islamic quotes
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*✍️इब्लिस की दास्तान*
*पहले आसमान पर इब्लीस का नाम आबिद दुसरे पर ज़ाहिद तीसरे पर आरिफ़ चौथे पर वली पांचवे पर तक़ी छठे पर ख़ाजिन सातवे पर अजाज़ील और लुहै महफूज़ में इब्लीस था*
*ये 40000 साल तक जन्नत का खजांची रहा*
*14000 साल तक अर्शे आज़म का तवाफ़ करता रहा,, 80000 साल तक फ़रिशतो के साथ रहा*
*जिसमे से 20000 साल तक फ़रिशतो का वाज़ो नसीहत करता रहा और 30000 साल तक कर्रोबीन फ़रिशतो का सरदार रहा , और 1000 साल रुहानिन फ़रिशतो का सरदार रहा*
*इब्लीस 50000 साल तक अल्लाह तआला ﷻ की ईबादत की यहाँ तक कि अगर उसके सजदों को ज़मीन पर बिछाया जाए तो एक बालिश्त खाली जगह न बचे*
*मुअल्लामुल मलाकुत होने और लाखों करोड़ों बरस इबादत करने के बावजूद सिर्फ एक सज्दा हज़रत आदम अलैहिस्सलाम को ना करने के बिना पर उसको बारगाह ए खुदा बंदी ﷻ यानि अल्लाह तआला ﷻ के रहमों ओ करम से दूर कर दिया गया*
*सोचिये कि लाखों बरस इबादत करने वाला हज़रत आदम अलैहिस्सलाम की तौहीन करने की बनिस्बत लानति हो गया तो जो लोग नबियों के सरदार हुज़ूर ﷺ की तौहीन कर रहे हैं उनकी शान को माजअल्लाह सुम्मा माजअल्लाह घटाने के लिए तनकीद, तम्बीई , या फिर नफ़ी वाली आयते करीमा या फिर हदीस शरीफ़ पेश कर के अपना बद अकीदा साबित करने के लिए गिरी से गिरी हरकतें करते हैं मुब्बाह को बिद्दत और हराम ठहराते हैं, हराम को शिर्क ठहराते हैं और मुसलमानों को क़बर पुजवा, मुशरिक, और काफ़िर तक करार देते हैं उनका क्या होगा* ??
*हज़रत आदम अलैहिस्सलाम को उसके एक सज्दा न करने में 4 कुफ़्र थे मुलाहिजा फ़रमाये*
1. *उसने कहा कि तूने मुझे आग से बनाया इसको मिटटी से मैं इससे बेहतर हूँ, इसमें मलऊन का मक़सद ये था कि तू बेहतर को अदना के आगे झुकने का हुक़्म दे रहा है, जो कि जुल्म है ,, और उसने ये ज़ुल्म की निस्बत ख़ुदा तआला ﷻ की तरफ की जो कि कुफ़्र है*
2. *एक नबी अलैहिस्सलाम को हिकारत से देखा ,, और नबी अलैहिस्सलाम को बनज़रे हिक़ारत देखना कुफ़्र है* !!
3. *नस के होते हुए भी अपना फलसफा झाड़ा मतलब ये कि जब हुक़्म ख़ुदा तआला ﷻ हो गया कि सज्दा कर तो उस पर अपना क़ौल लाना कि मैं आग से हूँ और ये मिटटी से है ,, ये भी कुफ़्र है* !
4. *इज्माअ की मुख़ालिफ़त की , यानि जब सारे के सारे फ़रिश्ते झुक गये तो इसको भी झुक जाना चाहिए था चाहे बात समझ में आये या नहीं , क्योंकि इज्माअ की मुख़ालिफ़त भी कुफ़्र है* ,,!!
📕तफसीरे सावी जिल्द 1/22
📕तफसीरे जमल जिल्द 1/50
📕ज़रकानी जिल्द 1/59
📕नुज़हतुल मजालिस 2/34
*कुछ मुनाफिक, बद मज़हब, जाहिल,गुमराह, नाजायज, लोग जायज़ काम को भी हराम करार देते हैं मुब्बाह काम को भी बिद्दत करार देते हैं और जिस काम को चाहें शिर्क करार दे देते हैं इन जाहिलो को समझ नहीं आता कि किसी भी फतवे को जारी करने से पहले हर काम को हर मसले को कुरान शरीफ़, हदीस शरीफ़, नबी ए करीम ﷺ की सुन्नत और सहाबा ए किराम رَضِیَ اللهُ عَنْهُ के अकवाल पर गौर ओ फिक्र किया जाता हैं फिर किसी भी मुद्दे पर फतवा पारित किया जाता हैं और फतवा जारी करने के लिए मौहद्दिस ( मुफ्ती आलिम ) का होना बेहद जरूरी है कोई भी ऐरा गैरा इस्लाम में फतवा जारी नहीं कर सकता और अगर कोई भी गलत तरीके फतवा जारी करता है वो जहन्नमी है*
*शिर्क बिद्दत शिर्क बिद्दत के फतवे धड़ाधड़ धड़ाधड़ बांटने वालों से मेरी गुजारिश है कि किसी को भी बिद्दती, मुशरिक, काफिर या क़बर पुजवा कहने से पहले अपनी आखीरत का भी ख्याल ज़रूर ज़रूर कर ले अपनी ही गरेबान में झांक कर ज़रूर ज़रूर देख ले वरना जिसको तुम काफिर ,मुशरिक, क़बर पुजवा कह रहे हों कहीं ऐसा ना हो की वो कुफ्र लौटकर तुम पर ही आ जाए और तुम खुद इस्लाम से ख़ारिज हो जाओ किसी को भी बुरा कहने से पहले अपना अंज़ाम ज़रूर ज़रूर सोच ले*
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*✍️ मुहम्मद इज़हार*
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