Harsh Meena
Simpe
अगस्त महीने में की जाने वाली टमाटर की खेती भारत के कई हिस्सों में बहुत लाभदायक होती है, खासकर उन जगहों पर जहां बारिश ठीक-ठाक होती है। नीचे हम आपको उन्नत किस्मों के साथ-साथ साधारण भाषा में टमाटर की खेती की पूरी जानकारी दे रहे हैं, जिससे आप अच्छी पैदावार ले सकें।
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🌱 उन्नत किस्में (Hybrid/Improved Varieties)
(अगस्त में बोने के लिए उपयुक्त किस्में)
1. 🍅 Pusa Ruby – जल्दी तैयार होती है, स्वाद अच्छा होता है।
2. 🍅 Arka Rakshak – रोग प्रतिरोधक और अधिक पैदावार वाली किस्म।
3. 🍅 Abhinav – हाइब्रिड किस्म, आकार और रंग दोनों अच्छे।
4. 🍅 NS 524 – भारी फल, मंडी में अच्छी कीमत मिलती है।
5. 🍅 Sankranti (Seminis) – वर्षा ऋतु के लिए बेहतरीन किस्म।
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📅 बुवाई का समय (अगस्त महीने में)
उत्तर भारत: अगस्त के पहले या दूसरे हफ्ते में नर्सरी में बीज बोना चाहिए।
दक्षिण भारत: अगस्त में सीधी बुवाई भी की जा सकती है, जहां मौसम नम और गर्म रहता है।
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🧴 बीज दर और नर्सरी तैयारी
प्रति एकड़ लगभग 100–150 ग्राम बीज पर्याप्त है।
बीज को Fungicide (जैसे कार्बेन्डाजिम) से उपचार करें।
नर्सरी में बारीक बालू, गोबर की खाद और मिट्टी मिलाकर बिस्तर तैयार करें।
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🚜 खेत की तैयारी
खेत को अच्छे से 2–3 बार जोतकर भुरभुरा बनाएं।
10–15 टन गोबर की सड़ी हुई खाद प्रति एकड़ डालें।
प्लास्टिक मल्चिंग या ड्रिप सिंचाई से पानी की बचत और उत्पादन ज्यादा मिलता है।
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🌾 रोपाई (Transplanting)
25–30 दिन पुरानी नर्सरी की पौध को खेत में लगाएं।
पौधे के बीच की दूरी: 60 x 45 सेमी
रोपाई के बाद हल्की सिंचाई जरूर करें।
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💧 सिंचाई (Watering)
बारिश न होने पर हर 7–10 दिन में सिंचाई करें।
जल जमाव से बचाएं, नहीं तो जड़ें सड़ सकती हैं।
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🧪 खाद एवं उर्वरक (Fertilizers)
प्रति एकड़:
NPK (12:32:16) – 50 किलो रोपाई के समय।
30 दिन बाद: यूरिया 50 किलो + पोटाश 25 किलो
जिंक और बोरॉन का छिड़काव भी लाभदायक होता है।
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🐛 रोग और कीट नियंत्रण
भिंडी रोग (Leaf Curl), झुलसा रोग – रोगरोधी किस्म लगाएं और नीम तेल का छिड़काव करें।
सफेद मक्खी, थ्रिप्स – इमिडाक्लोप्रिड या स्पिनोसैड का छिड़काव करें।
फफूंद रोग – मैनकोजेब या कॉपर ऑक्सीक्लोराइड का प्रयोग करें।
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📦 तोड़ाई और पैकिंग
60–75 दिन में फल तोड़ने लायक हो जाते हैं।
सुबह या शाम को तुड़ाई करें।
फलों को छायादार जगह पर रखें और क्रेट्स या टोकरी में भरें।
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💰 उपज और मुनाफा
हाइब्रिड किस्मों से प्रति एकड़ 250–350 क्विंटल तक उपज हो सकती है।
बाज़ार भाव अगर ₹10/kg हो, तो ₹2.5 से ₹3.5 लाख की आमदनी संभव है।
07/08/2025
✅ बोरॉन स्प्रे के मुख्य फायदे (50 दिन की फसल में):
1. फूल और कलियों का झड़ना कम होता है:
बोरॉन फूलों को लंबे समय तक टिकाए रखता है जिससे pod setting बेहतर होती है।
2. दाने का आकार और भराव बढ़ता है:
बोरॉन की मदद से पौधे में शुगर और पोषक तत्वों का परिवहन अच्छे से होता है, जिससे दाना मोटा और भारी बनता है।
3. पॉड सेटिंग में सुधार:
बोरॉन से फूलों का परागण अच्छा होता है और ज्यादा pods (फली) बनती हैं।
4. रूट एक्टिविटी और पानी लेने की क्षमता बढ़ती है:
जिससे पौधा ज्यादा स्ट्रेस नहीं लेता और स्वस्थ रहता है।
5. डबल उत्पादन का रास्ता साफ करता है:
क्योंकि जब फूल नहीं झड़ते, दाना मोटा होता है, और ज्यादा फली बनती है – तो कुल मिलाकर उत्पादन दोगुना होने के चांस बढ़ जाते हैं।
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🧪 डोज और तरीका:
बोरॉन (20%):
🔹 15 ग्राम प्रति पंप (15 लीटर पानी) या
🔹 200-250 ग्राम प्रति एकड़, पानी में घोलकर स्प्रे करें
🔹 फूल आते समय या 50-55 दिन की अवस्था में एक बार जरूर करें। I am saving this just for me
05/08/2025
💁🏼♀️लौकी (Bottle Gourd) वर्ष भर की जाने वाली फसल है, लेकिन अगस्त का महीना इसकी खेती के लिए (बरसात) अच्छा समय होता है।
लौकी की उन्नत खेती, किस्में और उत्पादन की सही जानकारी हिंदी में दे रहे हैं:
🤔अगस्त में लौकी की खेती कैसे करें?
👉🏻 भूमि :
अच्छी जल निकासी वाली दोमट या बलुई दोमट भूमि उपयुक्त होती है।
pH मान: 6.5 से 7.5 के बीच।
👉🏻भूमि की तैयारी:
खेत की 2-3 बार जुताई करके मिट्टी भुरभुरी करें।
आखिरी जुताई में 15-20 टन गोबर की सड़ी खाद प्रति एकड़ डालें।
👉🏻बीज की बुवाई:
अगस्त में बीज नर्सरी में या सीधे खेत में बो सकते हैं।
बीज की मात्रा: 1 से 1.5 किलो प्रति एकड़।
कतार से कतार की दूरी: 2.5-3 मीटर
पौधे से पौधे की दूरी: 1-1.5 मीटर
🧐लौकी की उन्नत किस्में :
Punjab Komal जल्दी तैयार, कम रोग
Pusa Summer Prolific Long लंबी लौकी, अच्छी उपज
Narendra Lauki-1 उत्तर भारत के लिए उपयुक्त
Arka Bahar ज्यादा उत्पादन, रोग प्रतिरोधक
Kashi Ganga (IIVR) मोटी, लंबी लौकी, कम रोग
🧐खाद और उर्वरक Fertilizer
खाद/उर्वरक मात्रा (प्रति एकड़) कब दें
गोबर की खाद 15-20 टन खेत तैयारी के समय
नाइट्रोजन 👎 40-50 किग्रा 2-3 बार में
फास्फोरस (P) 20 किग्रा बोनी के समय
पोटाश (K) 20 किग्रा बोनी के समय
> सिंचाई के बाद टॉप ड्रेसिंग करें।
🧐सिंचाई प्रबंधन
बरसात के समय ज़रूरत अनुसार सिंचाई करें।
जलभराव से बचाएं।
नमी बनाए रखें, जिससे फल अच्छे आएंगे।
🤔रोग और कीट नियंत्रण
👉🏻प्रमुख रोग:
पत्ती झुलसा (Downy mildew)
सफेद धब्बा (Powdery mildew)
🧐उपाय:
रोगग्रस्त पत्तियों को हटाएं।
कवकनाशी जैसे मैनकोजेब या हेक्साकोनाज़ोल का छिड़काव करें।
👉🏻कीट:
लाल मक्खी, फल छेदक
🧐उपाय:
ट्राइकोडर्मा या नीम तेल 5 मिली/लीटर का छिड़काव करें।
🤔उत्पादन (उपज)
यदि सही देखभाल हो तो: 200-250 क्विंटल प्रति हेक्टेयर (80-100 क्विंटल प्रति एकड़) 👍🏻👍🏻
जब सब्जियों (जैसे लौकी, भिंडी, टमाटर, खीरा, कद्दू आदि) में फ्लावरिंग (फूल आना) शुरू हो जाती है, तो यह समय बहुत ही नाजुक होता है। अगर इस समय थोड़ी भी लापरवाही हो जाए, तो फूल गिर सकते हैं या फूल फल में कन्वर्ट नहीं होते। नीचे कुछ अहम बातों का ध्यान रखने से आप ज्यादा से ज्यादा फूलों को फल में बदल सकते हैं:
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🌼 फूलों से फल बनने के लिए ध्यान देने वाली बातें:
1. 🌱 परागण (Pollination) का ध्यान रखें:
प्राकृतिक परागणकर्ता जैसे मधुमक्खी, तितलियाँ आदि को आकर्षित करने के लिए पास में फूल वाले पौधे लगाएँ।
हाथ से परागण (Hand Pollination) करें अगर फल कम बन रहे हैं। नर फूल के पराग को मादा फूल पर रगड़ें (जैसे लौकी, कद्दू आदि में ज़रूरी होता है)।
2. 💧 संतुलित पानी देना:
बहुत ज़्यादा या बहुत कम पानी दोनों ही नुकसानदायक हैं।
3. ☀️ सही धूप:
कम से कम 6-7 घंटे की धूप ज़रूरी है। इससे पौधे में एनर्जी बनेगी और फलन बेहतर होगा।
4. 🧪 पोषक तत्वों का संतुलन:
नाइट्रोजन (N) ज्यादा देने से सिर्फ पत्ते बनते हैं, फल नहीं।
फूल और फल के समय फॉस्फोरस (P) और पोटाश (K) युक्त खाद दें (जैसे बोनमील, राख, केला छिलका, या फूल-फलवर्धक जैविक खाद)।
5. 🌿 पौधों की सफाई और देखरेख:
सूखे, पीले या खराब पत्तों को हटा दें जिससे पौधा अपनी ऊर्जा सही जगह लगाए।
कीड़े-मकोड़ों पर नज़र रखें — जैसे फूलों में छेद करने वाले कीड़े।
6. 🧼 जैविक स्प्रे:
खट्टे छाछ, नीम तेल, अदरक-लहसुन स्प्रे जैसे जैविक नुस्खे नियमित दें जिससे रोग और कीट ना लगें।
7. 🔁 नर-मादा फूलों की पहचान (विशेषतः लौकी, कद्दू, तुरई में):
नर फूल में नीचे पतला डंठल होता है, जबकि मादा फूल के नीचे छोटा फल जैसा भाग होता है।
मादा फूल कम आएं तो पोटाश बढ़ाएं।
बरसात 🌧️का मौसम जहाँ 🌱पेड़-पौधों की हरियाली और तेजी से वृद्धि का समय होता है, वहीं यह फफूंद जनित रोगों का सबसे अनुकूल मौसम भी होता है। अत्यधिक नमी, लगातार भीगते पत्ते, जल-जमाव और बादल छाए रहने जैसी स्थितियाँ फफूंद (Fungus) के प्रसार को तेज़ कर देती हैं। यह फफूंद पौधों की जड़, तना, पत्ती, फूल और फल को संक्रमित कर उन्हें धीरे-धीरे नष्ट कर सकती है। इससे न केवल पौधों की वृद्धि रुक जाती है, बल्कि उपज, गुणवत्ता और आर्थिक नुकसान भी होता है।
ऐसे में फंगीसाइड का सही समय पर और सही विधि से प्रयोग करना बहुत आवश्यक हो जाता है। यह न केवल फसलों को रोगों से बचाता है, बल्कि उनकी उत्पादकता, गुणवत्ता और जीवनकाल को भी बढ़ाता है। यही कारण है कि मानसून के मौसम में फफूंद नियंत्रण और फंगीसाइड का प्रयोग कृषि, बागवानी, फूलों की खेती, वानिकी और भंडारण आदि सभी क्षेत्रों में अत्यधिक आवश्यक और उपयोगी हो जाता है।
🧴 फंगीसाइड क्या है?
• फंगीसाइड एक रासायनिक या जैविक पदार्थ है।
• यह फफूंद की कोशिकीय क्रिया को बाधित कर उसे नष्ट करता है।
• यह रोकथाम और उपचार दोनों में उपयोगी होता हैं।
⚙️ फंगीसाइड का कार्य:
• पौधों को फफूंद जनित रोगों से बचाना।
• संक्रमित बीज, पत्तियाँ, फल आदि का उपचार।
• फसल की गुणवत्ता और उपज को बनाए रखना।
✅ फायदे:👇🏻
• फसल की उत्पादकता में वृद्धि।
• पौधों की वृद्धि और स्वास्थ्य बेहतर।
• भंडारण के समय फसल सुरक्षित रहती है।
• रोग प्रतिरोधक क्षमता में सुधार।
🧴 फंगीसाइड के प्रकार:👇🏻
🍁 प्रभाव के आधार पर
◆ संपर्क फंगीसाइड: पौधे की सतह पर कार्य करता है।
👉 उदाहरण: मैनकोजेब, बोर्डो मिश्रण
◆ प्रणालीगत फंगीसाइड: पौधे के अंदर प्रवेश कर कार्य करता है।
👉 उदाहरण: कार्बेन्डाजिम, हेक्साकोनाज़ोल
🍁 रासायनिक संरचना के आधार पर:
👉 सल्फर आधारित
👉कॉपर आधारित
👉 ट्रायाजोल, स्टोबिलुरिन आदि
🧴 फंगीसाइड प्रयोग के प्रकार:👇🏻
🍁 स्प्रे (फोलियार): पत्तियों पर छिड़काव।
👉 रोग की रोकथाम या प्रारंभ अवस्था में।
🍁 बीज उपचार: 2–3 ग्राम फंगीसाइड प्रति किग्रा बीज
बोने से पहले उपचारित करें
🍁 मिट्टी में मिलाना: जड़ सड़न व मिट्टी जनित रोगों में
👉 ट्राइकोडर्मा, सल्फर आदि मिलाएं
🍁 ड्रेंचिंग (जड़ों में घोल डालना): गंभीर रोग की स्थिति में
👉 प्रति पौधा 200–500 मिली घोल
🧴 फंगीसाइड की मात्रा (प्रति लीटर पानी):👇🏻
• रोकथाम - मैनकोजेब 2 से 2.5 ग्राम
• आंतरिक रोग - कार्बेन्डाजिम 1 से 1.5 ग्राम
• पत्तियों के रोग - हेक्साकोनाज़ोल 1 मिली
• फलदार फसल - कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 2.5 से 3 ग्राम
• धान में ब्लास्ट - ट्राइसाइक्लाज़ोल 0.6–1 ग्राम
• लीफ स्पॉट , रस्ट - प्रोपिकोनाज़ोल 1 मिली
• अंगूर, नींबू, आम - .बोर्डो मिश्रण 1% घोल
• जैविक उपयोग - सल्फर पाउडर 2–3 ग्राम
🌱 जैविक/प्राकृतिक विकल्प:👇🏻
• नीम तेल - 5 मिली + 1 मिली साबुन/लीटर
• ट्राइकोडर्मा - बीज व मिट्टी उपचार
• छाछ स्प्रे - 200 मि.ली. छाछ + 800 मि.ली. पानी
• हल्दी + राख - मिट्टी में मिलाएं
• लहसुन-अदरक-मिर्च - अर्क छिड़काव हेतु
⚠️ फंगीसाइड के दुष्प्रभाव:👇🏻
🪴पौधों पर: पत्तियाँ झुलसना, फल/फूल गिरना।
🌱 मिट्टी पर: लाभकारी जीव नष्ट होना, बचे हुए अवशेष जमा होना।
👨🌾 मानव पर: त्वचा एलर्जी, आंखों में जलन, साँस संबंधी समस्या, तंत्रिका तंत्र पर असर होना।
🐝 मित्र कीटों पर: मधुमक्खी, तितलियों को हानि, जैव संतुलन प्रभावित होना।
🌍 पर्यावरण पर: जल स्रोतों का प्रदूषित होना।
🪴सावधानी बरतें:👇🏻
• केवल निर्देशित मात्रा और विधि का पालन करें।
• छिड़काव करते समय मास्क, दस्ताने, चश्मा अवश्य पहनें।
• वर्षा या तेज धूप में छिड़काव न करें।
• एक ही फंगीसाइड का बार-बार प्रयोग न करें।
• बच्चों और पालतू जानवरों से दूर रखें।
• ठंडी और सूखी जगह पर भंडारण करें।
• कृषि विशेषज्ञ से समय-समय पर सलाह लेते रहें।
🪴स्थिति अनुसार सर्वश्रेष्ठ फंगीसाइड:👇🏻
• रोकथाम - मैनकोजेब, बोर्डो मिश्रण
• इलाज - SAAF (कार्बेन्डाजिम + मैनकोजेब)
• जैविक खेती - ट्राइकोडर्मा, नीम तेल, सल्फर
• फलदार पौधे - कॉपर ऑक्सीक्लोराइड, बोर्डो
🔚 निष्कर्ष:👇🏻
फंगीसाइड पौधों को फफूंद से बचाने में प्रभावी उपाय है।
लेकिन सावधानीपूर्वक, उचित मात्रा और समय पर उपयोग ही सुरक्षित और लाभकारी होता है। जैविक विकल्पों को प्राथमिकता देना पर्यावरण और स्वास्थ्य दोनों के लिए हितकारी है।
कृपया कमेंट करके अपने विचार और अनुभव हमारे साथ ज़रूर साझा करें। 👍🏻👍🏻
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मूंगफली (Mungfali) की खेती में खाद, उर्वरक व दवा डालने का सही समय और मात्रा
(जैविक और रासायनिक दोनों तरीकों के अनुसार, किसानों के लिए आसान और असरदार नियम)
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🌱 1. खेत की तैयारी से पहले (भूमि सुधार के लिए)
समय: बुवाई से 15-20 दिन पहले
उपयोग करें:
गोबर की सड़ी खाद / कम्पोस्ट: 8-10 टन प्रति एकड़
चूना (Lime) या जिप्सम (यदि मिट्टी अम्लीय है): 100-200 किलो प्रति एकड़
👉 यह मिट्टी का pH संतुलन बनाएगा और गाठें बनने में मदद करेगा।
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🌾 2. बीज की बुवाई के समय (Nutrient Starter Dose)
समय: बीज बोते समय
उपयोग करें:
DAP (डाय-अमोनियम फॉस्फेट): 40-50 किलो प्रति एकड़
जिंक सल्फेट (ZnSO₄): 5 किलो प्रति एकड़
बीजोपचार (Rhizobium + PSB कल्चर से)
Rhizobium कल्चर: 250 ग्राम / 10 किलो बीज
PSB (फॉस्फेट सोलुबिलाइजिंग बैक्टीरिया): 250 ग्राम / 10 किलो बीज
👉 ये जड़ों में गांठ बनाने और फॉस्फोरस के अवशोषण में मदद करेगा।
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☘️ 3. अंकुरण के 20-25 दिन बाद (First Top Dressing)
समय: जब पौधा 4-5 पत्तों का हो जाए
उपयोग करें:
यूリア: 20 किलो प्रति एकड़
पोटाश (MOP - म्युरेट ऑफ पोटाश): 20 किलो प्रति एकड़
👉 नाइट्रोजन और पोटाश बढ़ने में मदद करेगा और फूल आने में सहायक होगा।
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🌸 4. फूल आने पर (40-45 दिन के बाद)
समय: जब पौधे में फूल दिखने लगे
उपयोग करें:
गंधक (Sulphur): 8-10 किलो प्रति एकड़
बोरॉन (Boron - Borax के रूप में): 1 किलो प्रति एकड़
👉 ये दाने को भरने, फूल गिरने से रोकने और उपज बढ़ाने में मदद करता है।
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🦠 5. रोग और कीट नियंत्रण (जरूरत पर करें)
समस्या उपाय मात्रा
सफेद मक्खी/थ्रिप्स इमिडाक्लोप्रिड 17.8% SL 200 ml/एकड़
टिक्का रोग (लीफ स्पॉट) मैन्कोज़ेब 75% WP 400 gm/एकड़
माइट (माहू) प्रोपरगाइट 57% EC 500 ml/एकड़
फफूंदी रोकने के लिए ट्राइकोडर्मा (जैविक) 2 किलो प्रति एकड़
👉 दवा का छिड़काव शाम को करें और हर छिड़काव के बीच 10 दिन का अंतर रखें।
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🌧️ 6. सिंचाई का समय
पहली सिंचाई: बुवाई के 10-12 दिन बाद
दूसरी: फूल आने के समय
तीसरी: दाना भरने के समय
👉 पानी भराव से बचें, नहीं तो जड़ें सड़ जाएंगी।
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📋 एक नजर में अनुसूची (Timeline)
दिन काम मात्रा
Day -15 गोबर खाद / चूना 10 टन / 100 किलो
Day 0 DAP + ZnSO₄ + बीज उपचार 50 + 5 किलो
Day 20-25 Urea + MOP 20 + 20 किलो
Day 40-45 Sulphur + Boron 10 + 1 किलो
जरूरत अनुसार कीटनाशक व दवा लेबल अनुसार
19/11/2023
Gd morning with hrs
12/06/2022
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06/10/2021
Harsh
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