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अगर जिन्दगी को खुशी में गुजारना है जिन्दगी आनंद का उत्सव बनाना है तो अहंकार को मीट जानेदो
तुम जरा अपने मन की जांच करो तुम्हारे मन में जो भी है सब भीड़ का दिया है।।
जब तुम किसी मरते हुए पशु का मास खाते हो तो केवल शरीर नहीं खा रहे तुम उस जीव का भय उसकी पीड़ा और मृत्यु के क्षण में उसके भीतर से निकली हुई उसकी तड़प को अपने भीतर उतार रहे हो😠
मनोविज्ञान का तुम ठीक से अर्थ समझो एक सूफी कहानी।।
अन्दर चलने वाली सांसे तक तुम्हारी अपनी नहीं है..
उमर कितनी है आपकी ।।
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अगर मानसिक शांति चाहिए तो हर बात जानने जिद मत करो।।
तुम ऐसे जीवो जैसे मसाल को दोनो तरफ से जलाया है।।
अकेले सफर तेय करने मतलब ये नही की रिश्तो को छोड़ दिया।।
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Dhani Takharan
Sikar
332021
