मिचलाना या उल्टी :- मतली, अपच, या पेट में खराबी जैसा महसूस होना।
👉 चक्कर या बेहोशी :- अचानक सिर चकराना या कमजोरी महसूस होना।
घबराहट: बिना किसी कारण के तेज बेचैनी होना।

महत्वपूर्ण बातें:
लक्षण गंभीर हो सकते हैं या फिर हल्के दर्द के रूप में शुरू होकर धीरे-धीरे बढ़ सकते हैं।
महिलाएं, बुजुर्ग और मधुमेह के मरीजों में सीने में दर्द के बजाय केवल सांस फूलना, पीठ या जबड़े में दर्द, और कमजोरी जैसे लक्षण अधिक दिख सकते हैं।
त्वरित कार्यवाही: यदि लक्षण 10-15 मिनट से अधिक समय तक बने रहें, तो तुरंत एम्बुलेंस बुलाएं या नजदीकी मेदांता अस्पताल जैसे हृदय रोग केंद्र पर जाएं।

👉 अस्वीकरण :- यह जानकारी केवल जागरूकता के लिए है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या के लिए डॉक्टर से परामर्श करें।

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26/04/2026

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डायबिटीज (मधुमेह) एक पुरानी मेटाबॉलिक स्थिति है, जिसमें शरीर पर्याप्त इंसुलिन नहीं बना पाता या उसका उपयोग नहीं कर पाता, जिससे रक्त में शुगर/ग्लूकोज का स्तर बढ़ जाता है। यह टाइप 1 (इंसुलिन की कमी) और टाइप 2 (इंसुलिन का कम प्रभावी होना) प्रमुख प्रकार की होती है, जो मुख्य रूप से गलत जीवनशैली और मोटापे के कारण होती है। इसके प्रबंधन में संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, वजन प्रबंधन और दवाएं महत्वपूर्ण हैं।

डायबिटीज के मुख्य लक्षण (Symptoms):
👉 बार-बार प्यास और भूख लगना :- शरीर में ग्लूकोज का स्तर बढ़ने के कारण।
👉 अधिक पेशाब आना :- शरीर अतिरिक्त ग्लूकोज को बाहर निकालने की कोशिश करता है।
👉 वजन घटना :- अचानक बिना किसी कारण के वजन कम होना।
👉 थकान और धुंधली दृष्टि :- शरीर की ऊर्जा में कमी और आंखों पर प्रभाव।
👉 घाव का धीरे भरना :- त्वचा या घाव को ठीक होने में लंबा समय लगना।

डायबिटीज के कारण (Causes):
👉 टाइप 1 :- आनुवंशिक या प्रतिरक्षा प्रणाली द्वारा इंसुलिन बनाने वाली कोशिकाओं को नष्ट करना।
👉 टाइप 2 :- शारीरिक निष्क्रियता, खराब खान-पान, मोटापा, और आनुवंशिकता।

डायबिटीज का प्रबंधन और घरेलू उपाय (Management & Tips):
👉 खान-पान में बदलाव :- मेथी दाना, दालचीनी, और जामुन का सेवन ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है।
👉 नियमित व्यायाम :- पैदल चलना, योग, या अन्य शारीरिक गतिविधियां टाइप 2 डायबिटीज में इंसुलिन संवेदनशीलता बढ़ाती हैं।
👉 क्या न खाएं :- प्रोसेस्ड फूड, चीनी, मैदा, और मीठे फलों (जैसे आम, अंगूर) का सीमित सेवन करें।
👉 जांच :- समय-समय पर फास्टिंग (70-100 mg/dL नॉर्मल) और HbA1c (5.7% से कम नॉर्मल) की जांच कराएं।

सावधानी: डायबिटीज को नियंत्रित न करने पर यह किडनी, हृदय और आंखों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है, इसलिए डॉक्टर की सलाह अनिवार्य है।

Disclaimer :- यह जानकारी केवल सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी उपचार को शुरू करने से पहले विशेषज्ञ (Endocrinologist) से परामर्श करें।

👉 डायबिटीज :- कारण, लक्षण और इलाज की पूरी जानकारी |

Table of Contents. डायबिटीज क्या होता है? डायबिटीज होने के क्या कारण हो सकते हैं? डायबिटीज के लक्षण क्या हैं? डायबिटीज की कैसे पहच...

डायबिटीज़ (मधुमेह) | Diabetes
मधुमेह एक स्वास्थ्य स्थिति है जो शरीर के कई हिस्सों को अत्यधिक नुकसान पहुंचा सकती है यदि इसे नियंत्रित न किया जाए। मधुमेह से ग्रस्...

Ministry for Ethnic Communities
👉 मधुमेह :- यह क्या है, कारण, लक्षण, उपचार और प्रकार - Cleveland Clinic
Translated — धुंधली दृष्टि । अस्पष्टीकृत वजन घटाना । हाथों या पैरों में सुन्नपन या झुनझुनी। धीरे-धीरे ठीक होने वाले घाव या कट।

इसका मकसद सिर्फ़ जानकारी देना है. स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह या जांच के लिए, किसी पेशेवर डॉक्टर से बात करें. एआई से मिले जवाबों में गलतियां हो सकती हैं

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22/04/2026

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किडनी (Kidney) को हिंदी में 'गुर्दा' (बहुवचन: गुर्दे) कहा जाता है। यह मानव शरीर का एक अत्यंत महत्वपूर्ण अंग है जो मुट्ठी के आकार का होता है और पेट में पीछे की तरफ, रीढ़ की हड्डी के दोनों ओर स्थित होता है। गुर्दों का मुख्य काम खून को छानना, विषाक्त पदार्थों (waste products) को पेशाब के रास्ते बाहर निकालना और शरीर में पानी व खनिजों (जैसे सोडियम, पोटेशियम) का संतुलन बनाए रखना है।

किडनी के मुख्य कार्य और महत्व
👉 रक्त शोधन (Blood Filtration) :- प्रतिदिन लगभग 200 क्वार्टर रक्त को छानकर अपशिष्ट पदार्थों को मूत्र के रूप में बाहर निकालते हैं।
👉 द्रव संतुलन (Fluid Balance) :- शरीर में पानी की मात्रा को नियंत्रित करते हैं।
👉 रक्तचाप नियंत्रण (Blood Pressure Control) :- हार्मोन बनाकर रक्तचाप को नियंत्रित करने में मदद करते हैं।
👉 हड्डियों का स्वास्थ्य :- हड्डियों को मजबूत रखने के लिए आवश्यक विटामिन डी को सक्रिय करते हैं।
👉 लाल रक्त कोशिकाओं का निर्माण :- हीमोग्लोबिन के स्तर को बनाए रखने में भूमिका निभाते हैं।

गुर्दे (Kidney) से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें
👉 स्थान :- पेट के अंदर, रीढ़ की हड्डी के दोनों तरफ, छाती की पसलियों के नीचे।
👉 खराबी के लक्षण :- पेशाब में बदलाव, हाथ-पैर में सूजन, अत्यधिक थकान, सांस फूलना, और भूख न लगना।
👉 स्वस्थ रखने के उपाय :- पर्याप्त पानी पीना, कम नमक और संतुलित आहार लेना, और नियमित जांच (जैसे किडनी अल्ट्रासाउंड) करवाना।

गुर्दे शरीर को डिटॉक्स (Detox) करने वाले सबसे महत्वपूर्ण अंगों में से एक हैं, इसलिए इनका स्वस्थ रहना बहुत जरूरी है।

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18/04/2026

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रक्तचाप (Blood Pressure - BP) धमनियों की दीवारों पर बहते रक्त का दबाव है, जिसे सिस्टोलिक (हृदय संकुचन) और डायस्टोलिक (हृदय आराम) रीडिंग में मापा जाता है। एक स्वस्थ वयस्क के लिए सामान्य रक्तचाप 120/80 mmHg से कम माना जाता है। 140/90 mmHg से अधिक का दबाव हाई बीपी या हाइपरटेंशन कहलाता है, जो हृदय, किडनी और मस्तिष्क को नुकसान पहुंचा सकता है।

रक्तचाप के स्तर (mmHg)
👉 सामान्य (Normal) :- 120/80 mmHg से कम।
👉 प्री-हाइपरटेंशन (Pre-hypertension) :- 120–129 / 80 mmHg से कम।
👉 हाई बीपी (हाइपरटेंशन) :- 130/80 mmHg या उससे अधिक।
👉 लो बीपी (हाइपोटेंशन) :- 90/60 mmHg से कम।

उच्च रक्तचाप (High BP) के मुख्य कारण और लक्षण: कारण: तनाव, अधिक नमक का सेवन, मोटापा, धूम्रपान, शारीरिक निष्क्रियता, और मधुमेह।
लक्षण (अक्सर कोई लक्षण नहीं होते): गंभीर मामलों में सिरदर्द, चक्कर आना, नाक से खून आना, या धुंधला दिखना।

ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने के उपाय
👉 आहार में सुधार :- नमक कम करें, पोटैशियम युक्त फल (केला) और सब्जियां खाएं।
👉 जीवनशैली :- रोजाना 30 मिनट व्यायाम, योग और ध्यान करें।
👉 नशे से दूरी :- धूम्रपान और शराब का सेवन बंद करें।
👉 नियमित जांच :- साल में कम से कम एक बार बीपी की जांच जरूर कराएं।

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17/04/2026

With Ayurveda – Yoga – Vedic Astrology – I just got recognized as one of their top fans! 🎉

17/04/2026

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स्वस्थ लिवर शरीर का मुख्य डिटॉक्सिफायर है, जो विषाक्त पदार्थों को फिल्टर करता है, पाचन के लिए पित्त (Bile) बनाता है, और ऊर्जा (ग्लाइकोजन) स्टोर करता है। यह प्रोटीन संश्लेषण, कोलेस्ट्रॉल नियंत्रण और विटामिन A, D, E, K के भंडारण में मदद करता है। स्वस्थ लिवर से बेहतर मेटाबॉलिज्म, वजन प्रबंधन, और इम्यून सिस्टम मजबूत होता है।

लिवर को स्वस्थ रखने के प्रमुख उपाय

👉 संतुलित आहार :- हरी सब्जियां, जामुन, फाइबर युक्त साबुत अनाज और पर्याप्त पानी का सेवन करें।
👉 नियमित व्यायाम :- प्रतिदिन 30-45 मिनट का व्यायाम फैटी लिवर को कम करने और वजन नियंत्रित रखने में सहायक है।
👉 शराब से परहेज :- अत्यधिक शराब का सेवन लिवर सिरोसिस और डैमेज का मुख्य कारण है।
👉 दवाओं का सीमित प्रयोग :- डॉक्टर की सलाह के बिना दर्द निवारक या अन्य दवाएं न लें, क्योंकि वे लिवर पर दबाव डालती हैं।
👉 सुपरफूड्स :- नींबू पानी, ग्रीन टी, लहसुन, ब्रोकली, और चकुंदर लिवर को प्राकृतिक रूप से डिटॉक्स करने में मदद करते हैं।

लिवर के मुख्य कार्य (Benefits of Liver)

👉 विषहरण (Detoxification) :- रक्त से हानिकारक पदार्थों को बाहर निकालना।
👉 पाचन (Digestion) :- फैट को पचाने के लिए बाइल (पित्त) का उत्पादन।
ऊर्जा चयापचय (Energy Metabolism): ग्लूकोज को स्टोर करना और जरूरत पड़ने पर ऊर्जा प्रदान करना।
👉 रक्त शोधन (Blood Purification) :- टॉक्सिन्स को फिल्टर करना।
👉 प्रोटीन निर्माण (Protein Synthesis) :- शरीर के लिए जरूरी प्रोटीन बनाना।

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16/04/2026

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कब्ज (Constipation) के साइड इफेक्ट्स में पेट में तेज दर्द, भारीपन, जलन, और मल त्याग में अत्यधिक तकलीफ शामिल है। लंबे समय तक कब्ज रहने से बवासीर (Piles), भगंदर (Fistula), फिशर (Fissures), पेट फूलना, भूख न लगना, उल्टी, तथा मलाशय से खून आने जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।

कब्ज के प्रमुख साइड इफेक्ट्स (Side Effects of Constipation):

👉 पाचन संबंधी :- पेट में भारीपन, गैस, पेट फूलना (Bloating), पेट में जलन और एसिडिटी।
👉 गुदा संबंधी रोग :- मल के सख्त होने के कारण बवासीर (Piles), गुदा में दरार (Fissure), और भगंदर (Fistula) होने की संभावना बढ़ जाती है।
👉 मल त्याग में समस्या :- मल का बहुत कड़ा होना, बहुत जोर लगाना पड़ना, और पेट साफ न होने की भावना (Incomplete evacuation)।
👉 अन्य शारीरिक प्रभाव :- भूख में कमी, जी मिचलाना, उल्टी आना, थकान, और कमजोरी महसूस होना।
👉 त्वचा और बाल :- लंबे समय तक कब्ज से विषाक्त पदार्थ जमा होने के कारण मुंहासे और पोषक तत्वों के अवशोषण में कमी से बालों का झड़ना हो सकता है।
👉गंभीर जटिलताएं :- पुराना कब्ज रहने पर आंतों में जख्म या सूजन हो सकती है।

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